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MHA: हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन का बड़ा खतरा, गृह सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की

Thu, 03 Sep 2026 04:39 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 03 Sep 2026 04:39 PM IST
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MHA: High risk of GLOFs and avalanches in Himalayan states; Home Secretary reviews preparedness.
हिमालय। - फोटो : अमर उजाला

केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को नई दिल्ली में हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) और हिमस्खलन के जोखिमों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में हिमालयी क्षेत्र में जीएलओएफ के उभरते जोखिमों की समीक्षा की गई। इस दौरान प्रारंभिक चेतावनी, संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निगरानी, उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान, संभावित जल-प्रवाह मार्गों का निर्धारण, चेतावनियों का समय पर प्रसार, निकासी की तैयारियों तथा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

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राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, चेतावनियों के अंतिम छोर तक समयबद्ध प्रसार में सुधार, जल-प्रवाह मार्गों की योजना, सामुदायिक स्तर पर तैयारियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक प्रतिक्रिया संसाधनों की तैनाती सहित अपनी-अपनी तैयारियों और शमन रणनीतियों से अवगत कराया। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-विशिष्ट संवेदनशीलताओं और तैयारियों के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शमन संबंधी उपायों को जिला और स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई में परिणत किया जाए।
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केंद्रीय गृह सचिव ने विशेष रूप से जोखिम की स्थिति बढ़ने के दौरान संवेदनशील ग्लेशियल झीलों तथा हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की निरंतर और सक्रिय निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे राज्य की एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के बीच निकट समन्वय बनाए रखें, ताकि चेतावनियों पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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केंद्रीय गृह सचिव ने जोर देकर कहा कि जीएलओएफ और हिमस्खलन से निपटने की तैयारियां केवल प्रतिक्रिया-केंद्रित उपायों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें जोखिम-सूचित योजना निवारक शमन उपायों और सामुदायिक स्तर की तैयारियों की दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी तैयारियों की योजनाओं की नियमित समीक्षा करने, प्रारंभिक चेतावनी एवं निकासी व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों की पहचान करने तथा किसी भी चरम घटना से पहले आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी गई। 

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में स्वीकृत जीएलओएफ शमन परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाई जानी चाहिए। बैठक का समापन अंतर-एजेंसी समन्वय को निरंतर बनाए रखने, जोखिम संबंधी सूचनाओं के नियमित आदान-प्रदान तथा प्रारंभिक चेतावनी और प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने के निर्देशों के साथ हुआ, ताकि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।


बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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