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दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग: अब पढ़ने का मन नहीं, छह महीने से झेल रहा मानसिक पीड़ा...पीड़ित डॉक्टर की आपबीती

Sat, 22 Aug 2026 03:44 PM IST
Renu Saklani अंकित यादव, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
अंकित यादव, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 22 Aug 2026 03:44 PM IST
सार
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 दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर से रैगिंग की घटना सामने आई है। इस बार एमबीबीएस नहीं बल्कि स्नातकोत्तर (पीजी) कर रहे सीनियर डॉक्टरों पर जूनियर के साथ रैगिंग का आरोप लगा है।

इस मामले में पीड़ित डॉक्टर ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.गीता जैन ने एंटी रैगिंग कमेटी को जांच सौंप दी है।

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Ragging in Doon Medical College Junior PG Doctor Alleges Harassment Says I Don’t Feel Like Studying Anymore
दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर से हुई रैगिंग की घटना ने छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रैगिंग से क्षुब्ध जूनियर पीजी डॉक्टर अपना दर्द बयां करते हुए भावुक हो गया। डॉक्टर बोला कि पिछले छह महीने से मानसिक पीड़ा झेल रहा हूं। अब तो पढ़ने का भी मन नहीं करता है।

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साढ़े पांच वर्ष एमबीबीएस का कोर्स पूरा करने के बाद पीजी करने के लिए फरवरी में दून मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया था। शुरुआत में एक महीने तक सब कुछ सामान्य था लेकिन मार्च से सीनियर ने अलग-अलग बातों को लेकर नीचा दिखाना शुरू कर दिया। कई बार ऐसी घटनाएं हुईं जिसमें एमबीबीएस छात्रों के सामने ही सीनियर ने दुर्व्यवहार कर दिया। उन्हें अपने जूनियर छात्रों के सामने जाने में शर्म आती है।

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सोचता हूं कि उन्हें कक्षाओं में कैसे पढ़ाने जाऊंगा। पीड़ित डॉक्टर का कहना है कि शुरुआत में जब पढ़ाई में कमजोर था तो सभी दोस्त थे। कम अंक आते थे तो किसी को दिक्कत नहीं थी। लेकिन एक महीने बाद जब पढ़ाई में अच्छा करना शुरू कर दिया तो सभी रंजिश करने लगे। पीड़ित के मुताबिक उनके साथ हुई घटनाओं के बारे में उन्होंने एनाटॉमी की विभागाध्यक्ष से शिकायत की। लेकिन उन्होंने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। शिकायत के बावजूद सीनियर उन्हें बार-बार नीचा दिखाते रहे। इससे उनकी मां भी मानसिक रूप से परेशान हो रही है। उन्होंने घटनाओं के संबंध में अपने परिवार को भी जानकारी दी है।

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इनसे क्या सीखेंगे एमबीबीएस के छात्र

मेडिकल कॉलेज में इस बार हुई रैगिंग की घटना इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि इसमें पीजी के सीनियर डॉक्टरों ने जूनियर के साथ रैगिंग की है। इन डॉक्टरों के ऊपर एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ाने और क्लीनिकल कार्यों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। आसान शब्दों में कहें तो ये कॉलेज में शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। अब जब शिक्षक ही रैगिंग की घटनाओं को अंजाम देंगे तो एमबीबीएस के छात्र इनसे क्या सीखेंगे। इससे व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है।

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यह घटनाएं आ चुकी हैं सामने

1- वर्ष 2019 में जूनियर छात्रों ने उसके साथ हो रही रैगिंग के संबंध में शिकायत की थी। उसका आरोप था कि सीनियर उसे बेवजह परेशान कर रहे हैं। इस मामले में कॉलेज ने छह छात्रों पर कार्रवाई की।

2- वर्ष 2021 में एक जूनियर छात्र ने प्राचार्य को ई-मेल भेजकर शिकायत की कि सीनियर छात्र उसे गर्दन झुकाकर चलने की बात कहते हैं।

3- वर्ष 2023 में सीनियर छात्रों ने एक जूनियर की पिटाई कर दी थी। इस मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ छात्रों पर कार्रवाई हुई थी।

4- जनवरी 2026 में सीनियर छात्रों ने मिलकर जूनियर को बेल्ट और चप्पलों से पीटा था। और जबरन बाल कटवाने का भी आरोप लगा था। इस मामले में कॉलेज ने कई छात्रों पर कार्रवाई की थी।

5- अप्रैल 2026 में सीनियर छात्रों पर जूनियर छात्र की दाढ़ी और बाल कटवाने का दबाव बनाने का आरोप लगा था। इस मामले में कॉलेज ने कई छात्रों पर कार्रवाई की।
 

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