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Sirsa News: नमी बढ़ने से ग्वार फसल पर सफेद मक्खी और हरा तेला का प्रकोप बढ़ा
Mon, 24 Aug 2026 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:28 PM IST
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किसानों को जागरूक करते हुए कृषि वैज्ञानिक। विभाग
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जीवाणु अंगमारी रोग में पत्तियों की किनारियां पीली होकर काली पड़ने लगती हैं
फोटो-- 10
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मौसम में नमी बढ़ने से ग्वार की फसल पर सफेद मक्खी, हरा तेला और जीवाणु अंगमारी रोग का प्रकोप बढ़ गया है। किसान बिना विशेषज्ञों की सलाह के दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। इससे फसल को नुकसान की आशंका है। कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
इसी कड़ी में सेवानिवृत्त ग्वार वैज्ञानिक डॉ. बीडी यादव ने सोमवार को गांव घुकांवाली में ग्वार फसल स्वास्थ्य प्रशिक्षण शिविर में जानकारी दी। यह कार्यक्रम एटीएम ओढ़ां डॉ. पवन यादव की देखरेख में हुआ। डॉ. यादव ने बताया कि जीवाणु अंगमारी रोग में पत्तियों की किनारियां पीली होकर काली पड़ने लगती हैं।
अधिक नमी से पत्तियों का बड़ा हिस्सा काला पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत रोकथाम के उपाय करने की सलाह दी। डॉ. पवन यादव ने किसानों से पक्का बिल लेकर और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही दवा खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने बीटी नरमा में कीटों की रोकथाम और प्राकृतिक खेती पर भी जानकारी दी।
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रोकथाम और छिड़काव के उपाय
डॉ. बीडी यादव ने रोग की रोकथाम के लिए 30 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव की सलाह दी। सफेद मक्खी और हरे तेले के लिए 200 मिलीलीटर मैलाथियान-50 ईसी या डाइमेथोएट 30 ईसी प्रति एकड़ प्रयोग करने को कहा। शिविर में दवाओं की मात्रा और घोल बनाने की विधि भी समझाई गई। इस शिविर में 45 किसान मौजूद रहे, जिन्हें स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के नमूना पैकेट दिए गए। हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स, भिवानी ने मास्क वितरित किए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मौसम में नमी बढ़ने से ग्वार की फसल पर सफेद मक्खी, हरा तेला और जीवाणु अंगमारी रोग का प्रकोप बढ़ गया है। किसान बिना विशेषज्ञों की सलाह के दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। इससे फसल को नुकसान की आशंका है। कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
इसी कड़ी में सेवानिवृत्त ग्वार वैज्ञानिक डॉ. बीडी यादव ने सोमवार को गांव घुकांवाली में ग्वार फसल स्वास्थ्य प्रशिक्षण शिविर में जानकारी दी। यह कार्यक्रम एटीएम ओढ़ां डॉ. पवन यादव की देखरेख में हुआ। डॉ. यादव ने बताया कि जीवाणु अंगमारी रोग में पत्तियों की किनारियां पीली होकर काली पड़ने लगती हैं।
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अधिक नमी से पत्तियों का बड़ा हिस्सा काला पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत रोकथाम के उपाय करने की सलाह दी। डॉ. पवन यादव ने किसानों से पक्का बिल लेकर और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही दवा खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने बीटी नरमा में कीटों की रोकथाम और प्राकृतिक खेती पर भी जानकारी दी।
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रोकथाम और छिड़काव के उपाय
डॉ. बीडी यादव ने रोग की रोकथाम के लिए 30 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव की सलाह दी। सफेद मक्खी और हरे तेले के लिए 200 मिलीलीटर मैलाथियान-50 ईसी या डाइमेथोएट 30 ईसी प्रति एकड़ प्रयोग करने को कहा। शिविर में दवाओं की मात्रा और घोल बनाने की विधि भी समझाई गई। इस शिविर में 45 किसान मौजूद रहे, जिन्हें स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के नमूना पैकेट दिए गए। हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स, भिवानी ने मास्क वितरित किए।