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Supreme Court: जंतर-मंतर पर यौन उत्पीड़न की जांच पहले होगी, महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर कोर्ट गंभीर

Mon, 24 Aug 2026 01:45 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 24 Aug 2026 01:45 PM IST
सार
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सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और हिंसा के आरोपों की प्राथमिकता से जांच का निर्देश दिया है। जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी इन शिकायतों की जांच करेगी और जल्द अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी। 

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Investigation Jantar Mantar harassment allegations take place first Supreme Court takes complaints seriously
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस हिंसा के आरोपों की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करेगी। CJI ने कहा कि 18 अगस्त के आदेश के अनुसार, कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित यौन हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य प्रकार की हिंसा से जुड़ी शिकायतों पर प्राथमिकता से विचार करते हुए जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करनी है।

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20 जुलाई के प्रदर्शन से उठा मामला
यह मामला तब सामने आया, जब सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों द्वारा कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की शिकायतें की हैं।
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इसी मुद्दे पर अलग रिट याचिका भी दायर
इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर एक अलग रिट याचिका भी दायर की गई है और हाई-पावर्ड कमेटी को मामले की जांच करने के लिए कहा गया है। CJI ने कहा कि कमेटी के अध्यक्ष को शिकायतें प्राप्त करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाएगी।
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पांच सदस्यीय कमेटी करेगी आरोपों की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की थी। कमेटी को छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों की ओर से लगाए गए हिंसा के आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


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महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को मिलेगी प्राथमिकता
कमेटी को विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और किसी भी प्रकार के द्वितीयक उत्पीड़न की शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने को कहा गया है। इसके साथ ही पुलिस बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल और छेड़छाड़ के आरोपों पर जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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