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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर घेराबंदी: आप-डीएमके भी विपक्ष के साथ, संसद में तीसरी बार आएगा हटाने का नोटिस?

Tue, 29 Sep 2026 06:24 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 29 Sep 2026 06:24 PM IST
सार
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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाले विपक्ष के प्रस्तावित नोटिस को आप और डीएमके के समर्थन की खबर है। विपक्ष संसद में तीसरी बार यह प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद? आइए, जानते हैं...

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AAP, DMK Back Opposition Notice Seeking Removal of CEC Gyanesh Kumar Says Sources
सीईसी ज्ञानेश कुमार - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दल संसद में एक बार फिर नोटिस लाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (आप) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने भी विपक्ष के प्रस्तावित नोटिस का समर्थन करने पर सहमति जताई है। दोनों दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन से दूरी बना चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों के साथ समन्वय कर रहे हैं।

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संसद में तीसरी बार हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष अगले कुछ दिनों में लोकसभा और राज्यसभा में सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला नया नोटिस पेश कर सकता है। नोटिस अभी तैयार किया जा रहा है और संसद में जमा करने से पहले कानूनी विशेषज्ञ इसकी समीक्षा करेंगे। यह ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष की तीसरी कोशिश होगी। इससे पहले मार्च में लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए गए थे, जिन्हें सदन के पीठासीन अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद अप्रैल में विपक्ष ने राज्यसभा में दोबारा नोटिस दिया था, जिसमें कुमार को हटाने के नौ आधार बताए गए थे।
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आप और डीएमके ने क्यों दिया समर्थन?
सूत्रों के मुताबिक, आप और डीएमके ने चुनाव आयोग के कामकाज और एसआईआर को लेकर विपक्ष के साथ अपने मतभेदों के बावजूद इस मुद्दे पर साथ आने का फैसला किया है। आम आदमी पार्टी जुलाई 2025 में इंडिया गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग हो गई थी। दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस के साथ चुनावी प्रतिस्पर्धा को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में मतभेद बढ़े थे।
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वहीं, डीएमके ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से दूरी बढ़ाई। इसके बावजूद दोनों दल विपक्षी पार्टियों के साथ कुछ मुद्दों पर समन्वय करते रहे हैं। बताया गया है कि दोनों दलों ने 28 जून को विपक्षी दलों के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए उस पत्र पर भी हस्ताक्षर किए थे, जिसमें चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।



विपक्षी नेताओं के बीच बैठकों का दौर
सीईसी के खिलाफ व्यापक समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी नेताओं के बीच बैठकों का दौर भी जारी है। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने रविवार को आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। मंगलवार सुबह टीएमसी के डेरेक ओ'ब्रायन ने  राज्यसभा सांसद संजय सिंह से मुलाकात की।

इससे पहले 17 सितंबर को डीएमके नेता कनिमोझी ने कोलकाता में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इन बैठकों के जरिए विपक्ष संसद में प्रस्तावित नोटिस के लिए ज्यादा दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।


14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद फिर गरमाया विवाद
सीईसी के खिलाफ विपक्ष की ताजा लामबंदी उस रिपोर्ट के बाद तेज हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर एसआईआर और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों ने फैसले अपनी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए।

इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग फिर तेज कर दी। मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज और एसआईआर से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।

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