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ब्रिक्स की महफिल में भारत का जलवा: भरतनाट्यम से कथक तक, 160 कलाकारों ने दिखाई अपनी विरासत, क्या था खास?
Sun, 13 Sep 2026 01:44 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 13 Sep 2026 01:44 AM IST
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन आयोजित रात्रिभोज में भारत की सांस्कृतिक विविधता प्रमुख आकर्षण रही। करीब 160 कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य, पारंपरिक संगीत और दूसरे ब्रिक्स देशों की संगीत परंपराओं को एक साथ मंच पर पेश किया। ‘ब्रिक्स सिम्फनी- वन रिदम, मेनी कल्चर्स’ के जरिए अलग-अलग सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम ने कूटनीतिक मंच पर भारत की सांस्कृतिक ताकत और सॉफ्ट पावर की भी झलक दिखाई।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत की मेजबानी में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन आयोजित रात्रिभोज में राजनीति और कूटनीति के साथ भारत की सांस्कृतिक ताकत भी देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में शामिल नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए यह रात्रिभोज आयोजित किया। इसी दौरान भारत समेत ब्रिक्स के दूसरे सदस्य और साझेदार देशों के कलाकारों ने ‘ब्रिक्स सिम्फनी- वन रिदम, मेनी कल्चर्स’ की खास प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में करीब 160 कलाकार शामिल हुए, जिनमें भारतीय नर्तक और संगीतकार मुख्य भूमिका में रहे।
प्रस्तुति में भारत की अलग-अलग नृत्य परंपराएं भी दिखीं
भारतीय कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर पेश किया। भारतीय नर्तकों के साथ देश के पारंपरिक संगीतकार भी प्रस्तुति का हिस्सा रहे और अलग-अलग भारतीय वाद्ययंत्रों की धुनों ने कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति का रंग जोड़ा।
‘ब्रिक्स सिम्फनी’ में दूसरे देशों की क्या भूमिका रही?
यह कार्यक्रम सिर्फ भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं था। इसमें ब्रिक्स के दूसरे सदस्य और साझेदार देशों के संगीतकारों को भी शामिल किया गया। अलग-अलग देशों की संगीत परंपराओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य के साथ जोड़कर एक साझा प्रस्तुति तैयार की गई। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्कृतियों को एक मंच पर लाना और ब्रिक्स देशों के बीच साझा सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखना था।
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कैसे अलग-अलग संस्कृतियों को एक प्रस्तुति में जोड़ा गया?
आयोजकों के मुताबिक, ‘ब्रिक्स सिम्फनी’ का मकसद अलग-अलग संगीत परंपराओं से एक साझा कलात्मक अभिव्यक्ति तैयार करना था। कार्यक्रम की थीम ‘एक लय, अनेक संस्कृतियां’ रखी गई। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों के बावजूद ब्रिक्स देशों के लोगों के बीच साझा जुड़ाव के कई माध्यम हैं। इस प्रस्तुति में भारत की सांस्कृतिक विविधता को खास आधार बनाया गया।
यह भी पढ़ें: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से नई दिल्ली घोषणा तक, पहले दिन क्या-क्या हुआ?
किस संस्था ने इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली?
ब्रिक्स का दायरा कैसे बढ़ा?
ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इसके सदस्य बने। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हुआ। पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को ब्रिक्स साझेदार देश बनाया गया। शिखर सम्मेलन के पहले दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई शीर्ष नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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प्रस्तुति में भारत की अलग-अलग नृत्य परंपराएं भी दिखीं
भारतीय कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर पेश किया। भारतीय नर्तकों के साथ देश के पारंपरिक संगीतकार भी प्रस्तुति का हिस्सा रहे और अलग-अलग भारतीय वाद्ययंत्रों की धुनों ने कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति का रंग जोड़ा।
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‘ब्रिक्स सिम्फनी’ में दूसरे देशों की क्या भूमिका रही?
यह कार्यक्रम सिर्फ भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं था। इसमें ब्रिक्स के दूसरे सदस्य और साझेदार देशों के संगीतकारों को भी शामिल किया गया। अलग-अलग देशों की संगीत परंपराओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य के साथ जोड़कर एक साझा प्रस्तुति तैयार की गई। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्कृतियों को एक मंच पर लाना और ब्रिक्स देशों के बीच साझा सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखना था।
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कैसे अलग-अलग संस्कृतियों को एक प्रस्तुति में जोड़ा गया?
- ब्रिक्स देशों के अलग-अलग पारंपरिक वाद्ययंत्रों और संगीत शैलियों को एक साथ लाकर ऐसी प्रस्तुति तैयार की गई, जिसमें विविध संगीत परंपराओं के बीच तालमेल दिखाई दिया।
- भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं और दूसरे देशों के संगीत का यह मेल अलग-अलग सभ्यताओं की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को एक साथ सामने लाने की कोशिश थी।
आयोजकों के मुताबिक, ‘ब्रिक्स सिम्फनी’ का मकसद अलग-अलग संगीत परंपराओं से एक साझा कलात्मक अभिव्यक्ति तैयार करना था। कार्यक्रम की थीम ‘एक लय, अनेक संस्कृतियां’ रखी गई। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों के बावजूद ब्रिक्स देशों के लोगों के बीच साझा जुड़ाव के कई माध्यम हैं। इस प्रस्तुति में भारत की सांस्कृतिक विविधता को खास आधार बनाया गया।
यह भी पढ़ें: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से नई दिल्ली घोषणा तक, पहले दिन क्या-क्या हुआ?
किस संस्था ने इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली?
- इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की अगुवाई विदेश मंत्रालय से जुड़ी सांस्कृतिक संस्था भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने की, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति को सामने रखने का काम करती है।
- कार्यक्रम में संगीत और नृत्य के जरिए ब्रिक्स परिवार की अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने की कोशिश की गई और भारत की सांस्कृतिक विविधता को इसकी केंद्रीय पहचान के तौर पर पेश किया गया।
ब्रिक्स का दायरा कैसे बढ़ा?
ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इसके सदस्य बने। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हुआ। पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को ब्रिक्स साझेदार देश बनाया गया। शिखर सम्मेलन के पहले दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई शीर्ष नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।