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'न आज पुराने हुए, न 100 साल बाद होंगे': अमित शाह बोले- भारतीय परंपराओं में रचा-बसा है महात्मा गांधी का संदेश
Thu, 27 Aug 2026 10:46 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, अहमदाबाद।
आईएएनएस, अहमदाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2026 10:46 PM IST
महात्मा गांधी के विचारों को लेकर अमित शाह ने गुजरात विद्यापीठ के छात्रों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराओं से जुड़े गांधी के सिद्धांत 100 साल बाद भी समाज को दिशा देते रहेंगे। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था। उन्होंने कहा कि 100 साल बाद भी गांधी के विचार उतने ही प्रासंगिक रहेंगे और कभी पुराने नहीं होंगे। अमित शाह ने कहा कि गांधी का संदेश भारतीय जीवन पद्धति, भारतीय मूल्यों और देश की ज्ञान परंपरा से जुड़ा है। गांधी ने खुद कहा था कि उन्होंने कोई नई बात नहीं कही, बल्कि वही बताया जो सदियों से सुनते आए थे। अमित शाह ने कहा कि उनके विचार भारत की अपनी परंपराओं से निकले थे, इसलिए वे स्थायी हैं।
शिक्षा का मतलब सिर्फ ज्ञान नहीं: अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि गांधी के अनुसार देश की भाषा, संस्कृति, श्रम और उद्देश्य भारत की जड़ों से जुड़े बिना आजादी अधूरी रहेगी। विदेश से लौटने के बाद गांधी ने देश का दौरा किया और भाषाओं, बोलियों, पहनावे, खान-पान और धर्मों की विविधता के बीच एकता को देखा। उन्होंने कहा कि गुजरात विद्यापीठ भारतीय सोच के आधार पर शिक्षा के प्रयोग की जगह बना। यहां खेत, हस्तशिल्प कार्यशाला, ग्रामसभा और समाज को भी शिक्षा का माध्यम माना गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि शिक्षा हाथों को कौशल, हृदय को संवेदनशीलता और मस्तिष्क को ज्ञान के साथ विवेक देनी चाहिए। केवल ज्ञान अहंकार पैदा कर सकता है, लेकिन ज्ञान, विवेक, विनम्रता और विद्वता लाते हैं।
यह भी पढ़ें: नेपाल में बाढ़ से तबाही: ये इलाका तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स का था ठिकाना, पर्यटकों के लिए यही मौसम क्यों खास?
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शाह ने सात सामाजिक पाप और 11 व्रतों की याद दिलाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को महात्मा गांधी के बताए सामाजिक पापों की याद दिलाई। इनमें सिद्धांतों के बिना राजनीति, नैतिकता के बिना व्यापार, श्रम के बिना धन, विवेक के बिना ज्ञान, संयम के बिना भोग, चरित्र के बिना ज्ञान और मानवता के बिना विज्ञान शामिल हैं। अमित शाह ने गांधी के 11 व्रतों में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शारीरिक श्रम, स्वाद पर नियंत्रण, निर्भयता, सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, स्वदेशी और अस्पृश्यता उन्मूलन का जिक्र किया। उन्होंने स्वच्छता, मातृभाषा, ग्राम स्वराज, गांवों की समृद्धि और सहकारिता को भी महत्वपूर्ण बताया।
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शिक्षा का मतलब सिर्फ ज्ञान नहीं: अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि गांधी के अनुसार देश की भाषा, संस्कृति, श्रम और उद्देश्य भारत की जड़ों से जुड़े बिना आजादी अधूरी रहेगी। विदेश से लौटने के बाद गांधी ने देश का दौरा किया और भाषाओं, बोलियों, पहनावे, खान-पान और धर्मों की विविधता के बीच एकता को देखा। उन्होंने कहा कि गुजरात विद्यापीठ भारतीय सोच के आधार पर शिक्षा के प्रयोग की जगह बना। यहां खेत, हस्तशिल्प कार्यशाला, ग्रामसभा और समाज को भी शिक्षा का माध्यम माना गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि शिक्षा हाथों को कौशल, हृदय को संवेदनशीलता और मस्तिष्क को ज्ञान के साथ विवेक देनी चाहिए। केवल ज्ञान अहंकार पैदा कर सकता है, लेकिन ज्ञान, विवेक, विनम्रता और विद्वता लाते हैं।
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- गांधी ने गुजरात विद्यापीठ की स्थापना 18 अक्तूबर 1920 को की थी।
- संस्थान को आजादी के बाद भारतीय शिक्षा के एक आदर्श के रूप में देखा गया था।
- गांधी के अनुसार शिक्षा में हाथ, हृदय और मस्तिष्क का संतुलन जरूरी है।
- शाह ने गांधी के 11 व्रतों को आज भी प्रासंगिक बताया।
- खादी और ग्रामोद्योग का कारोबार 2025-26 में 1.87 लाख करोड़ रुपये रहा।
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शाह ने सात सामाजिक पाप और 11 व्रतों की याद दिलाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को महात्मा गांधी के बताए सामाजिक पापों की याद दिलाई। इनमें सिद्धांतों के बिना राजनीति, नैतिकता के बिना व्यापार, श्रम के बिना धन, विवेक के बिना ज्ञान, संयम के बिना भोग, चरित्र के बिना ज्ञान और मानवता के बिना विज्ञान शामिल हैं। अमित शाह ने गांधी के 11 व्रतों में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शारीरिक श्रम, स्वाद पर नियंत्रण, निर्भयता, सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, स्वदेशी और अस्पृश्यता उन्मूलन का जिक्र किया। उन्होंने स्वच्छता, मातृभाषा, ग्राम स्वराज, गांवों की समृद्धि और सहकारिता को भी महत्वपूर्ण बताया।