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Panchkula News: हाईकोर्ट को मिले नौ नए अतिरिक्त न्यायाधीश, लंबित मामलों में तेजी की उम्मीद
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी के बीच केंद्र सरकार ने नौ अधिवक्ताओं की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को अधिसूचित किया है। इन नियुक्तियों से न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वीरवार को इन नियुक्तियों की घोषणा की।
नियुक्त किए गए नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों में मोनिका छिब्बर शर्मा, हरमीत सिंह देओल, प्रवीणेंद्र सिंह चौहान, राजेश गौड़, पूजा चोपड़ा, सुनीश बिंदलिश, मिंदरजीत यादव, दिव्या शर्मा और रविंदर मलिक शामिल हैं। हरियाणा के महाधिवक्ता प्रवीणेंद्र सिंह चौहान भी इनमें से एक हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने भारत के संविधान में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन अधिवक्ताओं को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है।
केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की घोषणा करते हुए इस प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग किया है। यह नियुक्ति पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के साझा हाईकोर्ट के लिए की गई है। इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या और कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या में बड़ा अंतर है।
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न्यायाधीशों की कमी :
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 85 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल 55 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। इस तरह हाईकोर्ट में स्वीकृत संख्या के मुकाबले 30 न्यायाधीशों की कमी है। यह अंतर न्यायिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा था।
लंबित मामले और प्रभाव :
हाईकोर्ट के समक्ष वर्तमान में 4,23,312 मामले लंबित हैं। ऐसे समय में नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है। इन नियुक्तियों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, ये नियुक्तियां अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में की गई हैं इसलिए स्वीकृत न्यायिक क्षमता और मौजूदा कार्यबल के बीच का पूरा अंतर अभी भी बना रहेगा।
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नियुक्त किए गए नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों में मोनिका छिब्बर शर्मा, हरमीत सिंह देओल, प्रवीणेंद्र सिंह चौहान, राजेश गौड़, पूजा चोपड़ा, सुनीश बिंदलिश, मिंदरजीत यादव, दिव्या शर्मा और रविंदर मलिक शामिल हैं। हरियाणा के महाधिवक्ता प्रवीणेंद्र सिंह चौहान भी इनमें से एक हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने भारत के संविधान में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन अधिवक्ताओं को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की घोषणा करते हुए इस प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग किया है। यह नियुक्ति पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के साझा हाईकोर्ट के लिए की गई है। इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या और कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या में बड़ा अंतर है।
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न्यायाधीशों की कमी :
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 85 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल 55 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। इस तरह हाईकोर्ट में स्वीकृत संख्या के मुकाबले 30 न्यायाधीशों की कमी है। यह अंतर न्यायिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा था।
लंबित मामले और प्रभाव :
हाईकोर्ट के समक्ष वर्तमान में 4,23,312 मामले लंबित हैं। ऐसे समय में नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है। इन नियुक्तियों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, ये नियुक्तियां अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में की गई हैं इसलिए स्वीकृत न्यायिक क्षमता और मौजूदा कार्यबल के बीच का पूरा अंतर अभी भी बना रहेगा।