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एनालॉग पनीर पर सख्त बॉम्बे हाईकोर्ट: रेस्तरां को लगाई फटकार, कहा- आपने लोगों को तड़पाया; अब खुद भुगतो
Fri, 21 Aug 2026 10:13 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:13 PM IST
नकली पनीर खिलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले रेस्तरां को बॉम्बे हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। जज साहब के कड़े तेवर और 'पोएटिक जस्टिस' वाली टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अब खाने में मिलावट करने वालों की खैर नहीं। जानिए कैसे एक रेस्तरां की चालाकी उस पर ही भारी पड़ गई।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नकली और मिलावटी खाने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक रेस्तरां को तगड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कह दिया कि जब आपने लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया है, तो अब नतीजा भी आपको ही भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने इसे 'पोएटिक जस्टिस' यानी जैसा करोगे वैसा भरोगे करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र के ठाणे में 'उडुपी स्वाद' नाम का एक रेस्तरां है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने 11 अगस्त को इस रेस्तरां का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। वजह यह थी कि रेस्तरां में ग्राहकों को असली दूध से बना पनीर नहीं, बल्कि बैन किया गया 'एनालॉग पनीर' परोसा जा रहा था। रेस्तरां ने लाइसेंस निलंबन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने लगाई क्लास
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने रेस्तरां को किसी भी तरह की तुरंत राहत देने से साफ मना कर दिया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा, 'आपको पहले भुगतना होगा। आपने लोगों को सड़ा हुआ खाना खिलाकर परेशान किया है। यह पोएटिक जस्टिस है। इस बार हम बेहद सख्त रुख अपनाएंगे।'
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जब रेस्तरां के वकील ने तर्क दिया कि एफडीए को पहले सुधार का नोटिस देना चाहिए था, तो कोर्ट ने पूछा, 'आप लोगों को यह विश्वास दिलाकर धोखा दे रहे हैं कि यह असली पनीर है। क्या आपने अपने मेनू कार्ड पर लिखा था कि आप एनालॉग पनीर बेच रहे हैं? आप अपने साइनबोर्ड पर यह विज्ञापन क्यों नहीं देते कि हमारे पास असली खाना नहीं मिलता?'
यह भी पढ़ें: मुंबई में FDA का छापा: मैकडोनाल्ड्स और रेडियो क्लब पर गिरी गाज, लाइसेंस निलंबित; अब सुरक्षित है बाहर का खाना?
ग्राहकों को हर्जाना मांगने की सलाह
रेस्तरां ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह आगे से कभी भी एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं करेगा। लेकिन अदालत का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं। पीठ ने कहा कि ऐसे रेस्तरां पर जुर्माना लगना चाहिए और प्रभावित ग्राहकों को कंज्यूमर फोरम जाकर हर्जाना मांगना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई अब सात सितंबर को होगी। तब तक एफडीए को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर असली दूध के फैट से नहीं बनता। इसे बनाने के लिए वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य कैमिकल मिलाए जाते हैं। यह असली पनीर के मुकाबले बहुत सस्ता बनता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी काफी कम होती है।
महाराष्ट्र में एक साल का बैन
सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के चलते महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल का बैन लगाया है। नए आदेश के मुताबिक, अगर असुरक्षित भोजन खाने से किसी की मौत होती है, तो दोषियों को उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है।
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क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र के ठाणे में 'उडुपी स्वाद' नाम का एक रेस्तरां है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने 11 अगस्त को इस रेस्तरां का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। वजह यह थी कि रेस्तरां में ग्राहकों को असली दूध से बना पनीर नहीं, बल्कि बैन किया गया 'एनालॉग पनीर' परोसा जा रहा था। रेस्तरां ने लाइसेंस निलंबन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
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हाईकोर्ट ने लगाई क्लास
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने रेस्तरां को किसी भी तरह की तुरंत राहत देने से साफ मना कर दिया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा, 'आपको पहले भुगतना होगा। आपने लोगों को सड़ा हुआ खाना खिलाकर परेशान किया है। यह पोएटिक जस्टिस है। इस बार हम बेहद सख्त रुख अपनाएंगे।'
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जब रेस्तरां के वकील ने तर्क दिया कि एफडीए को पहले सुधार का नोटिस देना चाहिए था, तो कोर्ट ने पूछा, 'आप लोगों को यह विश्वास दिलाकर धोखा दे रहे हैं कि यह असली पनीर है। क्या आपने अपने मेनू कार्ड पर लिखा था कि आप एनालॉग पनीर बेच रहे हैं? आप अपने साइनबोर्ड पर यह विज्ञापन क्यों नहीं देते कि हमारे पास असली खाना नहीं मिलता?'
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ग्राहकों को हर्जाना मांगने की सलाह
रेस्तरां ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह आगे से कभी भी एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं करेगा। लेकिन अदालत का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं। पीठ ने कहा कि ऐसे रेस्तरां पर जुर्माना लगना चाहिए और प्रभावित ग्राहकों को कंज्यूमर फोरम जाकर हर्जाना मांगना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई अब सात सितंबर को होगी। तब तक एफडीए को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर असली दूध के फैट से नहीं बनता। इसे बनाने के लिए वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य कैमिकल मिलाए जाते हैं। यह असली पनीर के मुकाबले बहुत सस्ता बनता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी काफी कम होती है।
महाराष्ट्र में एक साल का बैन
सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के चलते महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल का बैन लगाया है। नए आदेश के मुताबिक, अगर असुरक्षित भोजन खाने से किसी की मौत होती है, तो दोषियों को उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है।