{"_id":"6abebab7a5a24ac7d105357e","slug":"cji-surya-kant-ai-digitalisation-constitutional-values-judicial-system-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"एआई: 'तकनीक के लाभ अपनाएं, लेकिन संवैधानिक मूल्यों से न हटें', बोले सीजेआई सूर्यकांत; और क्या कहा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एआई: 'तकनीक के लाभ अपनाएं, लेकिन संवैधानिक मूल्यों से न हटें', बोले सीजेआई सूर्यकांत; और क्या कहा?
Fri, 02 Oct 2026 01:25 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:25 AM IST
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था में डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने की जरूरत बताई, लेकिन साथ ही संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उज्बेकिस्तान के समरकंद में एएसीसी कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि तकनीक अदालतों को अधिक सुलभ बनाने, देरी कम करने और प्रक्रियाएं सरल करने में मदद कर सकती है।
विज्ञापन
सीजेआई सूर्यकांत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि संविधान में निहित गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता जैसे मूल्यों पर इसका असर न पड़े। सीजेआई सूर्यकांत ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में एशियन कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट्स एसोसिएशन (एएसीसी) के सातवें कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि तकनीक से तेजी से हो रहे बदलाव से अदालतें भी अछूती नहीं रह सकतीं। सीजेआई ने कहा, "तकनीक हमारे समाज के काम करने के तरीके को बदल रही है। यह बदल रही है कि सरकारें सेवाएं कैसे देती हैं, कारोबार कैसे संचालित होते हैं और नागरिक सार्वजनिक संस्थानों के साथ कैसे बातचीत करते हैं। अदालतें भी इस बदलाव से अछूती नहीं रह सकतीं।"
न्याय व्यवस्था के लिए डिजिटलाइजेशन के फायदे
सीजेआई ने कहा कि डिजिटलाइजेशन न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी संभावनाएं लेकर आया है। इससे अदालतों तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है, मामलों में होने वाली देरी कम की जा सकती है और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को शोध करने तथा बड़ी मात्रा में जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है।
विज्ञापन
सीजेआई ने कहा, "ये ऐसे अवसर हैं, जिनका हमें खुलेपन और कल्पनाशीलता के साथ स्वागत करना चाहिए।" उन्होंने साथ ही तकनीक से जुड़े एक बुनियादी सवाल की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जब हमारे आसपास सब कुछ बदल रहा हो तो यह तय करना जरूरी है कि क्या चीजें ऐसी हैं जिन्हें नहीं बदलना चाहिए।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा जरूरी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संवैधानिक अदालतों के लिए इसका जवाब उन मूल्यों में है, जिनकी रक्षा की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। उन्होंने कहा, "अदालत केवल मामलों का फैसला नहीं करती। वह गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के संवैधानिक वादों को अर्थ देती है।" सीजेआई ने कहा कि एआई कई अवसर उपलब्ध कराता है और अदालतों को खुलेपन और नए विचारों के साथ इसका इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक अदालतों के सामने विकल्प परंपरा और तकनीक में से किसी एक को चुनने का नहीं है। लक्ष्य यह होना चाहिए कि तकनीक के लाभों को न्यायिक संस्थानों तक पहुंचाया जाए, लेकिन संवैधानिक मूल्यों से मजबूती से जुड़े रहा जाए।
एशियाई संवैधानिक अदालतों के बीच सहयोग पर जोर
सीजेआई ने तकनीकी बदलाव से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एशिया की संवैधानिक अदालतों के बीच सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। एएसीसी कांग्रेस की इस बार की थीम "डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में संवैधानिक न्याय" है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि तकनीक से तेजी से हो रहे बदलाव से अदालतें भी अछूती नहीं रह सकतीं। सीजेआई ने कहा, "तकनीक हमारे समाज के काम करने के तरीके को बदल रही है। यह बदल रही है कि सरकारें सेवाएं कैसे देती हैं, कारोबार कैसे संचालित होते हैं और नागरिक सार्वजनिक संस्थानों के साथ कैसे बातचीत करते हैं। अदालतें भी इस बदलाव से अछूती नहीं रह सकतीं।"
विज्ञापन
न्याय व्यवस्था के लिए डिजिटलाइजेशन के फायदे
सीजेआई ने कहा कि डिजिटलाइजेशन न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी संभावनाएं लेकर आया है। इससे अदालतों तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है, मामलों में होने वाली देरी कम की जा सकती है और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को शोध करने तथा बड़ी मात्रा में जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है।
विज्ञापन
सीजेआई ने कहा, "ये ऐसे अवसर हैं, जिनका हमें खुलेपन और कल्पनाशीलता के साथ स्वागत करना चाहिए।" उन्होंने साथ ही तकनीक से जुड़े एक बुनियादी सवाल की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जब हमारे आसपास सब कुछ बदल रहा हो तो यह तय करना जरूरी है कि क्या चीजें ऐसी हैं जिन्हें नहीं बदलना चाहिए।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा जरूरी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संवैधानिक अदालतों के लिए इसका जवाब उन मूल्यों में है, जिनकी रक्षा की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। उन्होंने कहा, "अदालत केवल मामलों का फैसला नहीं करती। वह गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के संवैधानिक वादों को अर्थ देती है।" सीजेआई ने कहा कि एआई कई अवसर उपलब्ध कराता है और अदालतों को खुलेपन और नए विचारों के साथ इसका इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक अदालतों के सामने विकल्प परंपरा और तकनीक में से किसी एक को चुनने का नहीं है। लक्ष्य यह होना चाहिए कि तकनीक के लाभों को न्यायिक संस्थानों तक पहुंचाया जाए, लेकिन संवैधानिक मूल्यों से मजबूती से जुड़े रहा जाए।
एशियाई संवैधानिक अदालतों के बीच सहयोग पर जोर
सीजेआई ने तकनीकी बदलाव से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एशिया की संवैधानिक अदालतों के बीच सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। एएसीसी कांग्रेस की इस बार की थीम "डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में संवैधानिक न्याय" है।