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जीएसटी 2.0 में बदलाव संभव: ₹5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर ही चलेगा आपराधिक केस? ये नियम भी बदलेंगे
Sun, 04 Oct 2026 07:17 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 04 Oct 2026 07:17 PM IST
जीएसटी परिषद सात अक्तूबर की बैठक में गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और आपराधिक मुकदमे की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। सामान्य कर विवादों में गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने पर जोर देने की तैयारी है। जीएसटी कानून के कई अपराधों के प्रावधान नरम करने और छोटे करदाताओं को राहत देने पर भी विचार हो रहा है।
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जीएसटी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जीएसटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को होने वाली बैठक में कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही, कर चोरी से जुड़े अपराधों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
सरकार का जोर अब गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई करने पर है। ये प्रस्ताव मंजूर होने पर जीएसटी के तहत कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदल सकता है।
गिरफ्तारी नियमों में क्या बदलाव होने जा रहा है?
जीएसटी परिषद के सामने केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में बदलाव का प्रस्ताव है। अभी इस धारा के तहत तय शर्तें पूरी होने और निर्धारित अपराध होने का विश्वास करने के आधार पर आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, यह शक्ति कर अधिकारियों से वापस ली जा सकती है। इसके बाद किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर परिषद की मुहर लगना बाकी है।
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आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा कितनी बढ़ेगी?
अभी जीएसटी के बड़े अपराधों में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड के मामलों में आयुक्त स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी हो सकती है। प्रस्ताव में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी माफ हो जाएगी। ऐसे मामलों में भी सरकार टैक्स वसूल सकती है और ब्याज तथा जुर्माना लगा सकती है। गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिए आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।
किन मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है?
प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कर विवादों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखना है। वस्तुओं के वर्गीकरण, उनकी कीमत तय करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कारोबारी और कर अधिकारी अलग-अलग राय रखते हैं। ऐसे विवादों में हर मामले को आपराधिक मुकदमे तक ले जाने के बजाय टैक्स वसूली और आर्थिक दंड पर जोर दिया जा सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने, कर भुगतान में देरी या कारोबार की नकदी स्थिति के कारण भुगतान अटकने जैसे मामलों में भी टैक्स, ब्याज और उचित जुर्माना चुकाकर राहत पाने का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्तावित बदलावों के लागू होने पर निर्भर करेगा।
यह भी पढ़ें: क्या होगा भारत के विकास का रोडमैप?: जीडीपी पर शक्तिकांत दास ने कहा- वैश्विक झटकों के बीच अर्थव्यवस्था मजबूत
जीएसटी कानून में कितने अपराधों से जुड़े प्रावधान बदल सकते हैं?
प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी कानून में आपराधिक कार्रवाई से जुड़े 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने, नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है। न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि अदालत हर मामले में कैद की सजा देने के लिए बाध्य न हो। इसके अलावा, सजा की एक श्रेणी में अधिकतम कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने की बात है। हर मामले में जुर्माने का विकल्प उपलब्ध कराने और छोटे करदाताओं के लिए देर से भुगतान पर लगने वाले शुल्क में राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है।
टैक्स वसूली पर जोर क्यों दे रही है सरकार?
जीएसटी लागू होने के समय, एक जुलाई 2017 को फर्जी बिल और कर चोरी पकड़ना मुश्किल था। रिटर्न में दर्ज हर बिल का दूसरे पक्ष के रिकॉर्ड से मिलान करना आसान नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी की शक्ति को डर पैदा करने वाले उपाय के रूप में शामिल किया गया था। अब व्यवस्था में विक्रेता की ओर से दर्ज जानकारी और खरीदार की ओर से दावा किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सकता है। इससे फर्जी क्रेडिट का पता शुरुआती स्तर पर लगाने और उसे आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। सरकार अब इसी तकनीकी व्यवस्था के आधार पर जांच मजबूत करने और टैक्स, ब्याज व जुर्माने के जरिये कार्रवाई करने पर जोर दे रही है।
कारोबारियों और कर प्रशासन पर इसका क्या असर होगा?
