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मंचन: दिल्ली में कुमाऊनी रामलीला 11 अक्तूबर से, नंदा देवी मंदिर में पूजन के साथ तैयारियां तेज; पंजीकरण प्रारंभ
Thu, 27 Aug 2026 03:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 27 Aug 2026 03:14 AM IST
सकी तैयारियां शुरू हो गई हैं और 15 अगस्त को मां नंदा देवी मंदिर में पूजन के साथ अभ्यास भी प्रारंभ हो चुका है।
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मयूर विहार फेस-3 स्थित कुर्मांचल जनकल्याण एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से 11 अक्तूबर से 21 अक्तूबर तक कुमाऊनी रामलीला का मंचन किया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं और 15 अगस्त को मां नंदा देवी मंदिर में पूजन के साथ अभ्यास भी प्रारंभ हो चुका है। समिति ने युवाओं और क्षेत्रवासियों से इस सांस्कृतिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।
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समिति के सूचना प्रसार सचिव तनोज बुधानी ने बताया कि यह रामलीला साल 2015 से लगातार आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग करने का आह्वान किया। बुधानी ने कहा कि रामलीला के माध्यम से सनातन संस्कृति, आदर्शों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। रामलीला के लिए पात्रों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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शुरुआती दस दिनों तक इच्छुक प्रतिभागियों की रुचि, संवाद शैली और अभिनय क्षमता के आधार पर पात्रों का चयन किया जाएगा। कहा कि प्रभु श्रीराम की लीला में पात्र निभाने के इच्छुक लोग प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से 9:30 बजे तक समिति भवन मयूर विहार फेस-3 के पॉकेट बी-7 में पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
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कुमाऊनी रामलीला की अनूठी शैली
कुमाऊनी शैली की रामलीला अपनी अनूठी गायन शैली, पारंपरिक संगीत और स्थानीय संस्कृति के कारण एक अलग पहचान रखती है। यहां रामलीला का मंचन केवल संवादों के माध्यम से नहीं, बल्कि गायन और संगीत के साथ किया जाता है। रामलीला के दौरान कलाकार अपने संवादों को अलग रागों और पारंपरिक धुनों में प्रस्तुत करते हैं। हारमोनियम और तबला सहित अन्य वाद्ययंत्रों की संगत प्रस्तुति को और आकर्षक बनाती है। कलाकारों की भावपूर्ण गायकी और अभिनय दर्शकों को कथा से जोड़ता है।