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झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर घिरी सरकार: सुप्रीम कोर्ट बोला- नियम हमारे पुराने फैसले के खिलाफ; क्या है मामला?

Thu, 08 Oct 2026 01:54 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 08 Oct 2026 01:54 PM IST
सार
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति के नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये उसके प्रकाश सिंह फैसले में तय दिशा-निर्देशों के खिलाफ हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह में नियमों पर पुनर्विचार करने को कहा है। मामला तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से भी जुड़ा है, क्योंकि उन्हें सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी बनाया गया था। अदालत ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

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Jharkhand DGP appointment rules challenged in Supreme Court as state agrees to revisit the process
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पहली नजर में ये नियम सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के खिलाफ नजर आते हैं। अदालत ने डीजीपी बनाई गई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा से भी जवाब मांगा है।
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शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार को इस प्रावधान पर पुनर्विचार करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। साथ ही राज्य से कहा है कि यदि वह नियम में बदलाव नहीं करना चाहता है, तो उसे अदालत के समक्ष इसका बचाव करना होगा।
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केंद्र ने नियमों को चुनौती दी
केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार की ओर से 8 जनवरी 2025 को जारी ‘झारखंड डीजीपी चयन और नियुक्ति विनियमन, 2025’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केंद्र का कहना है कि ये नियम पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के अनुरूप नहीं हैं।
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झारखंड सरकार ने कहा- नियमों पर फिर विचार करेंगे
झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि राज्य सरकार इन नियमों की दोबारा समीक्षा करेगी। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र पहले भी झारखंड सरकार को बता चुका है कि ये नियम प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ हैं और इन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने तदाशा मिश्रा को भी मौका दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों को रद्द करने की स्थिति में तदाशा मिश्रा प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए अदालत उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दे रही है। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि अगर किसी दूसरे राज्य ने भी ऐसे नियम बनाए हैं तो सत्ता में किसी भी दल की सरकार हो, ऐसे नियमों को हटना चाहिए।

दरअसल, राज्य के नियमों में छह महीने से कम सेवा अवधि वाले अधिकारी को भी डीजीपी बनाने की अनुमति दी गई है। अगर सुप्रीम कोर्ट इन नियमों को रद्द करता है, तो इसका सीधा असर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से अदालत ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

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सत्ता में कौन है, इससे अदालत का सरोकार नहीं: जस्टिस जॉयमाल्या बागची
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने साफ कहा कि अदालत की चिंता इस बात से नहीं है कि केंद्र या राज्य में किस दल की सरकार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का बाध्यकारी कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके घोषित कानून को कमजोर या बेअसर न किया जाए। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को जीडीपी की नियुक्ति से जुड़े नियमों पर एक सप्ताह के भीतर दोबारा विचार करने या उन्हें उचित ठहराने का निर्देश दिया है।

दूसरे राज्यों के नियम भी देखे जाएंगे
शीर्ष अदालत ने मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी से अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े कानूनों और नियमों का भी अध्ययन करने को कहा है। इसके जरिए सुप्रीम कोर्ट अलग-अलग राज्यों की व्यवस्थाओं की तुलना करेगा और यह देखेगा कि वहां डीजीपी नियुक्ति के नियम उसके पहले के निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।



क्या है पूरा मामला?
झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब राज्य सरकार ने आठ जनवरी 2025 को डीजीपी नियुक्ति के लिए नए नियम बनाए। केंद्र का आरोप है कि इन नियमों में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इस फैसले के मुताबिक राज्य सरकार को यूपीएससी की ओर से तैयार तीन अधिकारियों के पैनल में से डीजीपी चुनना होता है और अधिकारी के पास नियुक्ति के समय कम से कम छह महीने की सेवा बची होनी चाहिए। इसके बावजूद अनुराग गुप्ता को फरवरी 2025 में डीजीपी बनाया गया, जबकि उनकी करीब तीन महीने की सेवा बची थी।

बाद में 29 दिसंबर 2025 को झारखंड ने नियम बदलकर छह महीने की बची सेवा की शर्त हटा दी और अगले ही दिन, 30 दिसंबर को तदाशा मिश्रा को डीजीपी बना दिया, जबकि वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्र ने अब इन नियमों और इनके आधार पर हुई नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 

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