कैबिनेट का फैसला: दिल्ली में 10 साल की औद्योगिक नीति मंजूर, निवेश-रोजगार पर जोर; नई नियुक्तियों को प्रोत्साहन
इस नीति के तहत कंपनियों को नए निवेश, कारोबार के विस्तार, तकनीकी आधुनिकीकरण और नई नियुक्तियों के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।
विस्तार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए दस वर्षीय औद्योगिक नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। इस नीति के तहत कंपनियों को नए निवेश, कारोबार के विस्तार, तकनीकी आधुनिकीकरण और नई नियुक्तियों के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को स्वच्छ, आधुनिक और ज्ञान आधारित औद्योगिक केंद्र बनाना है।
नीति के तहत मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। कम प्रदूषण वाले उद्योगों, आधुनिक तकनीक और ज्ञान आधारित कारोबार को बढ़ावा देने के साथ मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
नई नियुक्तियों पर मिलेगा प्रोत्साहन
रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नई नियुक्तियों पर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र में प्रत्येक नई नियुक्ति पर 40 हजार से 50 हजार रुपये, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) में एक लाख से 1.2 लाख रुपये और स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति पर 50 हजार से 60 हजार रुपये तक सहायता मिलेगी। इन प्रोत्साहनों का लाभ निर्धारित पात्रता और शर्तों के अनुसार दिया जाएगा।
दस क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता
नीति में आईटी और डिजिटल सेवाएं, जीसीसी, डेटा सेंटर, अनुसंधान एवं विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकोनॉमी, प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, उद्योग आधारित कौशल विकास और एमएसएमई का तकनीकी आधुनिकीकरण शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश, किराये, तकनीक, प्रमाणन, अनुसंधान और ऊर्जा दक्षता के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
- जीसीसी में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इसकी अधिकतम सीमा सामान्य इकाइयों के लिए 50 करोड़ और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए 60 करोड़ रुपये है। डेटा सेंटर में पूंजीगत निवेश पर 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक, देने का प्रावधान है। कम पानी खर्च करने वाली कूलिंग प्रणालियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्वास्थ्य और विनिर्माण क्षेत्र को राहत
स्वास्थ्य सेवाओं में पूंजीगत निवेश पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। इसकी अधिकतम सीमा सामान्य इकाइयों के लिए 10 करोड़ और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए 12 करोड़ रुपये है। एक हजार या इससे अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में पांच करोड़ रुपये तक प्रोत्साहन मिलेगा। एमएसएमई के तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए सामान्य इकाइयों को पांच करोड़ और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को सात करोड़ रुपये तक सहायता दी जाएगी। ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा।
महिला उद्यमियों और युवाओं पर विशेष ध्यान
नीति में महिला नेतृत्व वाले कारोबारों के लिए कई क्षेत्रों में सामान्य इकाइयों की तुलना में अधिकतम सहायता सीमा बढ़ाई गई है। महिला कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले नियोक्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान है। कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं और युवाओं को रोजगार तथा उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
इन्वेस्ट दिल्ली से एक जगह मिलेगी सहायता
निवेशकों की सुविधा के लिए इन्वेस्ट दिल्ली को समर्पित एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा। यह निवेश के लिए उपयुक्त स्थान चुनने, जरूरी मंजूरियां प्राप्त करने, स्वीकृत प्रोत्साहन राशि जारी कराने और शिकायतों के समाधान में मदद करेगी। इस व्यवस्था को दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल के माध्यम से संचालित करने की योजना है। इससे निवेश संबंधी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
मेरी सरकार की नई औद्योगिक नीति का उद्देश्य दिल्ली को स्वच्छ, आधुनिक और ज्ञान आधारित औद्योगिक केंद्र बनाना है। हम नए निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ मौजूदा उद्योगों के आधुनिकीकरण और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास पर भी जोर देंगे। नीति का वास्तविक असर निवेश, स्थापित होने वाली इकाइयों और पैदा होने वाले रोजगार के आंकड़ों से तय होगा।
-रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री