फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand solar power tariff hike demand rejected over low sunshine in hills CUF reduction plea dismissed

उत्तराखंड: झटका, पहाड़ों में कम धूप का हवाला देकर सोलर टैरिफ बढ़ाने की मांग खारिज, नहीं बढ़ाए जाएंगे दाम

Wed, 30 Sep 2026 10:22 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 30 Sep 2026 10:22 AM IST
सार
Register For Event

पहाड़ी क्षेत्रों में धूप कम मिलने को आधार बनाकर सोलर बिजली की दरें बढ़ाने की मांग को नियामक आयोग से मंजूरी नहीं मिली। फैसले के बाद फिलहाल सोलर बिजली के मौजूदा बेंचमार्क टैरिफ में बढ़ोतरी का रास्ता बंद हो गया है।

विज्ञापन
Uttarakhand solar power tariff hike demand rejected over low sunshine in hills CUF reduction plea dismissed
सोलर पैनल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ों में कम धूप का हवाला देकर सोलर टैरिफ बढ़ाने की आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी की याचिका उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने खारिज कर दी। सोसाइटी ने सोलर प्लांट के क्षमता उपयोग कारक (सीयूएफ) को 19 से घटाकर 17 प्रतिशत करने, इस आधार पर सोलर बिजली के बेंचमार्क टैरिफ में बढ़ोतरी करने की मांग की थी।

विज्ञापन

आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी संस्था ने आयोग में याचिका दायर कर मांग की थी कि उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के आरई रेगुलेशंस 2023 के तहत तय 19 प्रतिशत सीयूएफ के मानक को घटाकर 17 प्रतिशत किया जाए। सोसाइटी का तर्क था कि उत्तराखंड का पहाड़ी इलाका जटिल और उबड़-खाबड़ है।

विज्ञापन


पहाड़ों और पहाड़ियों की ओट की वजह से सुबह और शाम की धूप प्लांट्स तक नहीं पहुंच पाती, जिससे बिजली उत्पादन का समय कम हो जाता है। पहाड़ी ढलानों पर सोलर पैनल्स का मुंह पूरी तरह दक्षिण दिशा में रखना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाता। राज्य में नए मोनो-क्रिस्टलाइन प्लांट्स का औसत सीयूएफ महज 15 से 17 प्रतिशत के आसपास ही रह पा रहा है। सोसाइटी का कहना था कि 19 प्रतिशत सीयूएफ मानकर सरकार कम दर (4.10 प्रति यूनिट) तय करती है। इससे विकासकर्ता अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं और प्रोजेक्ट्स घाटे में जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

यूपीसीएल और उरेडा ने किया कड़ा विरोध

याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड और उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) ने इस मांग का कड़ा विरोध किया था। यूपीसीएल ने तर्क दिया कि यदि सीयूएफ घटाया गया तो सोलर बिजली की दरें बढ़ जाएंगी। इसका सीधा वित्तीय भार बिजली वितरण कंपनी से होते हुए आम बिजली उपभोक्ताओं पर महंगे टैरिफ के रूप में पड़ेगा। उरेडा और यूपीसीएल का कहना था कि अब अत्याधुनिक मोनो-पर्क और बाइफेशियल पैनल्स आ रहे हैं, जिनकी क्षमता व दक्षता पहले से कहीं बेहतर है। राज्य के कई प्लांट्स विषम परिस्थितियों के बावजूद 19 प्रतिशत या उससे अधिक सीयूएफ दर्ज कर रहे हैं। यूपीसीएल ने कहा कि पांच साल के कंट्रोल पीरियड के बीच में ऐसे मानक बदलने से पूरे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की नियामक स्थिरता प्रभावित होगी।

ये भी पढ़ें...रुद्रप्रयाग:  केदारनाथ-बासुकीताल ट्रैक रूट पर गए पांच ट्रैकर्स का टूटा संपर्क, खराब मौसम, हेली से रोका रेस्क्यू

आयोग ने कहा, किसी के लिए राज्य में लागू नियम नहीं बदल सकते

आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों में छूट देने का अधिकार केवल किसी विशिष्ट मामले में व्यक्तिगत परेशानी को दूर करने के लिए होता है। इसका उपयोग पूरे राज्य पर लागू सामान्य नियमों को बदलने के लिए नहीं किया जा सकता। आयोग ने कहा कि सीयूएफ एक सामान्य तकनीकी मानक है। इसे बदलने के लिए आयोग को अपनी विधायी शक्तियों के तहत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव लेने होते हैं।



 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed