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पुलिस अफसरों से नोकझोंक: संसद से थाने तक छात्रों के मुद्दे को हथियार बना रहे राहुल ; DCP ने दिया था अधिकार
Sat, 22 Aug 2026 03:18 PM IST
Sharukh Khan
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 22 Aug 2026 03:18 PM IST
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई के प्रदर्शन में पैलेट गन से घायल हुए साहिल लोचव की एफआईआर करीब एक माह बाद दर्ज हुई। ठीक होने के बाद साहिल कई बार कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाने गए, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं की गई। शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इसके बाद साहिल की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
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थाना बना धरना स्थल, हुई जीत...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल का मामला दिल्ली पुलिस के लिए गले की फांस बन सकता है। केस की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस के दो डीसीपी रडार पर रहेंगे। इन्होंने ही आरएएफ को पैलेट गन एवं दूसरे फायर आर्म्स चलाने का अधिकार दिया था।
जानकारों का कहना है कि जांच के लिहाज से यह एक जटिल केस बन सकता है, क्योंकि इसमें दिल्ली पुलिस के अलावा सीआरपीएफ की विशेष इकाई, रेपिड एक्शन फोर्स भी शामिल है। जांच के दौरान यह भी ध्यान में रखना होगा कि दिल्ली पुलिस जिस केंद्रीय बल को कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बुलाती है, वह उसकी तैनाती और कार्रवाई के लिए भी जिम्मेदार होती है।
दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ व आरएएफ सहित दूसरे केंद्रीय बलों की कंपनियां जंतर मंतर और दूसरे इलाकों में तैनात की जाएं।
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जानकारों का कहना है कि जांच के लिहाज से यह एक जटिल केस बन सकता है, क्योंकि इसमें दिल्ली पुलिस के अलावा सीआरपीएफ की विशेष इकाई, रेपिड एक्शन फोर्स भी शामिल है। जांच के दौरान यह भी ध्यान में रखना होगा कि दिल्ली पुलिस जिस केंद्रीय बल को कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बुलाती है, वह उसकी तैनाती और कार्रवाई के लिए भी जिम्मेदार होती है।
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दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय से आग्रह किया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ व आरएएफ सहित दूसरे केंद्रीय बलों की कंपनियां जंतर मंतर और दूसरे इलाकों में तैनात की जाएं।
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डीसीपी ने दिया था इस्तेमाल का अधिकार
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर नई दिल्ली जिला डीसीपी सचिन शर्मा ने बतौर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सीआरपीएफ/आरएएफ के सहायक कमांडेंट दिलावर सिंह को लिखित में यह अधिकार दिया था कि वे गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित हुई भीड़ को तितर बितर करने के लिए गैस, लाठीचार्ज व फायर आर्म्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। आरएएफ ने इसी अधिकार का पालन किया। प्रदर्शन के दौरान नाजुक स्थिति को संभालने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था।
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर नई दिल्ली जिला डीसीपी सचिन शर्मा ने बतौर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सीआरपीएफ/आरएएफ के सहायक कमांडेंट दिलावर सिंह को लिखित में यह अधिकार दिया था कि वे गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित हुई भीड़ को तितर बितर करने के लिए गैस, लाठीचार्ज व फायर आर्म्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। आरएएफ ने इसी अधिकार का पालन किया। प्रदर्शन के दौरान नाजुक स्थिति को संभालने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था।
जोन-1 में नॉर्थ डीसीपी ने दिया था आदेश
20 जुलाई के प्रदर्शन में उग्र हुई भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर पैलेट गन चलाई गई थी। आरएएफ ने उनके आदेश के बाद पैलेट गन के कई शेल दागे। पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड, दंगारोधी गन (2 बीसी) और प्लास्टिक पैलेट का भी इस्तेमाल किया गया।
20 जुलाई के प्रदर्शन में उग्र हुई भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर पैलेट गन चलाई गई थी। आरएएफ ने उनके आदेश के बाद पैलेट गन के कई शेल दागे। पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड, दंगारोधी गन (2 बीसी) और प्लास्टिक पैलेट का भी इस्तेमाल किया गया।
सीआरपीएफ डीजी ने थपथपाई आरएएफ जवानों की पीठ
सियासी संग्राम के बीच सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह, बाकायदा आरएएफ की वर्दी पहनकर जवानों से मिले थे। उन्होंने जवानों को भरोसा दिया था कि वे अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करें, बाकी मैं संभाल लूंगा। इसके बाद आरएएफ के उन जवानों ने राहत की सांस ली, जो पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद विभागीय कार्रवाई से डर रहे थे।
सियासी संग्राम के बीच सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह, बाकायदा आरएएफ की वर्दी पहनकर जवानों से मिले थे। उन्होंने जवानों को भरोसा दिया था कि वे अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करें, बाकी मैं संभाल लूंगा। इसके बाद आरएएफ के उन जवानों ने राहत की सांस ली, जो पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद विभागीय कार्रवाई से डर रहे थे।
पुलिस अफसरों से राहुल की हुई नोकझोंक
संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए साहिल की एफआईआर को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पुलिस अफसरों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राहुल पुलिस अधिकारियों से घायल युवक की शिकायत पर अलग एफआईआर दर्ज करने की मांग करते नजर आ रहे हैं।
संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए साहिल की एफआईआर को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पुलिस अफसरों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राहुल पुलिस अधिकारियों से घायल युवक की शिकायत पर अलग एफआईआर दर्ज करने की मांग करते नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में राहुल गांधी पुलिस अफसरों से कह रहे हैं, 20 दिन, 30 दिन, 50 दिन, 6 महीना, यहीं बैठना... जो भी समय लगेगा। सर, इट्स लीगल ! ही इज रिक्वेस्टिंग एन एफआईआर।
इस पर पुलिस अफसर ने कहा, सर, ऑलरेडी... लेकिन राहुल गांधी ने बीच में टोकते हुए कहा, "नो! नो! नो! नो! प्लीज, ही इज रिक्वेस्टिंग एन इंडिविजुअल एफआईआर फॉर दिस बुलेट... फॉर दिस बुलेट इंजरी।
पुलिस अफसर की अस्पष्ट आवाज के बाद राहुल गांधी ने कहा, "ओके, भैया। वेरी सिंपल, यू आर नॉट डूइंग इट। सर... ओके। इसके बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1)/125 के तहत एफआईआर संख्या 0085 दर्ज की गई।