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मौसम बेमौसम: कई राज्यों में लगातार बारिश असामान्य बदलाव के संकेत, समाधान की दिशा में गंभीर कदम उठाने ही होंगे

Tue, 29 Sep 2026 08:56 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Tue, 29 Sep 2026 08:56 AM IST
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सार
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दिल्ली में सितंबर महीने का पिछले 18 वर्षों में सबसे कम न्यूनतम तापमान दर्ज होना और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में लगातार बारिश मौसम में असामान्य बदलाव के संकेत हैं। इसकी वजह जलवायु परिवर्तन हो सकता है, लेकिन सिर्फ यह मान लेने से नहीं, समाधान की दिशा में गंभीर कदम उठाने से हालात बदलेंगे।
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Weather Persistent rainfall across several states unusual changes serious steps must for finding solution
मौसम का हाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सितंबर के आखिरी सप्ताह में जब देश सामान्य तौर पर मानसून की विदाई और धीरे-धीरे बढ़ती गर्मी से राहत के बीच शरद ऋतु की ओर बढ़ रहा होता है, तब दिल्ली में रविवार की सुबह 21 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज होना मौसम के असामान्य बदलाव का संकेत है, लेकिन इसी बदलाव का दूसरा और अधिक चिंताजनक चेहरा उत्तर भारत में भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों और जनजीवन में पैदा हुई मुश्किलों के रूप में दिखाई दे रहा है।



दिल्ली का तापमान सामान्य से करीब तीन डिग्री कम पर पहुंच गया और यह सितंबर में 18 वर्षों में सबसे कम न्यूनतम तापमान रहा। मौसम के इस बदलाव का सकारात्मक पक्ष राजधानी की हवा में भी दिखाई दिया। बारिश और तेज हवाएं वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों को हटाने में मदद करती हैं। लेकिन, इस राहत को स्थायी समाधान समझना भूल होगी।


बारिश से प्रदूषण के कण कुछ समय के लिए कम हो सकते हैं, लेकिन वाहनों, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य स्रोतों से लगातार होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा की गुणवत्ता को फिर प्रभावित कर सकता है। हालांकि, असामान्य मौसम की असली कहानी दिल्ली के बजाय उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में दिखाई दे रही है, जहां लगातार बारिश राहत के बजाय आफत बनकर आई है।

केवल उत्तर प्रदेश में ही बारिश से 90 लोगों की मौतें और हजारों मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें हैं। मौसम विज्ञान की दृष्टि से देखें, तो बंगाल की खाड़ी से उठे मौसम तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में व्यापक बारिश हुई। इन घटनाओं से एक तो साफ होता है कि भारी बारिश अब केवल जलभराव की नहीं, बल्कि सड़क, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, कृषि और आवास से जुड़ा एक बहुआयामी संकट बनती जा रही है। ऐसी हर असामान्य मौसमी घटना का संबंध जलवायु परिवर्तन से हो सकता है, लेकिन हर बार सिर्फ यही मानकर रह जाने से काम नहीं चलेगा।

बदलते मौसमी पैटर्न के बीच यह जरूरी हो गया है कि देश के विभिन्न राज्य व शहर अपनी आपदा प्रबंधन क्षमता को सशक्त बनाएं। पर्वतीय राज्यों में तो और अधिक सक्रियता की जरूरत है, जहां अत्यधिक बारिश अक्सर भू-स्खलन और बाढ़ की आशंका को बढ़ा देती है। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की समस्या बन चुकी है। ऐसे में, अब बेहद जरूरी हो गया है कि नीति निर्माता, प्रशासन व समाज मिलकर जलवायु-अनुकूल विकास की दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं, ताकि प्रकृति के बदलते मिजाज के बीच भी आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके।

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