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'गलतफहमी और अशांति से बचने की कोशिश': पुणे की लाइब्रेरी से क्यों हटाई गई उमर खालिद की किताब? जानें पूरा विवाद
Tue, 27 Oct 2026 08:47 AM IST
शिवम तिवारी
पीटीआई, पुणे
पीटीआई, पुणे
Published by: शिवम तिवारी
Updated Tue, 27 Oct 2026 08:47 AM IST
पुणे के आईआईएसईआर की लाइब्रेरी से उमर खालिद की किताब ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज’ हटा दी गई है। सोशल मीडिया पर इसे लाइब्रेरी में शामिल करने पर सवाल उठाए गए थे। बताया जा रहा है कि संस्थान ने गलतफहमी और अशांति से बचने के लिए यह कदम उठाया। जानें किताब का नाम, लेखक का परिचय, इसमें आदिवासी इतिहास से जुड़ी क्या जानकारी है और इस पूरे मामले में संस्थान ने क्या सफाई दी है।
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Umar Khalid
- फोटो : AI Generated
विस्तार
पुणे के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान यानी आईआईएसईआर की लाइब्रेरी से उमर खालिद की किताब हटाने का मामला चर्चा में है। यह किताब हाल ही में लाइब्रेरी में शामिल की गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर इस पर सवाल उठने के बाद संस्थान ने इसे हटाने का फैसला लिया। संस्थान का कहना है कि ऐसा किसी गलतफहमी या अशांति से बचने के लिए किया गया। इस फैसले के बाद किताब के विषय, लेखक और शैक्षणिक संस्थानों में पुस्तकों के चयन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
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कौन सी किताब हटाई गई?
आईआईएसईआर पुणे की लाइब्रेरी से उमर खालिद की किताब ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर’ हटाई गई है। इसका हिंदी अर्थ है ‘बंटे हुए समुदाय: आदिवासी इतिहास और सत्ता की राजनीति’। यह किताब उमर खालिद के पीएचडी शोध पर आधारित है। इसे वर्ष 2026 में प्रकाशित किया गया था। इसमें झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के इतिहास और सत्ता के साथ उनके संबंधों का अध्ययन किया गया है। किताब में खास तौर पर हो समुदाय के इतिहास और ब्रिटिश शासन के दौरान उसके अनुभवों पर ध्यान दिया गया है।
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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस मामले की शुरुआत सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट से हुई। इसमें आईआईएसईआर पुणे की लाइब्रेरी में उमर खालिद की किताब को नई पुस्तकों की सूची में शामिल किए जाने पर सवाल उठाया गया था। पोस्ट में इस बात पर आपत्ति जताई गई कि विज्ञान और शोध से जुड़े केंद्र सरकार के संस्थान की लाइब्रेरी में उमर खालिद की किताब क्यों रखी गई। इसके बाद किताब की तस्वीर सोशल मीडिया पर फैलने लगी और मामला चर्चा में आ गया। अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद संस्थान ने किताब को लाइब्रेरी से हटाने का फैसला लिया।
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