बदलाव की तैयारी: 15 नहीं, तीन दिन में मिल सकता है विधानसभा सत्र का नोटिस, विधायी प्रक्रिया में एकरूपता पर मंथन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से गठित समिति की मंगलवार को दिल्ली विधानसभा की मेजबानी में दूसरी बैठक में इन मुद्दों सहित विधायी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
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देशभर की विधानसभाओं में कामकाज के नियमों में बदलाव की तैयारी है। विधानसभा सत्र बुलाने का नोटिस देने की अवधि 15 दिन से घटाकर तीन दिन करने, प्रश्न भेजने के लिए इंतजार की अवधि 15 दिन तय करने और आधुनिक तकनीक से विधायकों की सदन में मौजूदगी का पता लगाने जैसे प्रस्तावों पर विचार हो रहा है। साथ ही महिला और पुरुष, दोनों के लिए समानता पर आधारित संबोधन अपनाने का
सुझाव है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से गठित समिति की मंगलवार को दिल्ली विधानसभा की मेजबानी में दूसरी बैठक में इन मुद्दों सहित विधायी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। पांच सितारा होटल में हुई बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने की।
महाना ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं के नियमों में एकरूपता लाने के साथ बदलती तकनीक और प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से प्रक्रियाओं की समीक्षा जरूरी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के नियम 1958 के हैं। वर्ष 2022 में उनकी समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई प्रक्रियाओं में बदलाव की जरूरत है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से भी महत्वपूर्ण सुझाव मिले। अब समिति एक और बैठक के बाद अंतिम सिफारिशें लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।
कौन-कौन से बदलाव संभव
- सत्र का नोटिस : अभी 15 दिन पहले सूचना देने की व्यवस्था की जगह तीन दिन पहले सूचना देने का सुझाव है।
- सवाल पूछने की प्रक्रिया : सत्रावसान के बाद प्रश्न प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन की अवधि तय करने का प्रस्ताव है।
- जवाब में देरी : जिनमें प्रश्नों का जवाब देने के लिए 90 दिन मिलते हैं, उनकी समय-सीमा की समीक्षा हो सकती है।
- एआई और डिजिटल तकनीक : विधायकों की सदन में मौजूदगी का पता लगाने के लिए एआई के इस्तेमाल पर विचार हो सकता है।
- समानता आधारित भाषा : ‘ही’-‘शी’ जैसे संबोधनों की जगह विधायक श्री, विधायक श्रीमती के संबोधन का सुझाव।
ये होगी बदलाव की प्रक्रिया
समिति विभिन्न विधानसभाओं के सुझावों और बेहतर संसदीय परंपराओं का अध्ययन करेगी। दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश से मिले सुझावों के बाद अब एक और बैठक होगी। इसके बाद समिति अपनी अंतिम सिफारिशें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपेगी। मॉडल नियमों का उद्देश्य विधायी प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना है।
लोकतंत्र में पक्ष-विपक्ष दोनों अहम: महाना
महाना ने कहा कि पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। नियमों में सुधार करते समय दोनों की जवाबदेही मजबूत करना जरूरी है। बैठक में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, महाराष्ट्र के राहुल नार्वेकर, कर्नाटक के जीएस पाटिल और हिमाचल प्रदेश के कुलदीप सिंह आदि मौजूद रहे।