उत्तराखंड: भूस्खलन का खतरा. श्रीनगर और आसपास का 22 फीसदी से अधिक क्षेत्र संवेदनशील, एनआईटी अध्ययन में खुलासा
पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों की योजना बनाते समय अब वैज्ञानिक आंकड़े अहम भूमिका निभाएंगे। एक नए शोध ने श्रीनगर क्षेत्र के उन इलाकों को चिन्हित किया है जहां भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक है।
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उत्तराखंड का श्रीनगर और आसपास का 22 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील है। इसे लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक रिस्क मैप तैयार किया है। भविष्य में विकास योजनाएं बनाते समय यह मैप मदगार साबित होगा। इससे जुड़ा अध्ययन हाल में डिस्कवर जियो साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
उत्तराखंड में भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं, इन घटनाओं की संख्या बरसात के समय और बढ़ जाती है। इस चुनौती से निपटने और जोखिम का मूल्यांकन करने में विभिन्न विभाग और संस्थान जुटे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी विभाग के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ.विकास प्रताप सिंह और मो.शोएब ने श्रीनगर व आसपास के करीब 70 स्क्वॉयर किमी एरिया में भूस्खलन को लेकर कौन-कौन से क्षेत्र संवेदनशील हैं, इसका अध्ययन कर एक रिस्क मैप तैयार किया है।
इसके बाद एक रिस्क मैप तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि श्रीनगर और उसके आसपास 22 प्रतिशत इलाका भूस्खलन को लेकर संवेदनशील है। इस रिपोर्ट में कितना क्षेत्र बहुत संवेदनशील, संवेदनशील, मध्यम और कम संवेदनशील क्षेत्र है, उसका क्रमवार उल्लेख किया गया है। इस अध्ययन रिपोर्ट से भविष्य की विभिन्न सरकारी योजनाओं को बनाने में मदद मिलेगी।
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11 पहलुओं को किया शामिल
इस अध्ययन में कई पैरामीटर पर काम किया गया है। इसमें बारिश, चट्टान कैसी है, टूटी चट्टान, नाले से चट्टान की नजदीकी, जियोलॉजिकल फॉल्ट कहां है, जमीन का इस्तेमाल कैसे हो रहा है आदि समेत 11 पहलुओं को शामिल किया गया है। फिर भूकोश की जानकारी को एक जीआईएस आधारित सांख्यिकी मॉडल के जरिये देखा गया।