13 साल का इंतजार खत्म: 5682 क्रेडिटर्स को मिलेंगे ₹1950 करोड़, ईडी द्वारा जब्त संपत्ति होगी मॉनेटाइज
मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने स्पेशल केस नंबर 4/2015 में एमए नंबर 169/2026 पर गत सप्ताह एक अहम आदेश दिया है। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) केस में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त 3464 करोड़ रुपये की संपत्ति को स्पेशल कोर्ट ने मॉनेटाइज करने और उसके बाद 1950 करोड़ (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई द्वारा मंजूर इन्वेस्टर्स के लिए वन-टाइम सेटलमेंट के तौर पर) की वापसी/बहाली की मंजूरी दी गई है। यह आदेश उन इन्वेस्टर्स को पैसा वापस दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो 2013 में पेमेंट डिफॉल्ट के बाद से पिछले 13 वर्षों से रिकवरी का इंतजार कर रहे हैं।
इस बहाली आदेश में शामिल हैं ये बातें
-पीएमएलए के तहत जब्त संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन से मिलने वाली ₹1,950 करोड़ तक की रकम, एनसीएलटी-मंजूर स्कीम में तय 'सेटलमेंट ट्रिगर इवेंट' के बाद, तय क्रेडिटर्स (इन्वेस्टर्स) के असाइनी के तौर पर 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को दी जाएगी। स्कीम के तहत, 5,682 तय क्रेडिटर्स को ₹1,950 करोड़ का भुगतान किया जाना है।
-चूंकि इनमें से कई संपत्तियां 'महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट्स) एक्ट, 1999' (एमपीआईडी एक्ट) के तहत भी जब्त हैं, इसलिए ईडी, एमपीआईडी एक्ट के तहत सक्षम अधिकारी से सलाह-मशविरा करके मॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी करेगा।
ईडी ने प्रक्रिया में मदद की
इन्वेस्टर्स को जल्द पैसा वापस दिलाने के लिए ईडी ने इस व्यवस्था पर अपनी 'नो-ऑब्जेक्शन' (कोई आपत्ति नहीं) दी। आदेश के अनुसार, ₹1,950 करोड़ से ज़्यादा की कोई भी रकम स्पेशल कोर्ट की कस्टडी में रहेगी, जो कार्यवाही के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा।
ये है प्रक्रिया
- -ईडी ने पीएमएलए के अंतर्गत 3464 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच की। कुछ संपत्तियां एमपीआईडी एक्ट के तहत भी अटैच की गई हैं।
- -एनएसईएल के लिए एमपीआईडी की प्राधिकृत अथॉरिटी के साथ ईडी ने मॉनेटाइजेशन का रास्ता निकाला
- -पीड़ित यानी निवेशकों को मिलेंगे ₹1,950 करोड़
- -एनसीएलटी द्वारा मंजूर योजना के तहत 5682 तय क्रेडिटर्स को ₹1,950 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। यह कुल क्लेम राशि का 42 प्रतिशत है।
ये है मामले की पृष्ठभूमि
2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इसे मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्लू) को ट्रांसफर कर दिया गया। यह एफआईआर प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर, उसके डायरेक्टर और मुख्य अधिकारियों, 25 डिफॉल्टर सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात व जालसाजी के आरोपों में दर्ज की गई थी। आरोप था कि बिना असल स्टॉक के कमोडिटी में ट्रेडिंग की अनुमति दी गई थी। इसके कारण हुए पेमेंट डिफॉल्ट से लगभग 13,000 निवेशक प्रभावित हुए। लगभग ₹5,600 करोड़ की बकाया राशि फंस गई।
35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी
ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच की। अब तक 35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं, जिनमें लगभग ₹3,464.03 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई है। साथ ही, स्पेशल कोर्ट में सप्लीमेंट्री PC (अभियोजन शिकायत) सहित प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की गई है।
ये है सेटलमेंट स्कीम
28.11.2025 को एनसीएलटी, मुंबई ने कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 230–232 के तहत एक 'स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' को मंजूरी दी। इस स्कीम में 5,682 खास लेनदारों (क्रेडिटर्स) के लिए ₹1,950 करोड़ के वन-टाइम सेटलमेंट का प्रावधान था। इस स्कीम को 92% से ज़्यादा लेनदारों ने मंज़ूरी दी थी। इसमें हर लेनदार को उनके वेरिफाइड क्लेम का कम से कम 42% हिस्सा वापस मिलने का भरोसा दिया गया था। एनसीएलएटी ने 15.01.2026 को इस मंज़ूरी के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती को भी खारिज कर दिया गया। 13.04.2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस स्कीम को लागू करने के लिए जल्द से जल्द उचित आदेश जारी करें, क्योंकि इसका मकसद हकदार निवेशकों को भुगतान करना है।
