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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The Parala CA store has not yet become operational

पराला का 71 करोड़ का सीए स्टोर फांक रहा धूल : नरेश शर्मा

Fri, 21 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 11:59 PM IST
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पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष का आरोप, परियोजना शुरू न होने से बागवानों को नुकसान आईक्यूएफ का काम पूरा करने पर सरकार ने किए हाथ खड़े
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केंद्र की सब्सिडी लौटाने से होगा 11 करोड़ का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग के सैंज में स्थित पराला मंडी में करीब 71 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए सीए स्टोर के एक साल बाद भी शुरू न होने और दूसरे चरण के आईक्यूएफ (इंडिविजुअल क्विक फ्रीजिंग) सिस्टम का काम आगे न बढ़ने पर पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष नरेश शर्मा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के ठप होने से ठियोग समेत प्रदेश के बागवानों के साथ धोखा हो रहा है। उनका कहना था कि जिस परियोजना से बागवानों को कम लागत पर अपने उत्पादों के भंडारण और बेहतर दाम हासिल करने की उम्मीद थी, वही अब सरकारी उदासीनता के कारण सफेद हाथी बनती जा रही है। नरेश शर्मा ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान एपीएमसी की ओर से पराला में आधुनिक सीए स्टोर और आईक्यूएफ सुविधा विकसित करने की योजना तैयार की गई थी। परियोजना के पहले चरण के लिए भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से करीब 60 करोड़ रुपये की सहायता जुटाई गई थी। इसके अलावा एपीएमसी और मार्केटिंग बोर्ड की ओर से भी राशि उपलब्ध करवाई गई। पहले चरण में करीब 71 करोड़ रुपये की लागत से सीए स्टोर का निर्माण किया गया, जिसे संबंधित एजेंसी ने 25 जून 2025 को सरकार को सौंप दिया था। इसके बावजूद अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है।करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से आईक्यूएफ सुविधा विकसित की जानी थी, लेकिन इसका काम शुरू नहीं हो पाया। ऐसा नहीं होने पर केंद्र से मिली सब्सिडी वापस करने की स्थिति बन गई है, जिससे प्रदेश को 10 करोड़ की सब्सिडी और 1 करोड़ ब्याज लौटाना पड़ेगा। कहा कि बागवान निजी सीए स्टोर का महंगा विकल्प चुनने को मजबूर हैं। नरेश शर्मा ने सरकार से मांग की कि पराला सीए स्टोर को तत्काल शुरू किया जाए। कहा कहा कि यदि सरकार समय रहते परियोजना को शुरू नहीं करती है तो इसका खामियाजा बागवानों और सरकारी खजाने दोनों को भुगतना पड़ेगा।

5 हजार मीट्रिक टन सेब रखने की थी क्षमता
पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष के अनुसार पराला में तैयार सीए स्टोर में करीब 5 हजार मीट्रिक टन सेब रखने की क्षमता विकसित की गई है। इसके साथ करीब 10 हजार मीट्रिक टन क्षमता की ग्रेडिंग एवं प्रोसेसिंग लाइन भी तैयार की गई है। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी सुविधा तैयार होने के बावजूद इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा और करोड़ों रुपये की लागत से तैयार आधारभूत ढांचा बेकार पड़ा है। कहा कि करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई दो रेफर गाड़ियां भी लंबे समय से पराला मंडी में खड़ी हैं। इनमें एक की क्षमता करीब नौ मीट्रिक टन और दूसरी की करीब 15 मीट्रिक टन बताई गई है। लंबे समय से उपयोग में न आने के कारण इन वाहनों की उपयोगिता और रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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