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अशफाक उल्ला खां: जब सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को ही लूट लिया गया, क्या था काकोरी ट्रेन एक्शन? पढ़ें इतिहास

Thu, 22 Oct 2026 06:00 AM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 22 Oct 2026 06:00 AM IST
सार
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अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्तूबर 1900 को हुआ था। काकोरी कांड का नाम आते ही उनका नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। काकोरी कांड क्या था? सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को क्रांतिकारियों ने क्यों रोका? अशफाक उल्ला खां की जयंती पर जानिए 1925 के एतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की पूरी कहानी...
 

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Ashfaqulla Khan Jayanti: Kakori Train Action 1925 History, Bismil Connection and Freedom Struggle
अशफाक उल्ला खां जयंती - फोटो : AI Generated

विस्तार

भारत की स्वतंत्रता का इतिहास केवल आंदोलनों, सत्याग्रहों और राजनीतिक संघर्षों की कहानी नहीं है, बल्कि उन क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान की गाथा भी है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ऐसे ही महान क्रांतिकारियों में एक नाम अशफाक उल्ला खां का है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अशफाक उल्ला खां का नाम आते ही  काकोरी ट्रेन एक्शन की याद आती है। 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के काकोरी रेलवे स्टेशन के पास क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को रोककर उसमें रखी नकदी अपने कब्जे में ले ली थी।

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यह घटना ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन की एक एतिहासिक घटना बन गई। लेकिन आखिर काकोरी कांड की योजना क्यों बनाई गई थी? इसमें अशफाक उल्ला खां की क्या भूमिका थी? और इस घटना के बाद अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? आइए जानते हैं इस एतिहासिक घटना की कहानी...

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अशफाक उल्ला खां जयंती कब मनाई जाती है?

अशफाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्तूबर 1900 को हुआ था। इसलिए उनकी जयंती प्रतिवर्ष 22 अक्तूबर को मनाई जाती है। उनकी जयंती केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विचारों, साहस और राष्ट्रीय एकता के संदेश को समझने का भी अवसर है।

अशफाक उल्ला खां ने अपने जीवन से यह दिखाया कि स्वतंत्रता का लक्ष्य किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं था। देश की आजादी के लिए अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग एकजुट होकर संघर्ष कर सकते हैं। उनका बलिदान आज भी भारतीय इतिहास में साहस, निष्ठा और देशप्रेम के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

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क्या था  काकोरी ट्रेन एक्शन?

 काकोरी ट्रेन एक्शन, जिसे इतिहास में काकोरी ट्रेन कार्रवाई के नाम से भी जाना जाता है, 9 अगस्त 1925 को हुई एक क्रांतिकारी घटना थी। उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था और देश के अलग-अलग हिस्सों में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन तेज हो रहा था।

क्रांतिकारियों का मानना था कि ब्रिटिश शासन को चुनौती देने के लिए केवल राजनीतिक विरोध पर्याप्त नहीं था। उन्हें अपने संगठन को मजबूत करने, हथियारों की व्यवस्था करने और स्वतंत्रता संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता थी।

इसी उद्देश्य से हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाने की नकदी ले जा रही ट्रेन को निशाना बनाने की योजना बनाई।

9 अगस्त 1925 को सहारनपुर से लखनऊ जा रही ट्रेन को काकोरी के निकट रोक दिया गया। क्रांतिकारियों ने ट्रेन में रखे सरकारी खजाने को अपने कब्जे में ले लिया। यह धन ब्रिटिश सरकार का था, जिसे रेलवे के माध्यम से ले जाया जा रहा था।

इस घटना ने ब्रिटिश प्रशासन को हिला दिया। अंग्रेजी सरकार ने इसे अपनी सत्ता और प्रतिष्ठा के लिए बड़ी चुनौती माना तथा क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया।

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क्यों बनाई गई थी  काकोरी ट्रेन एक्शन की योजना?

1920 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कई तरह की विचारधाराएं सक्रिय थीं। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन ने व्यापक जनभागीदारी पैदा की थी, जबकि कुछ युवा क्रांतिकारी सशस्त्र प्रतिरोध के माध्यम से ब्रिटिश शासन को समाप्त करना चाहते थे। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना 1924 में हुई थी। इसके प्रमुख उद्देश्यों में ब्रिटिश शासन का अंत करना और भारत में एक स्वतंत्र गणराज्य की स्थापना करना शामिल था।

संगठन को अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए धन की जरूरत थी। क्रांतिकारियों ने निजी संपत्ति लूटने के बजाय सरकारी खजाने को निशाना बनाने का निर्णय लिया। उनके लिए यह कार्रवाई ब्रिटिश शासन के संसाधनों को चुनौती देने और अपने संगठन को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम थी।

इस योजना में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद और अन्य क्रांतिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। हालांकि, सभी क्रांतिकारी एक ही तरह से इस कार्रवाई में शामिल नहीं थे।

अशफाक उल्ला खां और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती

अशफाक उल्ला खां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 22 अक्तूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। वे बचपन से ही देश की राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित थे और आगे चलकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए।

उनकी मित्रता राम प्रसाद बिस्मिल से थी। दोनों की विचारधाराओं और देशभक्ति ने उन्हें एक साझा उद्देश्य से जोड़ा- भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना। काकोरी ट्रेन कार्रवाई में अशफाक उल्ला खां ने क्रांतिकारी दल के सदस्य के रूप में भाग लिया। घटना के बाद अंग्रेजी सरकार ने इस मामले में शामिल लोगों की तलाश शुरू कर दी। कई क्रांतिकारी गिरफ्तार कर लिए गए, जबकि चंद्रशेखर आजाद गिरफ्तारी से बचने में सफल रहे।

अशफाक उल्ला खां कुछ समय तक पुलिस से बचते रहे। बाद में उन्हें दिल्ली में दिसंबर 1926 में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर काकोरी षड्यंत्र मामले में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया। 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में अशफाक उल्ला खां को फांसी दे दी गई। उस समय उनकी आयु केवल 27 वर्ष थी।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि स्वतंत्रता आंदोलन में धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर देश के लिए संघर्ष करने वाले लोग एक साथ खड़े थे।

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