{"_id":"6ac8709e054ac8c47f0915bb","slug":"anne-carson-left-university-twice-but-completed-her-phd-how-a-high-school-lunch-break-changed-her-life-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐन कार्सन: दो बार यूनिवर्सिटी छोड़ी, लेकिन पूरी की डॉक्टरेट की पढ़ाई, हाईस्कूल की कौन सी घटना ने बदली जिंदगी?","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
ऐन कार्सन: दो बार यूनिवर्सिटी छोड़ी, लेकिन पूरी की डॉक्टरेट की पढ़ाई, हाईस्कूल की कौन सी घटना ने बदली जिंदगी?
Fri, 09 Oct 2026 10:12 AM IST
शिवम तिवारी
एजेंसी, स्टॉकहोम/ टोरंटो
एजेंसी, स्टॉकहोम/ टोरंटो
Published by: शिवम तिवारी
Updated Fri, 09 Oct 2026 10:12 AM IST
Anne Carson: कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को 2026 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हाईस्कूल में लंच ब्रेक के दौरान प्राचीन यूनानी साहित्य से जुड़ने वाली कार्सन ने दो बार विश्वविद्यालय छोड़ा, लेकिन बाद में डॉक्टरेट पूरी की। उनकी रचनाएं प्रेम, अकेलेपन और यूनानी मिथकों को आधुनिक नजरिये से पेश करती हैं।
विज्ञापन
Anne Carson
- फोटो : AI Generated
विस्तार
कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ किसी बड़ी घटना से नहीं, बल्कि स्कूल के एक छोटे से लंच ब्रेक से आता है। कनाडा की कवयित्री, निबंधकार और अनुवादक ऐन कार्सन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हाईस्कूल में एक शिक्षक ने उन्हें दोपहर के खाने के समय प्राचीन यूनानी साहित्य पढ़ाना शुरू किया। इसी अनुभव ने उनकी रुचि को नई दिशा दी। आगे चलकर उन्होंने दो बार विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ी, फिर वापसी करके डॉक्टरेट पूरी की और क्लासिकल साहित्य की विशेषज्ञ बनीं। उनकी रचनाओं में हजारों साल पुराने मिथक आज के इंसान के प्रेम, अकेलेपन, ईर्ष्या और जीवन की अनिश्चितताओं से जुड़ते हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा की यही खासियत उन्हें अलग पहचान देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐन कार्सन को साहित्य का नोबेल क्यों मिला?
स्वीडिश एकेडमी ने 2026 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए 76 वर्षीय ऐन कार्सन के नाम की घोषणा की। उन्हें उनकी साहसिक और मौलिक रचनात्मकता के लिए सम्मानित किया गया। उनकी खासियत यह है कि वे प्राचीन यूनानी साहित्य और मिथकों को आज की जिंदगी से जोड़कर पेश करती हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, वासना, ईर्ष्या, अकेलापन और मृत्यु जैसे विषय प्रमुखता से आते हैं। वे पुराने साहित्य को केवल इतिहास की तरह नहीं देखतीं, बल्कि उसके जरिए आधुनिक इंसान की भावनाओं को समझने की कोशिश करती हैं। पुरस्कार के रूप में उन्हें 1.20 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी लगभग 11.4 करोड़ रुपये मिलेंगे।
विज्ञापन
हाईस्कूल के लंच ब्रेक ने जिंदगी कैसे बदली?
ऐन कार्सन का जन्म 21 जून 1950 को कनाडा के टोरंटो में हुआ था। उनके पिता बैंकर थे, जबकि उनकी मां गृहिणी थीं। स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक लैटिन शिक्षक ने लंच ब्रेक के समय उन्हें प्राचीन यूनानी साहित्य से परिचित कराया। यही अनुभव उनके जीवन का अहम मोड़ बना। यूनानी साहित्य, उसकी भाषा और उसमें छिपी मानवीय भावनाओं के प्रति उनकी रुचि बढ़ने लगी। आगे चलकर उन्होंने क्लासिकल साहित्य को अपने अध्ययन और लेखन का प्रमुख विषय बनाया। उनकी कहानी बताती है कि किसी शिक्षक का छोटा-सा प्रयास भी विद्यार्थी की रुचि और भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
विज्ञापन
कमेंट
कमेंट X