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सितंबर में आसमान पर दिखेंगे ग्रहों के शानदार नजारे: कौन सी रात तारों के लिए खास, कब सबसे ज्यादा चमकेगा शुक्र?
Tue, 01 Sep 2026 06:41 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 01 Sep 2026 06:41 PM IST
सितंबर का महीना खगोल प्रेमियों के लिए कई खास नजारे लेकर आ रहा है। इस दौरान चंद्रमा मंगल, बृहस्पति और शुक्र के करीब दिखाई देगा। शुक्र 18 सितंबर को अपनी सबसे तेज चमक में नजर आएगा, जबकि अमावस्या के आसपास मिल्की वे देखने का अच्छा मौका मिलेगा। 26 सितंबर को हार्वेस्ट मून भी दिखाई देगा। बता दें, यह आमतौर पर शरद ऋतु में आने वाली पूर्णिमा को कहा जाता है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि सितंबर में आसमान कब और कहां देखना सबसे खास रहेगा?
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6 से 26 सितंबर तक आसमान में होंगे कई बदलाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सितंबर की रातें और भोर का आसमान कई खूबसूरत खगोलीय घटनाओं का गवाह बनेगा। महीने की शुरुआत में चंद्रमा मंगल और बृहस्पति के करीब नजर आएगा। इसके बाद शुक्र अपनी सबसे ज्यादा चमक के साथ दिखाई देगा। अमावस्या के आसपास आसमान में चंद्रमा की रोशनी कम रहने से मिल्की वे को देखने का बेहतर मौका मिलेगा। महीने के आखिर में पूर्णिमा और शनि भी खास नजारा पेश करेंगे।
6-7 सितंबर: चंद्रमा और मंगल करीब
6 और 7 सितंबर की भोर में पतला चंद्रमा और मंगल एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। दोनों के बीच करीब तीन डिग्री का अंतर होगा। सुबह करीब 3 बजे इन्हें पूर्वी क्षितिज के ऊपर देखा जा सकेगा। करीब डेढ़ घंटे बाद बृहस्पति भी उनके पीछे नजर आएगा, जबकि शनि दक्षिण-पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा।
8 सितंबर: चंद्रमा के साथ बृहस्पति
8 सितंबर को सुबह करीब 4 बजे चंद्रमा और चमकीला बृहस्पति पूर्वी आकाश में साथ दिखाई देंगे। सूर्योदय तक दोनों को देखा जा सकेगा।
11-12 सितंबर: मिल्की वे देखने का शानदार मौका
इन दिनों अमावस्या होगी, इसलिए चंद्रमा की रोशनी लगभग नहीं रहेगी। किसी अंधेरे और खुले स्थान से तारों के साथ मिल्की वे के चमकीले केंद्र, दूर की आकाशगंगाओं और गैस-धूल के बादलों को देखने का बेहतर अवसर मिलेगा। उत्तरी गोलार्ध में इस साल मिल्की वे के केंद्र को देखने के लिए यह आखिरी अच्छे मौकों में से एक होगा।
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14 सितंबर: चंद्रमा के करीब शुक्र
सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर बेहद पतला चंद्रमा शुक्र के करीब दिखाई देगा। दोनों करीब एक घंटे तक नजर आ सकते हैं।
18 सितंबर: सबसे चमकीला होगा शुक्र
शुक्र इस साल की अपनी शाम की उपस्थिति में सबसे अधिक चमकदार नजर आएगा। इसकी चमक इतनी ज्यादा होगी कि शहरों की रोशनी के बीच भी इसे आसानी से पहचाना जा सकेगा। इसके पास बुध भी दिखाई दे सकता है।
22 सितंबर: बढ़ सकती है उत्तरी रोशनी
22 सितंबर को उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत होगी। इस समय सूर्य से आने वाली ऊर्जा और पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण के बीच होने वाली गतिविधियों के कारण उत्तरी रोशनी ज्यादा सक्रिय हो सकती है। हालांकि इसे देखने की गारंटी नहीं है।
25 सितंबर: मंगल के साथ मिथुन के जुड़वां सितारे
मंगल मिथुन तारामंडल के प्रसिद्ध सितारों कैस्टर और पोलक्स के साथ लगभग एक सीधी कतार में दिखाई देगा। इनके नीचे मंगल और क्षितिज के करीब बृहस्पति भी नजर आएगा।
26 सितंबर: हार्वेस्ट मून
