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'विरोध करना मौलिक अधिकार': बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- प्रदर्शन में आपराधिक गतिविधि का भी संदेह, जानें पूरा मामला

Mon, 19 Oct 2026 02:56 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 19 Oct 2026 02:56 PM IST
सार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और आम जनता को होने वाली परेशानी पर विचार जरूरी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला? 

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Protesting fundamental right Bombay High Court notes possibility criminal activity during demonstrations
बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि हालांकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने वाले व्यापक आदेश जारी करने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और आम जनता को होने वाली असुविधा जैसे पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।
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बेंच ने क्या निर्देश दिए? 
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को उन याचिकाओं पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि शहर में हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया था।
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याचिका में क्या था?
अदालत वकील सावर देवरे की ओर से दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी। इसमें पुलिस की कथित बर्बरता और उन लोगों को हिरासत में लेने का मुद्दा उठाया गया था, जो दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
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याचिका में क्या मांग की गई? 
याचिका में मांग की गई थी कि पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में न ले। सोमवार को वकील गायत्री सिंह ने चार लोगों की ओर से एक आवेदन पेश किया। इन लोगों को पिछले हफ्ते एक शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा लेने के बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

सिंह ने बताया कि इन चारों को पूरे एक दिन तक हिरासत में रखा गया, फिर घर जाने को कहा गया, और बाद में उन्हें 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई ने दो अन्य लोगों के हलफनामे पेश किए, जिन्हें पुलिस ने उनके घरों से हिरासत में लिया था।

पीठ ने क्या कहा? 
पीठ ने कहा, 'हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। लेकिन यह विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए। हमने देखा है कि महाराष्ट्र में पुलिस ने काफी संयम बरता है। ऐसे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों की पृष्ठभूमि भी देखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। ऐसा न हो कि आम नागरिकों की आड़ में अपराधी इसमें शामिल हो जाएं।'


अगली सुनवाई कब? 
इस बीच, मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क (जहां पिछले हफ्ते विरोध प्रदर्शन हुए थे) के निवासियों की ओर से पेश हुए दो वकीलों ने आवेदन दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट का एक ऐसा आदेश मौजूद है, जो वहां इस तरह के किसी भी विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाता है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं और सरकार को इन शिकायतों पर भी जवाब देना होगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर के लिए तय की है।
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