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1986 में रचा इतिहास: 40 साल बाद भी कायम दबदबा; सीआरपीएफ की महिला बटालियन की यूएन मिशन तक धाक

Fri, 25 Sep 2026 05:35 PM IST
राकेश कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला,  नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला,  नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 25 Sep 2026 05:35 PM IST
सार
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सीआरपीएफ की 88वीं महिला बटालियन के गठन के 40 वर्ष पूरे हो गए हैं। वर्ष 1986 में गठित यह भारत ही नहीं, विश्व के अर्धसैनिक बलों के इतिहास की पहली पूर्ण महिला सशस्त्र पुलिस बटालियन थी। महिला कर्मियों ने आतंकवाद विरोधी अभियान, दंगा नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा, नक्सल विरोधी अभियान और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सेवाएं दी हैं। इस मौके पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में महिला पूर्व सैनिकों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
 

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CRPF first women combat battalion completes 40 years with service in UN missions and security operations
सीआरपीएफ की महिला बटालियन - फोटो : @अमर उजाला

विस्तार

देश के प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने शुक्रवार को महिलाओं के नेतृत्व, अटूट संकल्प और परिचालन उत्कृष्टता के चार दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। यह गौरवशाली अवसर 1986 में भारत की पहली पूर्ण महिला लड़ाकू बटालियन (88वीं महिला बटालियन) के गठन की स्मृति में मनाया जा रहा है। इस बटालियन ने  देश के सुरक्षा बलों में महिला कार्मिकों के लिए एक मिसाल कायम की है। यूएन मिशन तक सीआरपीएफ महिला दस्ते की धाक रही है। 
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शौर्य की इस 40-वर्षीय गौरवशाली विरासत का सम्मान करने के लिए, सीआरपीएफ ने नई दिल्ली स्थित शौर्य ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में एक विशेष समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ नेतृत्व, विशिष्ट पूर्व सैनिक (वेटरन्स), सेवारत कर्मी और गणमान्य व्यक्ति अग्रिम पंक्ति के अभियानों में महिलाओं की परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बनने के लिए एकत्रित हुए। समारोह की अध्यक्षता सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने की। सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ की अध्यक्षा डॉ. अनामिका सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं । 
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महानिदेशक ने अधिकारियों को किया सम्मानित
महानिदेशक ने देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में समर्पित सेवा, असाधारण साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए विशिष्ट महिला पूर्व सैनिकों और सेवारत अधिकारियों को सम्मानित किया। डीजी जीपी सिंह ने कहा, 'चालीस' वर्ष पूर्व, सीआरपीएफ ने देश की पहली पूर्ण महिला बटालियन की स्थापना कर एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की थी। मौजूदा समय में सीआरपीएफ की महिला कर्मी दुर्गम क्षेत्रों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और अत्यंत संवेदनशील कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में दृढ़ संकल्प व विशिष्टता के साथ तैनात हैं। बल नेतृत्व अपनी महिला वीरांगनाओं के शौर्यपूर्ण कृत्यों, अनुकरणीय अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा को नमन करता है। 
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यह बल वर्दीधारी महिलाओं के लिए नए अवसर और संस्थागत सहयोग प्रदान करने के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है। महानिदेशक ने जवानों और उनके परिवारों के धैर्य की भी सराहना की। साथ ही, उन्होंने देश भर के संवेदनशील क्षेत्रों और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में तैनात कर्मियों की सहायता के लिए सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी पहलों पर बल दिया। सीआरपीएफ ने अपनी परिचालन तैयारियों, प्रगतिशील सुधारों और एक समावेशी सुरक्षा परिवेश के निर्माण की प्रतिबद्धता को दोहराया, जहाँ महिला कर्मी लगातार आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। 

1986 में हुआ था महिला बटालियन का गठन
वर्ष 1986 में गठित, सीआरपीएफ की 88वीं महिला बटालियन न केवल भारत में बल्कि विश्व भर के अर्धसैनिक बलों के इतिहास में पहली पूर्ण महिला सशस्त्र पुलिस बटालियन थी। पिछले 40 वर्षों में, सीआरपीएफ की महिला कर्मियों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों, दंगा नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा, नक्सल विरोधी विशेष अभियानों तथा विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में उत्कृष्ट सेवा दी हैं। कई वीरता व विशिष्ट सेवा पदकों से सम्मानित हुई हैं। मौजूदा समय में छह विशेष महिला बटालियनें महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्रों में पूरी तरह से तैनात हैं। भीड़ नियंत्रण और दंगा-रोधी कार्यों के लिए प्रत्येक रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) इकाई में चार महिला टीमें तैनात की गई हैं। 

एकीकृत महिला दल अग्रिम पंक्ति में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें समर्पित बस्तरिया बल भी शामिल है, जो वामपंथी उग्रवाद से निपटने में लगा हुआ है। पिछले चार दशकों में, इन बहादुर कर्मियों ने हर महत्वपूर्ण परिस्थिति में अपनी सेवाएं दी हैं, यह साबित करते हुए कि प्रतिबद्धता, अनुशासन और वीरता लिंग भेद से परे हैं। सीआरपीएफ की महिला योद्धाओं का भारत के सैन्य और सुरक्षा इतिहास में अद्वितीय स्थान है। 

अशोक चक्र (मरणोपरांत): कांस्टेबल कमलेश कुमारी एकमात्र अशोक चक्र प्राप्तकर्ता हैं। उन्हें भारत के सर्वोच्च शांति और वीरता पुरस्कार, सीआरपीएफ का यह पुरस्कार संसद पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान उनके सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस के लिए दिया गया। 
सेना पदक और प्रशस्ति पत्र: कांस्टेबल विमला देवी (सेना पदक) और लांस नायक राजवान देवी (सेना प्रमुख प्रशस्ति पत्र) ने श्रीलंका के एलिफेंट पास चेक पोस्ट (1988) में महत्वपूर्ण परिचालन भूमिका निभाई। 

अग्रिम पंक्ति में वीरता पुरस्कार: कांस्टेबल बिंदू कुमरे को वर्ष 2001 में श्रीनगर हवाई अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान असाधारण वीरता के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया।
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