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स्थायी समाधान की दरकार: हर साल सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के कई कारक, इनपर पूरे वर्ष प्रभावी नियंत्रण की जरूरत

Wed, 04 Nov 2026 09:36 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Wed, 04 Nov 2026 09:36 AM IST
सार
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प्रदूषण की समस्या को केवल दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा। हर साल सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई ऐसे कारक हैं, जिन पर पूरे वर्ष प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है।

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Need Permanent Solution multiple reason behind pollution rise every winter require effective full year control
दिल्ली में प्रदूषण के कारण दृश्यता प्रभावित (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर पर पहुंचना अब किसी मौसमी समस्या से अधिक एक स्थायी पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। अभी दीपावली आई भी नहीं है और दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) नई ऊंचाई छूने लगा है। इससे त्योहार के दौरान आतिशबाजी और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों के कारण स्थिति और बिगड़ने की आशंका पैदा होती है। यह इस बात का भी गंभीर संकेत है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

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गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में 21 अक्तूबर से ग्रैप-1 लागू है और कुछ ही दिन पहले कुछ नई पाबंदियों के साथ बीएस-6 से नीचे वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद, दिल्ली-एनसीआर में हवा की स्थिति गंभीर होती गई और कई इलाकों में एक्यूआई 400 के भी पार चला गया। नतीजतन, ग्रैप के दूसरे चरण के प्रतिबंध लगाने पड़ गए। यह स्थिति तब है, जब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता डाटा के अनुसार, अक्तूबर 2026 में दिल्ली की हवा पिछले करीब आठ वर्षों में सबसे साफ दर्ज की गई थी।
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दरअसल, अक्तूबर में हुई असामान्य बारिश ने वातावरण में मौजूद धूल व प्रदूषक तत्वों को ढक लिया था। लेकिन, नवंबर आते ही बारिश रुकने, ठंड बढ़ने और हवा थमने की वजह से हालात बदलने लगे। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में बढ़ रहे प्रदूषण में पड़ोसी जिलों से आ रहे प्रदूषकों, वाहनों के धुएं और पराली जलने से पैदा होने वाले धुएं का बड़ा योगदान है। इन हालात में सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी शर्तों के साथ पर्यावरण-अनुकूल (ग्रीन) पटाखों के विक्रय और उपयोग की मंजूरी दी है।
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हालांकि, इसमें संदेह नहीं कि ग्रीन पटाखों को लेकर निर्धारित मानकों तथा समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए पुलिस, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ जवाबदेही भी तय करनी होगी। साथ ही, लोगों को यह समझना होगा कि त्योहार की खुशियां दूसरों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर नहीं मनाई जानी चाहिए। हालांकि, प्रदूषण की समस्या को केवल दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा।


हर साल सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई ऐसे कारक हैं, जिन पर पूरे वर्ष प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है। ग्रैप के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंध तात्कालिक राहत देने के उद्देश्य से हैं, पर इनसे प्रदूषण के मूल कारणों का समाधान नहीं हो सकता। जब तक प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियमित निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हर साल इस संकट से दो-चार होना पड़ेगा।

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