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'युद्ध में एआई प्रणालियों का बढ़ेगा इस्तेमाल': नौसेना के उप प्रमुख ने बताया रोडमैप, समुद्री सुरक्षा पर जोर
Mon, 19 Oct 2026 02:48 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:48 PM IST
भारतीय नौसेना हवा, समुद्र, पानी के भीतर संचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने कहा कि लक्ष्य नौसेना को बहुआयामी नेटवर्क आधारित सैन्य बल बनाना है।
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नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय नौसेना हवा, समुद्र, पानी के भीतर संचालन से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्वांटम तकनीक तक सभी क्षेत्रों में विकास पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य नौसेना को एक बहुआयामी नेटवर्क आधारित सैन्य बल के रूप में तैयार करना है। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने सोमवार को यह जानकारी दी।
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कोचर ने कहा कि नौसेना केवल नई तकनीक अपनाने पर ही काम नहीं कर रही, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इन तकनीकों से उसकी परिचालन क्षमता मजबूत हो।
पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री हितों की सुरक्षा में नौसेना की भूमिका से जुड़े सवाल पर कोचर ने कहा कि मौजूदा संकटों के कारण नौसेना की सोच और तैनाती, दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने नौसेना के ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस अभियान के तहत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
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युद्ध में एआई और स्वायत्त प्रणालियों की बढ़ेगी भूमिका
हाल के संघर्षों से तकनीक के इस्तेमाल के बारे में मिले सबक पर कोचर ने कहा कि इन घटनाओं ने नौसेना के सामने कुछ नई जरूरतों को स्पष्ट किया है। इनमें स्वायत्त प्रणालियों और युद्ध के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की तैयारियों में मानवरहित विमान प्रणालियों का मुकाबला करने वाली तकनीक यानी काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक भी शामिल हैं।
कोचर ने कहा, "अगर मैं भविष्य की ओर देखूं, तो इसमें काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल है। यह ऐसा क्षेत्र है, जो निकट भविष्य में तेजी से विकसित होगा। हम इन सभी पहलुओं को लेकर पूरी तरह सजग हैं।"
तकनीक नौसेना के भविष्य के लिए अहम
नौसेना उप प्रमुख ने कहा कि केवल युद्ध या संघर्ष ही नौसेना के भविष्य की दिशा तय नहीं करते। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलती जरूरतों के अनुसार तकनीक को अपनाना और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कोचर ने कहा कि नौसेना केवल नई तकनीक अपनाने पर ही काम नहीं कर रही, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इन तकनीकों से उसकी परिचालन क्षमता मजबूत हो।
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पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री हितों की सुरक्षा में नौसेना की भूमिका से जुड़े सवाल पर कोचर ने कहा कि मौजूदा संकटों के कारण नौसेना की सोच और तैनाती, दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने नौसेना के ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस अभियान के तहत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
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युद्ध में एआई और स्वायत्त प्रणालियों की बढ़ेगी भूमिका
हाल के संघर्षों से तकनीक के इस्तेमाल के बारे में मिले सबक पर कोचर ने कहा कि इन घटनाओं ने नौसेना के सामने कुछ नई जरूरतों को स्पष्ट किया है। इनमें स्वायत्त प्रणालियों और युद्ध के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की तैयारियों में मानवरहित विमान प्रणालियों का मुकाबला करने वाली तकनीक यानी काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक भी शामिल हैं।
कोचर ने कहा, "अगर मैं भविष्य की ओर देखूं, तो इसमें काउंटर-यूएएस और क्वांटम तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल है। यह ऐसा क्षेत्र है, जो निकट भविष्य में तेजी से विकसित होगा। हम इन सभी पहलुओं को लेकर पूरी तरह सजग हैं।"
तकनीक नौसेना के भविष्य के लिए अहम
नौसेना उप प्रमुख ने कहा कि केवल युद्ध या संघर्ष ही नौसेना के भविष्य की दिशा तय नहीं करते। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलती जरूरतों के अनुसार तकनीक को अपनाना और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।