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गोरखपुर: चाइनीज मांझे के जख्म जिंदगी भर नहीं भूल पाए पीड़ित, किसी का गला कटा तो किसी का चेहरा हुआ छलनी

Mon, 12 Oct 2026 02:52 PM IST
अनुराग रंजन संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: अनुराग रंजन Updated Mon, 12 Oct 2026 02:52 PM IST
सार
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राम प्रताप ने बताया कि हादसे के बाद 15 दिनों तक जिंदगी मुश्किलों से घिरी रही। डॉक्टरों ने ज्यादा बोलने और चबाकर खाना खाने से मना कर दिया था। हर दिन की सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी होती थी।

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ictims Struggle to Forget Chinese Kite String Injurie
चाइनीज मांझे पर सख्ती से रोक लगाने की मांग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चाइनीज मांझा पतंग उड़ाने का सामान नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसकी धार किसी की आवाज छीन रही है तो किसी के चेहरे पर गहरे जख्म दे रही है। हादसों के शिकार लोग आज भी उस खौफनाक मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। किसी के लिए चंद पल का हादसा जिंदगी भर का दर्द बन गया तो किसी को सामान्य जिंदगी में लौटने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। पीड़ितों ने चाइनीज मांझे के निर्माण और बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।
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गले से बह रहा था खून, लगा अब नहीं बचेगी जिंदगी
पादरी बाजार स्थित वैष्णो विहार कॉलोनी निवासी आशीष सिंह वर्ष 2023 में चाइनीज मांझे से हुए हादसे को याद कर आज भी सिहर उठते हैं। वह बताते हैं कि मांझे से गला कटने के बाद तेजी से खून बह रहा था। उन्हें लगा कि अब जिंदगी नहीं बचेगी। किसी तरह जान बची, लेकिन डॉक्टरों ने एक महीने तक बोलने से मना कर दिया था। हादसे की याद आज भी उन्हें झकझोर देती है। आज भी गले पर दाग बना हुआ है।
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मांझे ने काट दिया चेहरा, 15 दिन तक खाना नहीं खा सके
बड़हलगंज के कल्यानपुर निवासी आलोक कुमार दूबे बीते छह फरवरी को बाइक से दोहरीघाट से लौट रहे थे। सरयू पुल पार कर मुक्तिपथ द्वार के पास पहुंचे ही थे कि सड़क पर फैला मांझा उनके चेहरे में फंस गया। संतुलन बिगड़ने से वह गिर पड़े। मांझे से चेहरे पर चार से पांच इंच लंबा घाव हो गया। गले से चेहरे तक दस टांके लगाने पड़े। दर्द के कारण 15 दिन तक कुछ चबाकर नहीं खा सके और पेय पदार्थों के सहारे रहे। करीब एक महीने के इलाज के बाद स्थिति सामान्य हुई। लेकिन चेहरे पर दाग आज भी है।आलोक कहते हैं कि चाइनीज मांझा किसी की भी जान ले सकता है। इसे रोकने के लिए प्रशासन को सख्ती करनी चाहिए और लोगों को भी जागरूक होना होगा।
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सब्जी लेने निकले थे, चाइनीज मांझे ने काट दिया था गला
घर के लिए सब्जी लेने निकले राम प्रताप निषाद ने कभी नहीं सोचा था कि रास्ते में एक पतंग का मांझा उनकी जिंदगी को दर्द से भर देगा। जुलाई में शहर के बनारस रोड के पास अचानक चाइनीज मांझा उनके गले में फंस गया। धार इतनी तेज थी कि गला कट गया और खून बहने लगा। डॉक्टरों ने उपचार के दौरान गले में सात टांके लगाए। राम प्रताप ने बताया कि हादसे के बाद 15 दिनों तक जिंदगी मुश्किलों से घिरी रही। डॉक्टरों ने ज्यादा बोलने और चबाकर खाना खाने से मना कर दिया था। हर दिन की सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी होती थी। गले की चोट ने खाने-पीने से लेकर बातचीत तक मुश्किल कर दी थी।


उन्होंने बताया कि अब स्थिति कुछ सामान्य हुई है, लेकिन उस हादसे को याद कर आज भी मन सिहर उठता है। चाइनीज मांझे की एक धार ने उन्हें ऐसा दर्द दिया, जिसे वह लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।





 
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