{"_id":"6aeac42d1a5167a5490ef894","slug":"pnb-scam-customers-question-bank-audits-as-cctv-shows-deepanshi-using-staff-computers-2026-11-04","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"PNB घोटाला: खाताधारकों ने बैंक की निगरानी और ऑडिट पर सवाल; सीसीटीवी में कंप्यूटर पर ये काम करती दिखी दीपांशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PNB घोटाला: खाताधारकों ने बैंक की निगरानी और ऑडिट पर सवाल; सीसीटीवी में कंप्यूटर पर ये काम करती दिखी दीपांशी
Wed, 04 Nov 2026 02:46 PM IST
Sharukh Khan
मोहम्मद बिलाल, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
मोहम्मद बिलाल, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 04 Nov 2026 02:46 PM IST
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में करोड़ों रुपये के घोटाले में खाताधारकों ने बैंक की निगरानी और ऑडिट पर सवाल उठाए हैं। बैंक की ओर से करीब एक महीने की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई। फुटेज में दीपांशी एक कंप्यूटर पर कुछ काम करती दिख रही है। वो कीबोर्ड का इस्तेमाल करती नजर आ रही है।
विज्ञापन
PNB Scam
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ऐच्छर गांव शाखा में खाताधारकों के खातों से करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में खाताधारकों के साथ किसान संगठनों ने बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
खाताधारकों का कहना है कि करीब तीन साल तक कथित तौर पर चलती रही इस हेराफेरी की भनक बैंक के अधिकारियों, ऑडिट और रिकंसिलिएशन (लेनदेन के मिलान) व्यवस्था को क्यों नहीं लगी। आखिर इतनी बड़ी रकम का लेनदेन लंबे समय तक कैसे होता रहा।
विज्ञापन
खाताधारकों का कहना है कि करीब तीन साल तक कथित तौर पर चलती रही इस हेराफेरी की भनक बैंक के अधिकारियों, ऑडिट और रिकंसिलिएशन (लेनदेन के मिलान) व्यवस्था को क्यों नहीं लगी। आखिर इतनी बड़ी रकम का लेनदेन लंबे समय तक कैसे होता रहा।
विज्ञापन
Trending Videos
सीसीटीवी फुटेज से सामने आई कार्यप्रणाली
बैंक की ओर से करीब एक महीने की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई। फुटेज में कार्यालय सहायक दीपांशी शर्मा किसी कर्मचारी के कार्यस्थल से हटते ही उसके वर्कस्टेशन पर जाती दिखाई दी है। वह खाली डेस्क पर बैठकर कंप्यूटर स्क्रीन देखती और कीबोर्ड का इस्तेमाल करती नजर आई हैं।
बैंक की ओर से करीब एक महीने की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई। फुटेज में कार्यालय सहायक दीपांशी शर्मा किसी कर्मचारी के कार्यस्थल से हटते ही उसके वर्कस्टेशन पर जाती दिखाई दी है। वह खाली डेस्क पर बैठकर कंप्यूटर स्क्रीन देखती और कीबोर्ड का इस्तेमाल करती नजर आई हैं।
विज्ञापन
कुछ सेकंड बाद वह वहां से चली जाती थी। बैंक ने भी इस गतिविधि को अधिकारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए सीबीआई को जानकारी दी है। खाताधारकों का कहना है कि दीपांशी अकेले इस पूरे काम को अंजाम नहीं दे सकती है। इसलिए अन्य बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
वहीं मामले की जांच कर रही पुलिस के मुताबिक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड में किसी अधिकारी की सीबीएस (कोर बैंकिंग सिस्टम) यूजर आईडी दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि लेनदेन उसी अधिकारी ने किया था। इसलिए लॉगिन हिस्ट्री, यूजर एक्टिविटी लॉग और कोर बैंकिंग रिकॉर्ड के जरिये पता लगाया जा रहा है।
मोबाइल नंबर और ईमेल बदलने की भी जांच
जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि एक कार्यालय सहायक को कई अधिकारियों के क्रेडेंशियल तक पहुंच कैसे मिली। इस दौरान सुपरवाइजरी जांच को दरकिनार किया गया। गायब वाउचर और असामान्य ट्रांसफर पर समय रहते किसी अधिकारी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई थी। इसके अलावा खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पते बदलने या मोबाइल अलर्ट बंद किए जाने की प्रक्रिया की भी जांच हो रही है।
जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि एक कार्यालय सहायक को कई अधिकारियों के क्रेडेंशियल तक पहुंच कैसे मिली। इस दौरान सुपरवाइजरी जांच को दरकिनार किया गया। गायब वाउचर और असामान्य ट्रांसफर पर समय रहते किसी अधिकारी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई थी। इसके अलावा खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पते बदलने या मोबाइल अलर्ट बंद किए जाने की प्रक्रिया की भी जांच हो रही है।
इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसी
