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Hindi News ›   India News ›   Mere registration cases will not lead externment proceedings concrete grounds essential SC significant ruling

मुकदमे दर्ज होने भर से नहीं होगी जिला बदर की कार्रवाई: ठोस वजह जरूरी; सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

Mon, 31 Aug 2026 10:59 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 31 Aug 2026 10:59 PM IST
सार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होना अकेले जिला बदर करने का आधार नहीं हो सकता। ऐसी कार्रवाई के लिए ठोस कारण और उसका स्पष्ट संबंध जरूरी है, क्योंकि जिला बदर का आदेश व्यक्ति के आजादी के अधिकार को सीधे प्रभावित करता है।

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Mere registration cases will not lead externment proceedings concrete grounds essential SC significant ruling
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को जिला बदर करने से उसके आजादी के अधिकार पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए बिना ठोस वजह के किसी व्यक्ति को जिला बदर नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति के खिलाफ नवंबर 2025 में जारी जिला बदर आदेश को रद्द कर दिया।

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रायगढ़ और आसपास के जिलों से बाहर रहने का था आदेश
इस आदेश के तहत व्यक्ति को एक साल के लिए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और उससे लगे जिलों की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा कि आदेश में ठोस कारणों का अभाव है, इसलिए यह कमजोर और कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
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कई मुकदमे दर्ज होना अपने आप में पर्याप्त आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज होना अपने आप में उसे जिला बदर करने का आधार नहीं बन सकता। ऐसी कार्रवाई करने से पहले जिलाधिकारी को मामले की परिस्थितियों की पूरी और निष्पक्ष जानकारी के आधार पर यह संतुष्टि करनी होगी कि व्यक्ति को जिला बदर करने जैसी कड़ी कार्रवाई करना वास्तव में जरूरी है।
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आदेश में कार्रवाई के कारण बताना जरूरी
पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी को अदालत की तरह विस्तृत फैसला लिखने की जरूरत नहीं है, लेकिन आदेश में कम से कम उन कारणों का उल्लेख होना चाहिए, जिनके आधार पर जिला बदर की कार्रवाई जरूरी मानी गई। अदालत ने कहा कि मनमानी कार्रवाई रोकने के लिए ठोस आधार होना चाहिए और उन आधारों का प्रस्तावित कार्रवाई से स्पष्ट संबंध भी होना जरूरी है।


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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला
शीर्ष अदालत ने यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जनवरी में दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जिला बदर के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर असर डालने वाली ऐसी कार्रवाई केवल आरोपों या आपराधिक मामलों की संख्या के आधार पर नहीं की जा सकती।

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