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फ्रांस: एक महीने के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला, यूनिवर्सिटी एडमिशन को लेकर क्या बदलेगा? समझें पूरा गणित
Tue, 27 Oct 2026 10:22 AM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Tue, 27 Oct 2026 10:22 AM IST
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते जीवन खर्च के खिलाफ छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया बदलने का फैसला किया है। सरकार 2027 में मौजूदा ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली में बड़े बदलाव करेगी और 2028 में इसकी जगह नया मंच लाएगी। छात्र दाखिले के नियमों में पारदर्शिता, बेहतर पढ़ाई और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
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France
- फोटो : AI Generated
विस्तार
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते जीवन खर्च को लेकर कई हफ्तों से चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया बदलने का फैसला किया है। सरकार ने घोषणा की है कि देश में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन मंच को 2028 में बदल दिया जाएगा। इससे पहले, 2027 में मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों के जरिए छात्रों की नाराजगी कम करने और दाखिले की प्रक्रिया में सुधार करने की कोशिश की जाएगी।
फ्रांस में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के दूसरे पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए पारकूरसुप नाम के ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल किया जाता है। इसी व्यवस्था के जरिए छात्र अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दाखिले के लिए छात्रों का चयन किन नियमों के आधार पर किया जाता है, यह हमेशा साफ नहीं होता। इसके अलावा, छात्रों को अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिला पाने के समान अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यही व्यवस्था आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा बनी।
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फ्रांस में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के दूसरे पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए पारकूरसुप नाम के ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल किया जाता है। इसी व्यवस्था के जरिए छात्र अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दाखिले के लिए छात्रों का चयन किन नियमों के आधार पर किया जाता है, यह हमेशा साफ नहीं होता। इसके अलावा, छात्रों को अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिला पाने के समान अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यही व्यवस्था आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा बनी।
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आंदोलन के बाद सरकार पर क्यों बढ़ा दबाव?
फ्रांस में 17 अक्टूबर को शिक्षा के लिए सरकारी धन और बढ़ते जीवन खर्च के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। देश के कई हिस्सों में आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं हुईं। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया, जिनमें मार्सेई का नगर भवन भी शामिल था। दुकानों में लूटपाट और आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद शनिवार को देशभर में एक और प्रदर्शन हुआ, जिसमें हिंसा अपेक्षाकृत कम रही। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या चार लाख से अधिक बताई, जबकि आयोजकों का दावा था कि इसमें करीब आठ लाख लोग शामिल हुए।
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