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तृणमूल कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव: चुनाव आयोग पहुंचे ऋतब्रत बनर्जी, अब EC के पाले में गेंद; दावों में क्या?
Thu, 02 Jul 2026 02:44 PM IST
ज्योति भास्कर
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 02 Jul 2026 02:44 PM IST
पश्चिम बंगाल से जुड़ा राजनीतिक विवाद आज चुनाव आयोग तक पहुंचा। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस नेता ऋतब्रत बनर्जी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीते चार मई को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलाव को लेकर उन्होंने निर्वाचन आयोग (ECI) को विस्तार से जानकारी दी। जानिए पूरा मामला
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टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को एक बयान दिया। उन्होंने बताया कि उनके गुट ने पार्टी के संगठनात्मक बदलावों पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष प्रस्तुतियां दी हैं। बनर्जी ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग जल्द ही इस पर जवाब देगा।
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निर्वाचन आयोग के साथ बैठक के बाद बनर्जी ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि उनके गुट ने कोलकाता और नई दिल्ली दोनों जगह अपने कागज जमा किए थे। बनर्जी ने बताया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का 22 जून को एक विशेष सत्र हुआ था। सत्र के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से निर्वाचन आयोग को लिखित में जानकारी दी। इससे पहले उन्होंने कोलकाता में ईसीआई के अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी की।
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तृणमूल में बहुमत किसके पास, ऋतब्रत का दावा क्या?
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनका गुट पार्टी के भीतर बहुमत का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, "हम तृणमूल कांग्रेस हैं क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई से अधिक बहुमत है।" अधिकांश विधायक, पार्षद और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं।
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ईसीआई को कौन से दस्तावेज सौंपे गए?
बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिन में नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुंचा। यह बैठक तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद पर चर्चा के लिए थी। बनर्जी के अनुसार, 22 जून को कोलकाता में हुए प्रतिनिधि सत्र में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए थे। इस दौरान एक नई राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) का भी गठन किया गया था। इन संगठनात्मक बदलावों का विवरण निर्वाचन आयोग को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस में राजनीतिक संकट का आलम क्या?
यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी नेतृत्व पर दावे कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी में विभाजन हुआ था, जिससे राजनीतिक संकट गहरा गया। तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 58 ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए थे। इन बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया। उन्होंने एक नई 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति की भी घोषणा की।