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जोक्स पर आप भी हंसते हैं? आखिर क्या है हंसी के पीछे की वैज्ञानिक वजह
Mon, 02 Nov 2026 03:12 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Mon, 02 Nov 2026 03:12 PM IST
बातचीत में ऐसी सामान्य हंसी औसतन हर दस मिनट में छह बार आती है। यह छोटी और अपेक्षाकृत धीमी होती है। इसके विपरीत, अनियंत्रित हंसी लंबी व ऊंची होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन दोनों प्रकार की हंसी में मस्तिष्क के अलग-अलग तंत्रिका-तंत्र सक्रिय होते हैं।
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आखिर क्या है हंसी के पीछे की वैज्ञानिक वजह
- फोटो : AI
विस्तार
क्या आपको याद है कि पिछली बार आप कब हंसते-हंसते लोटपोट हो गए थे और आपकी हंसी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी? शायद वह ऐसी स्थिति थी, जब आपको बिल्कुल भी नहीं हंसना चाहिए था। ऐसा हममें से एक व्यक्ति के साथ हुआ, जब वह तलाक के एक अप्रिय मामले में अपने मित्र के साथ पारिवारिक न्यायालय गया था। वहां उसे इतनी हंसी आई कि वह खुद को रोकने की कोशिश करते हुए बाथरूम की ओर भागा, पर असफल रहा। यह उसके मित्र को भावनात्मक सहारा देने का बिल्कुल सही तरीका नहीं था। वहीं क्रिकेट कमेंटेटर ब्रायन जॉनस्टन व जोनाथन एग्न्यू भी 1991 में मैच का वर्णन करते समय इतना हंसे कि बोल नहीं पाए। आखिर ऐसा क्यों होता है?
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आमतौर पर हम हंसी को मनोरंजन से जोड़ते हैं, जबकि अधिकांश हंसी सामाजिक कारणों से आती है। दूसरों के साथ होने पर हमारे हंसने की संभावना अकेले होने की तुलना में 30 गुना अधिक होती है। किसी परिचित और प्रिय व्यक्ति के साथ हम अधिक हंसते हैं। बातचीत में हंसी संक्रामक भी होती है। किसी को हंसते देखकर या सुनकर हम खुद-ब-खुद हंसने लगते हैं। इससे सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है। हम सहमति जताने, समझ प्रदर्शित करने, दोस्ती को मजबूत करने और तनाव घटाने के लिए भी हंसते हैं।
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बातचीत में ऐसी सामान्य हंसी औसतन हर दस मिनट में छह बार आती है। यह छोटी और अपेक्षाकृत धीमी होती है। इसके विपरीत, अनियंत्रित हंसी लंबी व ऊंची होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन दोनों प्रकार की हंसी में मस्तिष्क के अलग-अलग तंत्रिका-तंत्र सक्रिय होते हैं। मस्तिष्क की विद्युत उत्तेजना से कुछ क्षेत्रों में हंसी उत्पन्न की जा सकती है। एक तंत्र खुशी व आनंद से जुड़ा है, जबकि दूसरा बोलने तथा ऐच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। स्वाभाविक हंसी से ओपिओइड प्रणाली सक्रिय हो सकती है, जो आनंद और सुखद अनुभूति से जुड़ी है।
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सेरोटोनिन प्रणाली पर इसके प्रभाव से दर्द कुछ समय के लिए कम महसूस हो सकता है। यह प्राचीन तंत्र मनुष्यों और अन्य स्तनधारियों में काफी हद तक समान है। इसके विपरीत, स्वैच्छिक हंसी सामाजिक संवाद में भूमिका निभाती है। यह बोलने, गाने और बीटबॉक्सिंग जैसी जटिल गतिविधियों से जुड़े मस्तिष्कीय तंत्र पर निर्भर करती है। शोध के अनुसार, हंसी केवल मनोरंजन नहीं है। इसका अध्ययन सामाजिक संबंधों, सहानुभूति, भाषा, भावनात्मक संक्रामकता और दर्द नियंत्रण को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।