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने इसे अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव के तौर पर देखा है। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी के जरिए डर पैदा करने वाली व्यवस्था से तकनीक के आधार पर धोखाधड़ी पकड़ने और आर्थिक दायित्व तय करने की दिशा में बदलाव है। जीएसटी नेटवर्क के आंकड़ों से गड़बड़ियों का पता लगाने पर जोर बढ़ सकता है। प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि इससे सामान्य कर विवादों में कारोबारियों पर गिरफ्तारी का दबाव कम होगा, जबकि सरकार के पास बकाया टैक्स वसूलने और जुर्माना लगाने की शक्तियां बनी रहेंगी।
सोना-चांदी के आयात पर मिल रही छूट खत्म करने की तैयारी
सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसियों को मिलने वाली एकीकृत जीएसटी की छूट खत्म हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को इस प्रस्ताव पर विचार करेगी। फिलहाल इन कीमती धातुओं के आयात पर तीन प्रतिशत जीएसटी लगता है, लेकिन 2017 से बैंकों और नामित एजेंसियों को इससे छूट मिली हुई है। छूट खत्म होने पर इन एजेंसियों और सर्राफा एक्सचेंजों के लिए कर व्यवस्था समान हो जाएगी।
सरकार सोने-चांदी के आयात को लेकर चिंतित है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इसी साल मई में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत और प्लैटिनम पर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के दौरान सोने का आयात 3.38 प्रतिशत बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात 8.81 प्रतिशत घटकर 1.74 अरब डॉलर रहा।
जीएसटी 2.0 का हिस्सा हैं क्या ये बदलाव?
ये प्रस्ताव सरकार के अगले चरण के जीएसटी सुधारों से जुड़े हैं। सितंबर 2025 में दरों में बड़े बदलाव के बाद अब प्रशासन को आसान बनाने, अनुपालन की लागत घटाने और कार्रवाई को अधिक संतुलित बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रस्तावों में आसान पंजीकरण, तेजी से रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट की सरल प्रक्रिया, कारण बताओ नोटिस और जुर्माने से जुड़े बदलाव भी शामिल हैं। जीएसटी परिषद छोटे करदाताओं के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाले शुल्क में छूट और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने पर भी विचार कर सकती है। इसके अलावा, जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत दूसरे केंद्रीय कानूनों में अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की कोशिश भी इसी व्यापक दिशा का हिस्सा है।
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सरकार का जोर अब गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई करने पर है। ये प्रस्ताव मंजूर होने पर जीएसटी के तहत कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदल सकता है।
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गिरफ्तारी नियमों में क्या बदलाव होने जा रहा है?
जीएसटी परिषद के सामने केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में बदलाव का प्रस्ताव है। अभी इस धारा के तहत तय शर्तें पूरी होने और निर्धारित अपराध होने का विश्वास करने के आधार पर आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, यह शक्ति कर अधिकारियों से वापस ली जा सकती है। इसके बाद किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर परिषद की मुहर लगना बाकी है।
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आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा कितनी बढ़ेगी?
अभी जीएसटी के बड़े अपराधों में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड के मामलों में आयुक्त स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी हो सकती है। प्रस्ताव में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी माफ हो जाएगी। ऐसे मामलों में भी सरकार टैक्स वसूल सकती है और ब्याज तथा जुर्माना लगा सकती है। गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिए आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।
किन मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है?
प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कर विवादों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखना है। वस्तुओं के वर्गीकरण, उनकी कीमत तय करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कारोबारी और कर अधिकारी अलग-अलग राय रखते हैं। ऐसे विवादों में हर मामले को आपराधिक मुकदमे तक ले जाने के बजाय टैक्स वसूली और आर्थिक दंड पर जोर दिया जा सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने, कर भुगतान में देरी या कारोबार की नकदी स्थिति के कारण भुगतान अटकने जैसे मामलों में भी टैक्स, ब्याज और उचित जुर्माना चुकाकर राहत पाने का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्तावित बदलावों के लागू होने पर निर्भर करेगा।
यह भी पढ़ें: क्या होगा भारत के विकास का रोडमैप?: जीडीपी पर शक्तिकांत दास ने कहा- वैश्विक झटकों के बीच अर्थव्यवस्था मजबूत
जीएसटी कानून में कितने अपराधों से जुड़े प्रावधान बदल सकते हैं?
