शोध में खुलासा: घरेलू सफाई उत्पाद व एयर फ्रेशनर्स पैदा कर रहे नैनोपार्टिकल, फेफड़ों को हो रहा गंभीर नुकसान
स्विट्जरलैंड के ईपीएफएल व अमेरिका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय के शोध में अहम खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक घरेलू सफाई उत्पाद व एयर फ्रेशनर्स नैनोपार्टिकल पैदा कर रहे हैं।फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो रहा है।
विस्तार
नींबू, चीड़ या अन्य खुशबू वाले घरेलू सफाई उत्पादों और एयर फ्रेशनर्स के इस्तेमाल से घर के अंदर हानिकारक नैनोपार्टिकल्स पैदा हो रहे हैं और ये स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। दरअसल ये सुगंधित उत्पाद हवा में मौजूद ओजोन के संपर्क में आने से रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण अरबों सूक्ष्म कण बनाते हैं जो सीधे फेफड़ों के गहरे हिस्से में पहुंच जाते हैं और गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
स्विट्जरलैंड की ईपीएफएल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर गहन अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। इस महत्वपूर्ण शोध को अमेरिकन केमिकल सोसायटी की 2026 की मीटिंग में भी प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में अमेरिका की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर ब्रैंडन बूर ने भी इसी पर विस्तृत शोध किया गया है। दोनों ही विवि का संयुक्त शोध घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर चेतावनी देता है।
नाक के बाल और बलगम को आसानी से पार कर जाते हैं
आकार में बेहद छोटे होने के कारण ये कण हमारे श्वसन तंत्र के प्राकृतिक फिल्टर (नाक के बाल और बलगम) को आसानी से पार कर सीधे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। इन कणों के लगातार संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सांस फूलना और फेफड़ों में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह अदृश्य प्रदूषण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
तो इस तरह से करें घर की सफाई
- सुगंध विहीन या कम सुगंधित क्लीनर चुनें।
- एक ही समय में कई सुगंधित उत्पाद इस्तेमाल न करें।
- सफाई करते समय एग्जास्ट फैन जरूर चलाएं।
- संभव हो तो खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन रखें।
- रासायनिक स्प्रे के बजाय सफेद सिरका, बेकिंग सोडा और पानी के मिश्रण जैसे पारंपरिक तरीका आजमाएं।
- ऐसे एयर प्यूरीफायर या उपकरणों का उपयोग बिल्कुल न करें जो ओजोन गैस छोड़ते हैं।
लिमोनेन और पाइनीन से पैदा होते हैं कण
नींबू या चीड़ व अन्य खुशबू वाले उत्पादों में लिमोनेन और पाइनीन जैसे रासायनिक यौगिक होते हैं। इन्हें मोनोएम्पीयर कहा जाता है। जब ये हवा में मौजूद ओजोन गैस के संपर्क में आते हैं, तो एक तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया होती है। इससे हवा में अरबों अल्ट्राफाइन पार्टिकल्स बन जाते हैं। ये पीएम-10 और पीएम2.5 से भी छोटे होते हैं, जिन्हें हम अपनी सामान्य आंखों से तो देख भी नहीं सकते।