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कैब ड्राइवरों को बड़ी राहत: फडणवीस सरकार ने मराठी सीखने की समयसीमा बढ़ाई, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका निपटाई
Sat, 29 Aug 2026 04:13 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 29 Aug 2026 04:13 PM IST
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल अतिरिक्त समय दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार ड्राइवरों की याचिका सरकार के आश्वासन के बाद निपटा दी। तत्काल कार्रवाई का खतरा फिलहाल टल गया है। विवाद की जड़ 12 अगस्त की अधिसूचना और ड्राइवरों के लिए मराठी के कार्यसाधक ज्ञान की अनिवार्यता थी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट।
- फोटो : ANI
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठी भाषा सीखने को लेकर चार कैब ड्राइवरों की याचिका शनिवार को निपटा दी। महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। इससे गैर-मराठी ड्राइवरों पर तत्काल कार्रवाई का खतरा फिलहाल टल गया है। सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखद की पीठ को इसकी जानकारी दी। सरकार के इस बयान को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने की समयसीमा बढ़ाने की घोषणा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समयसीमा बढ़ाने की घोषणा की थी। इसका सीधा मतलब है कि गैर-मराठी ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए अब पहले तय समय से एक साल ज्यादा मिलेगा। मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका अधिवक्ता विवेक शुक्ला के माध्यम से दाखिल हुई थी।
याचिका में 12 अगस्त की सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। ड्राइवरों का कहना था कि यह नियम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
ड्राइवरों ने क्या तर्क दिया?
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला दिया गया। इनमें समानता का अधिकार, व्यापार और पेशा करने की स्वतंत्रता तथा जीवन का अधिकार शामिल हैं। ड्राइवरों ने यह भी तर्क दिया कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की अनिवार्यता नहीं है। उनके अनुसार, राज्य सरकार को किसी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान ड्राइवर की योग्यता, बैज या परमिट की शर्त बनाने का अधिकार नहीं है।
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याचिका में कहा गया था कि इस नियम से लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवर प्रभावित हो सकते हैं। उनके बैज निलंबित होने और परमिट रद्द होने का खतरा था। इससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता था।
यह भी पढ़ें: सोनिया की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग' पर सियासी संग्राम: कांग्रेस का दावा- प्रकाशक पर दबाव; भाजपा ने किया पलटवार
नियम में क्या?
महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि गैर-मराठी ड्राइवरों को बुनियादी मराठी सीखनी होगी। इसके लिए 15 अगस्त की समयसीमा तय की गई थी। सरकार ने ड्राइवरों के लिए मराठी कक्षाएं भी शुरू की थीं। 20 अगस्त को परिवहन विभाग ने व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को नोटिस देना शुरू किया। इनमें मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालक शामिल थे। राज्यभर में जांच के पहले ही दिन पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं होने पर नोटिस दिए गए। इससे हजारों गैर-मराठी ड्राइवरों में चिंता फैल गई। कई जगह अचानक प्रदर्शन भी हुए।
परिवहन मंत्री सरनाइक ने कहा था कि मराठी परीक्षा में असफल रहने वाले ड्राइवरों को कार्यसाधक ज्ञान हासिल करने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। इसके बाद भी जरूरी ज्ञान हासिल नहीं करने पर उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता था। अब सरकार ने भाषा सीखने की समयसीमा एक साल बढ़ा दी है। हाईकोर्ट ने इसी आश्वासन के आधार पर याचिका का निपटारा कर दिया।
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मुख्यमंत्री ने की समयसीमा बढ़ाने की घोषणा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समयसीमा बढ़ाने की घोषणा की थी। इसका सीधा मतलब है कि गैर-मराठी ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए अब पहले तय समय से एक साल ज्यादा मिलेगा। मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका अधिवक्ता विवेक शुक्ला के माध्यम से दाखिल हुई थी।
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याचिका में 12 अगस्त की सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। ड्राइवरों का कहना था कि यह नियम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
ड्राइवरों ने क्या तर्क दिया?
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला दिया गया। इनमें समानता का अधिकार, व्यापार और पेशा करने की स्वतंत्रता तथा जीवन का अधिकार शामिल हैं। ड्राइवरों ने यह भी तर्क दिया कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की अनिवार्यता नहीं है। उनके अनुसार, राज्य सरकार को किसी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान ड्राइवर की योग्यता, बैज या परमिट की शर्त बनाने का अधिकार नहीं है।
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याचिका में कहा गया था कि इस नियम से लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवर प्रभावित हो सकते हैं। उनके बैज निलंबित होने और परमिट रद्द होने का खतरा था। इससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता था।
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नियम में क्या?
महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि गैर-मराठी ड्राइवरों को बुनियादी मराठी सीखनी होगी। इसके लिए 15 अगस्त की समयसीमा तय की गई थी। सरकार ने ड्राइवरों के लिए मराठी कक्षाएं भी शुरू की थीं। 20 अगस्त को परिवहन विभाग ने व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को नोटिस देना शुरू किया। इनमें मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालक शामिल थे। राज्यभर में जांच के पहले ही दिन पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं होने पर नोटिस दिए गए। इससे हजारों गैर-मराठी ड्राइवरों में चिंता फैल गई। कई जगह अचानक प्रदर्शन भी हुए।
परिवहन मंत्री सरनाइक ने कहा था कि मराठी परीक्षा में असफल रहने वाले ड्राइवरों को कार्यसाधक ज्ञान हासिल करने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। इसके बाद भी जरूरी ज्ञान हासिल नहीं करने पर उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता था। अब सरकार ने भाषा सीखने की समयसीमा एक साल बढ़ा दी है। हाईकोर्ट ने इसी आश्वासन के आधार पर याचिका का निपटारा कर दिया।