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सेमीकंडक्टर के चिप पर काम करेगा डीआरडीओ: आत्मनिर्भरता बढ़ाने की तैयारी, ईएसटीआईसी-2026 में होगी खास चर्चा
Tue, 13 Oct 2026 10:39 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 13 Oct 2026 10:39 PM IST
डीआरडीओ 27 से 29 अक्तूबर तक दिल्ली में होने वाले ईएसटीआईसी-2026 में सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप पर विशेष सत्र का नेतृत्व करेगा। इसमें उद्योग, शिक्षण संस्थानों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन में स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन भी होगा। चिप तकनीक भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है? क्या इस पहल से देश में चिप निर्माण और डिजाइन की क्षमता मजबूत होगी?
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सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक भारत के लिए क्यों जरूरी है?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत में सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप बनाने की तकनीक को मजबूत करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अहम भूमिका निभाएगा। डीआरडीओ 27 से 29 अक्तूबर तक दिल्ली में होने वाले उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी-2026) में सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप पर विशेष सत्र का नेतृत्व करेगा। इसका उद्देश्य देश में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और रक्षा समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
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ईएसटीआईसी-2026 में डीआरडीओ क्या करेगा?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सम्मेलन का आयोजन सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 12 मंत्रालय मिलकर कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय पहल विज्ञान, तकनीक और नवाचार के जरिये आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने पर केंद्रित है। डीआरडीओ के विशेष सत्र में उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों, देश में चिप बनाने वाले संगठनों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। सत्र में माइक्रोन इंडिया के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुख्य भाषण देंगे। इसके बाद भारत सेमी, नेत्रासेमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और आईआईटी मद्रास के निदेशक अपने विचार रखेंगे। चर्चा में चिप डिजाइन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के लिए विशेष चिप, माइक्रोप्रोसेसर और नई तकनीकों पर ध्यान दिया जाएगा।
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सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक भारत के लिए क्यों जरूरी है?
सेमीकंडक्टर और चिप आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका इस्तेमाल दूरसंचार, वाहन, औद्योगिक मशीनों, एआई और रक्षा प्रणालियों में होता है। डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली महानिदेशक बीके दास ने बंगलूरू में आयोजित सम्मेलन से पहले के कार्यक्रम में कहा कि सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप आर्थिक प्रतिस्पर्धा, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम हैं। उन्होंने कहा कि भारत को चिप निर्माण से लेकर डिजाइन तक मजबूत और भरोसेमंद व्यवस्था तैयार करनी होगी। इससे महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए देश की अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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सम्मेलन में किन स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन होगा?
ईएसटीआईसी-2026 में रक्षा मंत्रालय का एक विशेष प्रदर्शनी स्टॉल भी लगाया जाएगा। इसमें डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं में विकसित कई स्वदेशी तकनीकों और शोध कार्यों को दिखाया जाएगा। इनमें उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम तकनीक के नमूने, अत्यधिक ठंड में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, महिला सुरक्षा के लिए प्राबला फुल-बॉडी प्रोटेक्टर, निष्क्रिय और बिजली से चलने वाले एक्सोस्केलेटन, पोर्टेबल हाइब्रिड ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, उच्च शक्ति वाले पल्स लेजर डायोड और स्क्रैमजेट इंजन तकनीक शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के जरिये रक्षा क्षेत्र में देश के भीतर विकसित तकनीकों और अनुसंधान की जानकारी दी जाएगी।
क्या इससे देश में चिप तकनीक का विकास तेज होगा?
डीआरडीओ के मुताबिक, इस सत्र का उद्देश्य उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप और शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना है। चर्चा में चिप निर्माण, डिजाइन, एआई कंप्यूटिंग, स्वदेशी सेमीकंडक्टर प्लेटफॉर्म और रक्षा क्षेत्र में इनके इस्तेमाल जैसे विषय शामिल होंगे। इससे नई तकनीकी संभावनाओं की पहचान करने और देश में सेमीकंडक्टर से जुड़ा मजबूत तंत्र तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय का प्रदर्शनी स्टॉल भी लोगों को विज्ञान और तकनीक में भारत की उपलब्धियों से परिचित कराएगा। यह पहल विकसित भारत के लक्ष्य के तहत देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर केंद्रित है।