करीब तीन साल तक चली कथित हेराफेरी बैंक की निगरानी, ऑडिट और रिकंसिलिएशन व्यवस्था की पकड़ में क्यों नहीं आई। कई अधिकारियों की सीबीएस यूजर आईडी एक सब स्टाफ तक कैसे पहुंचीं। क्या इसमें किसी अधिकारी की जानकारी या लापरवाही थी।
करीब तीन साल तक चली कथित हेराफेरी बैंक की निगरानी, ऑडिट और रिकंसिलिएशन व्यवस्था की पकड़ में क्यों नहीं आई। कई अधिकारियों की सीबीएस यूजर आईडी एक सब स्टाफ तक कैसे पहुंचीं। क्या इसमें किसी अधिकारी की जानकारी या लापरवाही थी।
ग्राहकों के मोबाइल अलर्ट बंद करने या पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल बदलने की प्रक्रिया किसने पूरी की। जबकि इसके लिए केवाईसी की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। एफडी में संयुक्त खाताधारक जोड़ने और भुगतान के लिए खाता बदलने की अनुमति कैसे मिली। लाभार्थी खातों में पहुंची रकम आगे कहां गई।
अन्य बैंककर्मियों को नामजद करने की मांग
ठगी का शिकार हुए खाताधारकों का कहना है कि इस मामले में दीपांशी को छोड़कर बैंक के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर नहीं की गई है। जबकि उनके मुताबिक शाखा में तैनात रहे अन्य बैंककर्मियों को भी कथित हेराफेरी की जानकारी थी। खाताधारकों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर हुई गड़बड़ी किसी एक कर्मचारी के स्तर पर संभव नहीं है। क्योंकि केवाईसी से लेकर अन्य जरूरी काम ब्रांच मैनेजर और उसके निचले स्तर के अधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही होते हैं।
ठगी का शिकार हुए खाताधारकों का कहना है कि इस मामले में दीपांशी को छोड़कर बैंक के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर नहीं की गई है। जबकि उनके मुताबिक शाखा में तैनात रहे अन्य बैंककर्मियों को भी कथित हेराफेरी की जानकारी थी। खाताधारकों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर हुई गड़बड़ी किसी एक कर्मचारी के स्तर पर संभव नहीं है। क्योंकि केवाईसी से लेकर अन्य जरूरी काम ब्रांच मैनेजर और उसके निचले स्तर के अधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही होते हैं।
पीएनबी हेराफेरी में पहली बार गिरफ्तारी, महिला कर्मचारी दीपांशी समेत दो पकड़े
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक की महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसका निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक की महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसका निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक शामिल हैं।
जांच एजेंसी की तीन नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आशुतोष को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया। उसे पुणे की विशेष अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल किया गया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ कर हेराफेरी से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
सीबीआई के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से अनधिकृत रूप से 10.24 करोड़ रुपये निकाले गए थे। हालांकि, शुरुआती शिकायतों में हेराफेरी का दायरा 35 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया था। खाताधारकों का आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही।
आरोप है कि बैंक में कार्यालय सहायक के पद पर तैनात दीपांशी ने निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत की। इसके बाद खातों से रकम निकालकर दूसरी जगह स्थानांतरित की गई। बैंक खातों से बिना अधिकृत अनुमति के डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 29 अक्तूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच
सीबीआई अब हेराफेरी से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि खातों से निकाली गई रकम किन खातों में भेजी गई। इस पूरी प्रक्रिया में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
सीबीआई अब हेराफेरी से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि खातों से निकाली गई रकम किन खातों में भेजी गई। इस पूरी प्रक्रिया में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
बैंक के आंतरिक लेनदेन, अनधिकृत डेबिट और रकम के हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की भी जांच होगी। फिलहाल सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ खाताधारकों को मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी और अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद है।