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हिमाचल: देहरा को जिला बनाने की जगी उम्मीद, प्रशासनिक ढांचा तैयार; धर्मशाला की 100 किमी दूरी बनी बड़ा आधार

Fri, 16 Oct 2026 09:34 AM IST
Ankesh Dogra सतीश डढवाल, देहरागोपीपुर/कांगड़ा।
सतीश डढवाल, देहरागोपीपुर/कांगड़ा। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 16 Oct 2026 09:34 AM IST
सार
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हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद देहरा को नया जिला बनाने की उम्मीद फिर बढ़ गई है। क्षेत्र में पुलिस जिला, आरटीओ और विभिन्न विभागों के सर्किल कार्यालय पहले से मौजूद हैं, जबकि कई इलाकों से धर्मशाला जिला मुख्यालय की दूरी 60 से 100 किलोमीटर तक है। 

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Dehra New District Demand Himachal Pradesh Reorganisation Commission
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : एआई।

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद देहरा को नया जिला बनाने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। क्षेत्र में पहले से मौजूद प्रशासनिक ढांचे, पुलिस जिला, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और विभिन्न विभागों के सर्किल स्तर के कार्यालयों को देहरा के पक्ष में प्रमुख आधार माना जा रहा है।

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स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आयोग जिले के पुनर्गठन पर विचार करते समय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखेगा। कांगड़ा प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी करीब 15 लाख और क्षेत्रफल 5,739 वर्ग किलोमीटर है। जिले के दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए धर्मशाला स्थित जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। ऐसे में देहरा को संभावित जिला मुख्यालय के रूप में देखा जा रहा है।

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प्रशासनिक ढांचा पहले से मौजूद
देहरा में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और बिजली बोर्ड के सर्किल स्तर के कार्यालयों के अलावा आरटीओ, जीएसटी सर्कल कार्यालय और पुलिस जिला पहले से स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त डाडासीबा में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा भी की गई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इन कार्यालयों की मौजूदगी से नए जिले के संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक आधार का बड़ा हिस्सा पहले से तैयार है। हालांकि, नया जिला बनाने के लिए अतिरिक्त कार्यालयों, अधिकारियों, कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत का आकलन करना भी जरूरी होगा।

देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर को शामिल करने की चर्चा
संभावित देहरा जिले में देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। जवाली विधानसभा क्षेत्र को भी संभावित दायरे में शामिल करने का विकल्प विचारणीय बताया जा रहा है। हालांकि, इन क्षेत्रों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। संभावित जिले की सीमाएं क्या होंगी और किन क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
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धर्मशाला की दूरी से लोगों को मिलेगी राहत
देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों के कई हिस्सों से धर्मशाला जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 60 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है। ऐसे में लोगों को सरकारी कामकाज के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ती है। देहरा जिला बनने पर संबंधित क्षेत्रों के निवासियों को प्रशासनिक सेवाएं नजदीक मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा में लगने वाले समय और खर्च में कमी आ सकती है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सरकारी कार्यालयों के विस्तार से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कई उपतहसीलें और बड़ी आबादी का दायरा
देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों में देहरा, हरिपुर, जसवां कोटला, डाडासीबा, रक्कड़, परागपुर और खुंडियां के अलावा मझीन और लगड़ू उपतहसीलें शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देहरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 85,263, ज्वालामुखी में 80,141 और जसवां-परागपुर में 80,533 मतदाता हैं। क्षेत्र का विस्तृत भौगोलिक दायरा और प्रशासनिक जरूरतें नए जिले की मांग के पक्ष में प्रमुख तर्क माने जा रहे हैं।
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क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग?
पवन बजरंगी, समाजसेवी: देहरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। जिला बनने से लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और समय व पैसे दोनों की बचत होगी।
सुधीर शर्मा, व्यवसायी: देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर क्षेत्रों को एक जिला व्यवस्था में शामिल करने से विकास कार्यों में तेजी आ सकती है। सरकारी कार्यालयों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नवीन वैद, देहरा निवासी: क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लोगों की प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए देहरा को जिला बनाने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। इससे दूरदराज पंचायतों के लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है।
संपत कुमार, बढ़ल निवासी: देहरा को जिला बनाने की मांग नई नहीं है। जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद उम्मीद है कि सरकार क्षेत्र की जरूरतों, जनसंख्या और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर सकारात्मक निर्णय लेगी।

आयोग के फैसले पर टिकी निगाहें
देहरा को जिला बनाने की मांग के पीछे प्रशासनिक ढांचे की उपलब्धता, धर्मशाला से दूरी और स्थानीय लोगों की सुविधा जैसे तर्क दिए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें जिला पुनर्गठन आयोग की प्रक्रिया और उसकी सिफारिशों पर टिकी हैं। फिलहाल देहरा को नया जिला बनाने या उसकी सीमाएं तय करने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
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