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राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन आज से: बस्तर में पहली बार 8 और 9 अक्टूबर को जुटेंगे देश के नामचीन अधिकारी, जानें

Thu, 08 Oct 2026 09:07 AM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Thu, 08 Oct 2026 09:07 AM IST
सार
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बस्तर में 8 और 9 अक्टूबर को पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होगा। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से जगदलपुर में होने वाले सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे।

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National Cooperative Conference begins today in bastar CG
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

बस्तर में 8 और 9 अक्टूबर को पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होगा। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से जगदलपुर में होने वाले सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। सम्मेलन भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी की अध्यक्षता में होगा। इसमें अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल और भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी शामिल होंगे।

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सम्मेलन में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स) और दुग्ध समितियों के गठन, एम-पैक्स कंप्यूटरीकरण, सहकारिता में डिजिटल तकनीक के उपयोग, भंडारण क्षमता के विस्तार और सहकारी बैंकिंग के सशक्तिकरण पर विशेष चर्चा होगी। एम-पैक्स से उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से समन्वय पर भी विचार कर अगले तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बताया कि सम्मेलन में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भाग लेंगे। सम्मेलन में सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को मजबूती देने पर जोर रहेगा।
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पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न राज्य एम-पैक्स व दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं और ऋण उपलब्धता के अनुभव साझा करेंगे। विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, कारोबार के विविधीकरण तथा प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।


दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग तथा राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। एम-पैक्स से उर्वरक व अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता और जिला स्तर के सफल सहकारी मॉडल साझा किए जाएंगे। अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी करेंगे।


नई समितियों और डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पहुंच
सचिव डॉ. प्रसन्ना ने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं। ‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए कृषकों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में परिवर्तित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हुए हैं।


गोदाम निर्माण से बढ़ रही भंडारण क्षमता
राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जा रहे हैं। आरआईडीएफ योजना 2022 के तहत 725 एम-पैक्स में गोदामों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2025 में जर्जर गोदाम वाले अथवा गोदाम विहीन 100 एम-पैक्स में गोदाम निर्माण की योजना स्वीकृत कर निर्माण एजेंसियां चयनित की गई हैं। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है। विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चयनित हैं। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, नौ को एएमआई सब्सिडी मिली है और छह में निर्माण शुरू हो गया है।


राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ाव
राज्य शासन ने उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी नियुक्त किया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स का पंजीयन हुआ है। वहीं, 1,681 एम-पैक्स को राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 को राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 को भारतीय बीज सहकारी समिति की सदस्यता मिली है।



एथेनॉल संयंत्रों से मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा
कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता के एथेनॉल संयंत्र से स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन और रोजगार सृजन हो रहा है। भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने को नियमित और बढ़ती आय प्रदान कर रहा है। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इनसे कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सम्मेलन में इन अनुभवों के आधार पर सहकारी समितियों की पहुंच, सेवाओं और कारोबार के विस्तार की आगामी दिशा पर विचार किया जाएगा।

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