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सेबी: विनोद अदाणी के खिलाफ एमपीएस से जुड़ा मामला बंद, नियंत्रण के सबूत नहीं; जानिए नियामक ने क्या बताया

Tue, 29 Sep 2026 02:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 29 Sep 2026 02:52 PM IST
सार
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सेबी ने विनोद अदाणी के खिलाफ न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता और धोखाधड़ी के आरोप हटा दिए हैं। नियामक को विदेशी फंडों पर उनके नियंत्रण का कोई सबूत नहीं मिला। नसीर अली शबान अली और चैंग चुंग लिंग पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा।

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Sebi drops Adani-linked shareholding case against Vinod Adani, finds no proof he controlled offshore funds
शेयर बाजार नियामक सेबी - फोटो : PTI

विस्तार

बाजार नियामक सेबी ने अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी के खिलाफ लगे आरोप हटा दिए हैं। सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) और धोखाधड़ी के आरोपों को समाप्त कर दिया है। नियामक यह साबित नहीं कर सका कि विनोद अदाणी ने दो विदेशी फंडों को नियंत्रित किया था। ये फंड अदाणी समूह की चार कंपनियों में निवेशित थे।

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सेबी ने अपने 81 पेज के अंतिम आदेश में यह जानकारी दी। जांच में यह साबित नहीं हो सका कि विनोद अदाणी ने इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (ईआईएफएफ) और ईएम रिसर्जेंट फंड (ईएमआर) के निवेश निर्णयों को निर्देशित किया। ओपल इन्वेस्टमेंट्स के अदाणी पावर में निवेश पर भी उनका नियंत्रण स्थापित नहीं हुआ। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जांच विनोद अदाणी का दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश निर्णयों पर नियंत्रण साबित नहीं कर पाई। 
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एमपीएस नियम के तहत सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 फीसदी सार्वजनिक स्वामित्व अनिवार्य है। सेबी ने कहा कि एमपीएस उल्लंघन तब होता है जब सार्वजनिक शेयरधारक की ओर से रखे गए शेयर प्रमोटर या प्रमोटर समूह के स्वामित्व या नियंत्रण में हों। आरोपों में यह दावा नहीं किया गया था कि विनोद निवेशों के वास्तविक मालिक थे या उन्होंने उन्हें वित्तपोषित किया था।

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क्या नियंत्रण साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत थे?

नियामक को विनोद या प्रमोटर समूह के उन शेयरों का वास्तविक मालिक होने का कोई आरोप नहीं मिला। सेबी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण स्थापित करने के लिए सबूत चाहिए। किसी व्यक्ति को प्रबंधन या नीतिगत निर्णयों को सकारात्मक रूप से निर्देशित करना होगा। केवल संदेह या व्यावसायिक/वित्तीय संबंधों से नियंत्रण का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। नियामक को इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि विनोद ने नसीर अली शबान अहली या चैंग चुंग लिंग को नियंत्रित किया।

क्या निवेश सलाह समझौते ने नियंत्रण स्थापित किया?

यह आरोप था कि गल्फ एशिया, लिंगो, गल्फ अरिज और मिड-ईस्ट के निवेश नसीर अली शबान अहली द्वारा वित्तपोषित थे। अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर खरीदने की निवेश सलाह एक्सेल इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विसेज लिमिटेड ने दी थी। इस पर विनोद का नियंत्रण होने का आरोप था। हालांकि, सेबी ने कहा कि एक्सेल और ग्लोबल मैक्रो एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (जीएमएएमएल) के बीच एक सलाहकार होने का समझौता था। यह समझौता नियंत्रण स्थापित नहीं करता है। समझौते में सलाह को गैर-बाध्यकारी बताया गया था।

क्या अन्य आरोप और जुर्माने लगाए गए?

एमपीएस उल्लंघन का आरोप स्थापित न होने के कारण, धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम (पीएफयूटीपी) विनियमों के तहत संबंधित आरोप भी समाप्त हो गए। हालांकि, सेबी ने नसीर अली शबान अली और चैंग चुंग लिंग पर जुर्माना लगाया। उन पर गलत और अधूरी जानकारी देने में विफल रहने के लिए प्रत्येक पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा। तीसरे नोटिसधारी, तेजल रामलाल देसाई, को इस आरोप के लिए उत्तरदायी नहीं पाया गया। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अन्य कंपनियों ने गौतम अदाणी व 13 अन्य निदेशकों के साथ एमपीएस कार्रवाई का अलग से निपटारा किया था, जिसके लिए 26 अगस्त, 2026 को 1,48,20,000 रुपये चुकाए गए।

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