प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी कानून में आपराधिक कार्रवाई से जुड़े 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने, नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है। न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि अदालत हर मामले में कैद की सजा देने के लिए बाध्य न हो। इसके अलावा, सजा की एक श्रेणी में अधिकतम कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने की बात है। हर मामले में जुर्माने का विकल्प उपलब्ध कराने और छोटे करदाताओं के लिए देर से भुगतान पर लगने वाले शुल्क में राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है।
टैक्स वसूली पर जोर क्यों दे रही है सरकार?
जीएसटी लागू होने के समय, एक जुलाई 2017 को फर्जी बिल और कर चोरी पकड़ना मुश्किल था। रिटर्न में दर्ज हर बिल का दूसरे पक्ष के रिकॉर्ड से मिलान करना आसान नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी की शक्ति को डर पैदा करने वाले उपाय के रूप में शामिल किया गया था। अब व्यवस्था में विक्रेता की ओर से दर्ज जानकारी और खरीदार की ओर से दावा किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सकता है। इससे फर्जी क्रेडिट का पता शुरुआती स्तर पर लगाने और उसे आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। सरकार अब इसी तकनीकी व्यवस्था के आधार पर जांच मजबूत करने और टैक्स, ब्याज व जुर्माने के जरिये कार्रवाई करने पर जोर दे रही है।
कारोबारियों और कर प्रशासन पर इसका क्या असर होगा?
एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध भागीदार रजत मोहन ने इसे अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव के तौर पर देखा है। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी के जरिए डर पैदा करने वाली व्यवस्था से तकनीक के आधार पर धोखाधड़ी पकड़ने और आर्थिक दायित्व तय करने की दिशा में बदलाव है। जीएसटी नेटवर्क के आंकड़ों से गड़बड़ियों का पता लगाने पर जोर बढ़ सकता है। प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि इससे सामान्य कर विवादों में कारोबारियों पर गिरफ्तारी का दबाव कम होगा, जबकि सरकार के पास बकाया टैक्स वसूलने और जुर्माना लगाने की शक्तियां बनी रहेंगी।
सोना-चांदी के आयात पर मिल रही छूट खत्म करने की तैयारी
सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसियों को मिलने वाली एकीकृत जीएसटी की छूट खत्म हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को इस प्रस्ताव पर विचार करेगी। फिलहाल इन कीमती धातुओं के आयात पर तीन प्रतिशत जीएसटी लगता है, लेकिन 2017 से बैंकों और नामित एजेंसियों को इससे छूट मिली हुई है। छूट खत्म होने पर इन एजेंसियों और सर्राफा एक्सचेंजों के लिए कर व्यवस्था समान हो जाएगी।
सरकार सोने-चांदी के आयात को लेकर चिंतित है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इसी साल मई में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत और प्लैटिनम पर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के दौरान सोने का आयात 3.38 प्रतिशत बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात 8.81 प्रतिशत घटकर 1.74 अरब डॉलर रहा।
जीएसटी 2.0 का हिस्सा हैं क्या ये बदलाव?
ये प्रस्ताव सरकार के अगले चरण के जीएसटी सुधारों से जुड़े हैं। सितंबर 2025 में दरों में बड़े बदलाव के बाद अब प्रशासन को आसान बनाने, अनुपालन की लागत घटाने और कार्रवाई को अधिक संतुलित बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रस्तावों में आसान पंजीकरण, तेजी से रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट की सरल प्रक्रिया, कारण बताओ नोटिस और जुर्माने से जुड़े बदलाव भी शामिल हैं। जीएसटी परिषद छोटे करदाताओं के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाले शुल्क में छूट और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने पर भी विचार कर सकती है। इसके अलावा, जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत दूसरे केंद्रीय कानूनों में अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की कोशिश भी इसी व्यापक दिशा का हिस्सा है।