{"_id":"6a8d9814ec9f26ec7d04a523","slug":"former-cds-anil-chauhan-military-strategy-uri-to-operation-sindoor-politics-and-war-2026-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम ने दिए थे क्या निर्देश?: पूर्व सीडीएस ने किया खुलासा, कहा- हमेशा नई रणनीति जरूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम ने दिए थे क्या निर्देश?: पूर्व सीडीएस ने किया खुलासा, कहा- हमेशा नई रणनीति जरूरी
Tue, 25 Aug 2026 06:58 PM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:58 PM IST
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सैन्य अभियानों में रणनीतिक लचीलेपन को अहम बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक तरीके को बार-बार अपनाने से विरोधी को जवाबी तैयारी का मौका मिलता है और अभियान की प्रभावशीलता घट सकती है।
विज्ञापन
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सैन्य रणनीति में लगातार बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य बलों को सफलता और अचानक बढ़त बनाए रखने के लिए अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव करना चाहिए।
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति पर आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने सैन्य बल के इस्तेमाल के दौरान बार-बार एक ही तरीके पर निर्भर रहने से बचने की बात कही।
विज्ञापन
जनरल चौहान ने सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाइयों में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग अभियानों में अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
जनरल चौहान ने कहा, ''विकल्पों की बात करें तो आप सभी जानते हैं कि उरी आतंकवादी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। तब हमने जमीन का रास्ता अपनाया। इसके बाद पुलवामा के बाद हमने हवाई रास्ते का इस्तेमाल किया, जिसमें बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और करीब 40 से अधिक विमान शामिल थे।''
उन्होंने कहा, ''सिंदूर में हमने तीसरा विकल्प इस्तेमाल करने का फैसला किया, यानी कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना। इसका मतलब था कि संघर्ष की सीमा को कम रखा जा सकता था, सफलता सुनिश्चित की जा सकती थी और फिर अचानक बढ़त भी हासिल की जा सकती थी।'' जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इससे संघर्ष की सीमा कम रखने, सफलता सुनिश्चित करने और अचानक बढ़त हासिल करने में मदद मिली।
पूर्व सीडीएस ने कहा, ''आइए यह कहकर शुरुआत करते हैं कि राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं, वे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और सशस्त्र बल उनकी रक्षा के लिए काम करने वाले साधनों में से एक हैं। कई अन्य साधन भी हैं।'
प्रशिया के जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की 'ऑन वॉर' (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की प्रमुख कृतियों में मानी जाती है। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था।
विज्ञापन
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति पर आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने सैन्य बल के इस्तेमाल के दौरान बार-बार एक ही तरीके पर निर्भर रहने से बचने की बात कही।
विज्ञापन
ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम मोदी ने दिए थे क्या निर्देश?
पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''पीएम मोदी ने हमें केवल एक बात कही कि आप पर इसे तुरंत कोई राजनीतिक दबाव नही हैं। आप इसे अपने समय और हिसाब से करें। बस सैन्य अभियान में विफलता का कोई कारण नहीं होना चाहिए, फिर वो मानवीय हो या तकनीकी वजह। हमारे पास इस बात का सबूत होना चाहिए कि हमने क्या किया है? पीएम मोदी ने हमें कार्रवाई को लेकर खुली छूट दी थी। सेना के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे पास स्पष्ट सियासी निर्देश हों और हमें यह मिला।'
विज्ञापन
View this post on Instagram
सैन्य रणनीति में क्यों जरूरी है लगातार बदलाव?
पूर्व सीडीएस जनरल चौहान ने कहा, ''दरअसल, जब भी आप किसी विकल्प का इस्तेमाल करते हैं, अगर आप बार-बार उसी रणनीति को दोहराते हैं तो सफलता की संभावना कम हो जाएगी। आपको हर बार नई रणनीति के बारे में सोचना होगा।''जनरल चौहान ने सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाइयों में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग अभियानों में अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
जनरल चौहान ने कहा, ''विकल्पों की बात करें तो आप सभी जानते हैं कि उरी आतंकवादी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। तब हमने जमीन का रास्ता अपनाया। इसके बाद पुलवामा के बाद हमने हवाई रास्ते का इस्तेमाल किया, जिसमें बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और करीब 40 से अधिक विमान शामिल थे।''
उन्होंने कहा, ''सिंदूर में हमने तीसरा विकल्प इस्तेमाल करने का फैसला किया, यानी कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना। इसका मतलब था कि संघर्ष की सीमा को कम रखा जा सकता था, सफलता सुनिश्चित की जा सकती थी और फिर अचानक बढ़त भी हासिल की जा सकती थी।'' जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इससे संघर्ष की सीमा कम रखने, सफलता सुनिश्चित करने और अचानक बढ़त हासिल करने में मदद मिली।
राजनीति और युद्ध क्यों नहीं है अलग?
पूर्व सीडीएस ने कहा कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छाशक्ति का सीधा विस्तार है। उन्होंने कहा कि किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कई साधनों में से एक हैं। उन्होंने कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के प्रसिद्ध सिद्धांत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है।पूर्व सीडीएस ने कहा, ''आइए यह कहकर शुरुआत करते हैं कि राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं, वे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और सशस्त्र बल उनकी रक्षा के लिए काम करने वाले साधनों में से एक हैं। कई अन्य साधन भी हैं।'
प्रशिया के जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की 'ऑन वॉर' (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की प्रमुख कृतियों में मानी जाती है। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था।