भरपाई के लिए ईडी की लगातार कोशिशें
जब्त की गई सभी संपत्तियों (यानी ₹3,464 करोड़) को बेचकर पैसा वसूलने (मॉनेटाइजेशन) का आदेश, ₹1,950 करोड़ की तुरंत भरपाई और बाकी रकम की बाद में भरपाई (जैसा कि स्पेशल कोर्ट तय करेगा) के लिए एक अहम कदम है। इस मामले में भरपाई की दिशा में ईडी का यह पहला कदम नहीं है। इससे पहले, जस्टिस (रिटायर्ड) प्रदीप नंदराजोग की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के निर्देशों पर, ईडी ने निवेशकों में बांटने के लिए कमेटी के सामने टिम्बर ट्रेल ट्रैवल टुडे प्राइवेट लिमिटेड के शेयर और उन पर हुआ मुनाफ़ा (कुल मिलाकर लगभग ₹17.47 करोड़ की कीमत) पेश किया था। ईडी, वित्तीय अपराध से जुड़ी संपत्तियों को ज़ब्त करने, मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कार्रवाई करने और कानून के मुताबिक योग्य निवेशकों और दावा करने वालों को भरपाई दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
19425 घर खरीदारों से धोखा: पक्का रिटर्न देने के नाम पर जुटाए 2004 करोड़, ईडी ने जब्त की 140 करोड़ रुपये की संपत्ति
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दिल्ली जोनल ऑफिस-II ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसकी सब्सिडियरी कंपनियों, उसके प्रमोटरों (अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता), उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की लगभग 140 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह जब्ती अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जो बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जनता के पैसे के दुरुपयोग से जुड़ी है।ईडी की जांच, दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्लू) द्वारा अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई पांच एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इसके अलावा, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने भी अर्थ ग्रुप के प्रमोटरों/डायरेक्टरों के खिलाफ कंपनीज एक्ट की धारा 447 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। इस ग्रुप ने रेजिडेंशियल/कमर्शियल यूनिट्स की समय पर डिलीवरी और पक्का रिटर्न देने का वादा करके 19,425 से ज्यादा घर खरीदारों और निवेशकों से लगभग 2,004 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे।
जांच से पता चला है कि ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों और उनसे जुड़ी दूसरी संस्थाओं या लोगों के जरिए बड़ी मात्रा में फंड को इधर-उधर किया गया। हालांकि, खरीदारों/निवेशकों से बड़ी रकम मिलने के बावजूद, प्रोजेक्ट या तो अधूरे छोड़ दिए गए या यूनिट्स का कब्जा नहीं सौंपा गया। इससे घर खरीदारों और निवेशकों को गलत तरीके से नुकसान हुआ। जांच में यह भी पता चला है कि तय अपराधों से मिली रकम का एक हिस्सा ग्रुप के प्रमोटरों/डायरेक्टरों से जुड़ी अलग-अलग कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर चल व अचल संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया था।
इससे पहले, ईडी ने अप्रैल 2026 में पीएमएलए के नियमों के तहत दिल्ली-एनसीआर में अर्थ ग्रुप से जुड़ी अलग-अलग जगहों पर तलाशी ली थी। इसमें लगभग 6.30 करोड़ रुपये नकद, लगभग 8.78 करोड़ रुपये की कीमत के गहने और 100 से ज़्यादा अचल संपत्तियों के कागजात ज़ब्त किए गए थे। जाँच एजेंसी के मुताबिक, इनकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा बताई गई है।
जांच में यह बात सामने आई है कि अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता की फंड को इधर-उधर करने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मुख्य भूमिका थी। उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 01/06/2026 को गिरफ्तार किया गया था। 29.7.2026 को उनके खिलाफ़ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की गई, जिसमें आरोपियों को सज़ा दिलाने और 212 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त करने की मांग की गई। इस मामले में पीएमएलए की धारा 17 के तहत ज़ब्ती समेत कुल अटैचमेंट (संपत्ति कुर्क करने) की रकम अब 352 करोड़ रुपये हो गई है।