26 सितंबर को पूर्णिमा का चंद्रमा सूर्यास्त के आसपास उगेगा। क्षितिज के करीब यह सामान्य से बड़ा और नारंगी दिखाई दे सकता है। इसके पास शनि भी नजर आएगा। दूरबीन से देखने वाले लोग पास में नेपच्यून को भी खोज सकते हैं।
पूरे माह दिखेगी एंड्रोमेडा गैलेक्सी
एंड्रोमेडा गैलेक्सी हमारे सौरमंडल से करीब 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है।एंड्रोमेडा हमारी मिल्की वे की सबसे निकटतम प्रमुख आकाशगंगा है।पूरे सितंबर माह के दौरान साफ और अंधेरे आसमान में इसे हल्की धुंधली रोशनी के रूप में देखा जा सकता है। दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से इसका नजारा और शानदार होगा।
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6-7 सितंबर: चंद्रमा और मंगल करीब
6 और 7 सितंबर की भोर में पतला चंद्रमा और मंगल एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। दोनों के बीच करीब तीन डिग्री का अंतर होगा। सुबह करीब 3 बजे इन्हें पूर्वी क्षितिज के ऊपर देखा जा सकेगा। करीब डेढ़ घंटे बाद बृहस्पति भी उनके पीछे नजर आएगा, जबकि शनि दक्षिण-पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा।
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8 सितंबर: चंद्रमा के साथ बृहस्पति
8 सितंबर को सुबह करीब 4 बजे चंद्रमा और चमकीला बृहस्पति पूर्वी आकाश में साथ दिखाई देंगे। सूर्योदय तक दोनों को देखा जा सकेगा।
11-12 सितंबर: मिल्की वे देखने का शानदार मौका
इन दिनों अमावस्या होगी, इसलिए चंद्रमा की रोशनी लगभग नहीं रहेगी। किसी अंधेरे और खुले स्थान से तारों के साथ मिल्की वे के चमकीले केंद्र, दूर की आकाशगंगाओं और गैस-धूल के बादलों को देखने का बेहतर अवसर मिलेगा। उत्तरी गोलार्ध में इस साल मिल्की वे के केंद्र को देखने के लिए यह आखिरी अच्छे मौकों में से एक होगा।
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14 सितंबर: चंद्रमा के करीब शुक्र
सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर बेहद पतला चंद्रमा शुक्र के करीब दिखाई देगा। दोनों करीब एक घंटे तक नजर आ सकते हैं।
18 सितंबर: सबसे चमकीला होगा शुक्र
शुक्र इस साल की अपनी शाम की उपस्थिति में सबसे अधिक चमकदार नजर आएगा। इसकी चमक इतनी ज्यादा होगी कि शहरों की रोशनी के बीच भी इसे आसानी से पहचाना जा सकेगा। इसके पास बुध भी दिखाई दे सकता है।
22 सितंबर: बढ़ सकती है उत्तरी रोशनी
22 सितंबर को उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत होगी। इस समय सूर्य से आने वाली ऊर्जा और पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण के बीच होने वाली गतिविधियों के कारण उत्तरी रोशनी ज्यादा सक्रिय हो सकती है। हालांकि इसे देखने की गारंटी नहीं है।
25 सितंबर: मंगल के साथ मिथुन के जुड़वां सितारे
मंगल मिथुन तारामंडल के प्रसिद्ध सितारों कैस्टर और पोलक्स के साथ लगभग एक सीधी कतार में दिखाई देगा। इनके नीचे मंगल और क्षितिज के करीब बृहस्पति भी नजर आएगा।
26 सितंबर: हार्वेस्ट मून
26 सितंबर को पूर्णिमा का चंद्रमा सूर्यास्त के आसपास उगेगा। क्षितिज के करीब यह सामान्य से बड़ा और नारंगी दिखाई दे सकता है। इसके पास शनि भी नजर आएगा। दूरबीन से देखने वाले लोग पास में नेपच्यून को भी खोज सकते हैं।
पूरे माह दिखेगी एंड्रोमेडा गैलेक्सी
एंड्रोमेडा गैलेक्सी हमारे सौरमंडल से करीब 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है।एंड्रोमेडा हमारी मिल्की वे की सबसे निकटतम प्रमुख आकाशगंगा है।पूरे सितंबर माह के दौरान साफ और अंधेरे आसमान में इसे हल्की धुंधली रोशनी के रूप में देखा जा सकता है। दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से इसका नजारा और शानदार होगा।