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यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस में ही उलझा पेच: राहुल का विरोध, लेकिन पार्टी सांसदों ने की थी पैरवी; क्या है मामला?
Wed, 16 Sep 2026 11:29 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:29 PM IST
यूपीआई शुल्क को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की पुरानी सिफारिश सामने आई है। समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर और टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत बताई थी। इस समिति में पी. चिदंबरम समेत पांच कांग्रेस सांसद शामिल थे और 12 अगस्त को रिपोर्ट अपनाए जाने के समय मौजूद थे, जबकि प्रकाशित कार्यवाही में कोई असहमति दर्ज नहीं है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने फैसले पर सवाल उठाते हुए अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया, जिसे सरकार और एनडीए नेताओं ने खारिज किया है।
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राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा
- फोटो : @अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया है, जिसके तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) आधारित शुल्क व्यवस्था लागू करने की बात सामने आई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया है। इसी बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की एक सिफारिश चर्चा में आ गई है। समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर या राजस्व व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी।
समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
इस साल संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर व राजस्व व्यवस्था बनाने पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि इस व्यवस्था को बिना देरी अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए। उसका तर्क था कि यूपीआई व्यवस्था को लंबे समय तक सरकारी खजाने पर निर्भर रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है।
समिति की सिफारिश के अहम बिंदु
इन पांच कांग्रेस सांसदों की भूमिका क्या थी?
वित्त संबंधी स्थायी समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। ये पांचों 12 अगस्त को संसद में मौजूद थे, जब समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया। प्रकाशित कार्यवाही में किसी असहमति का उल्लेख नहीं है। हालांकि, उपलब्ध तथ्य यह बताते हैं कि वे समिति का हिस्सा थे और रिपोर्ट अपनाए जाने के समय मौजूद थे। इसे प्रत्येक सांसद की ओर से व्यक्तिगत तौर पर एमडीआर के हर प्रावधान का समर्थन मानना जरूरी नहीं है।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी को मिले उपहार अब आम लोग भी खरीद पाएंगे: 17 सितंबर से होगी ममेंटोज की ई-नीलामी, क्या-क्या होगा शामिल?
राहुल गांधी के आरोप पर सरकार ने क्या कहा?
बुधवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने राहुल गांधी की आपत्तियों को खारिज किया। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन से जुड़े फैसले से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को परेशानी नहीं होगी। उन्होंने अमेरिका के दबाव के आरोप को भी खारिज किया। भाजपा सांसद गुलाम अली कटाना ने भी सरकार के फैसले का बचाव किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों के बीच डर पैदा करने की कोशिश कर रही है।
सरकार ने अमेरिकी दबाव के आरोप पर क्या कहा?
रामदास आठवले ने राहुल गांधी के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी का यह आरोप कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया, पूरी तरह निराधार है। अमेरिका का इस फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।'
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समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
इस साल संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर व राजस्व व्यवस्था बनाने पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि इस व्यवस्था को बिना देरी अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए। उसका तर्क था कि यूपीआई व्यवस्था को लंबे समय तक सरकारी खजाने पर निर्भर रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है।
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समिति की सिफारिश के अहम बिंदु
- यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था जरूरी है, ताकि पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र को लगातार सरकारी मदद पर निर्भर न रहना पड़े।
- समिति ने चरणबद्ध राजस्व मॉडल तलाशने की बात कही, जबकि छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान बढ़ाने के लिए तीन साल की योजना और कैशबैक को भी जरूरी माना।
- समिति के मुताबिक, पहले की सिफारिशों के तहत चरणबद्ध एमडीआर व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान आगे बढ़ाए गए हैं।
- समिति ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर तय दर से एमडीआर लगाने की व्यवस्था की जा सकती है।
- समिति के अनुसार, इस ढांचे को लागू करने में देरी से भुगतान सेवा प्रदाताओं की सब्सिडी पर निर्भरता बनी रहेगी और साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी रोकने के निवेश पर असर पड़ सकता है।
- समिति ने टियर-3 से टियर-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित तीन साल की बहुवर्षीय योजना और कैशबैक व्यवस्था को भी जरूरी बताया।
- रिपोर्ट को 12 अगस्त को अपनाए जाने के समय समिति के पांच कांग्रेस सांसद मौजूद थे और प्रकाशित कार्यवाही में कोई असहमति दर्ज नहीं हुई।
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इन पांच कांग्रेस सांसदों की भूमिका क्या थी?
वित्त संबंधी स्थायी समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। ये पांचों 12 अगस्त को संसद में मौजूद थे, जब समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया। प्रकाशित कार्यवाही में किसी असहमति का उल्लेख नहीं है। हालांकि, उपलब्ध तथ्य यह बताते हैं कि वे समिति का हिस्सा थे और रिपोर्ट अपनाए जाने के समय मौजूद थे। इसे प्रत्येक सांसद की ओर से व्यक्तिगत तौर पर एमडीआर के हर प्रावधान का समर्थन मानना जरूरी नहीं है।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी को मिले उपहार अब आम लोग भी खरीद पाएंगे: 17 सितंबर से होगी ममेंटोज की ई-नीलामी, क्या-क्या होगा शामिल?
राहुल गांधी के आरोप पर सरकार ने क्या कहा?
बुधवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने राहुल गांधी की आपत्तियों को खारिज किया। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन से जुड़े फैसले से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को परेशानी नहीं होगी। उन्होंने अमेरिका के दबाव के आरोप को भी खारिज किया। भाजपा सांसद गुलाम अली कटाना ने भी सरकार के फैसले का बचाव किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लोगों के बीच डर पैदा करने की कोशिश कर रही है।
सरकार ने अमेरिकी दबाव के आरोप पर क्या कहा?
रामदास आठवले ने राहुल गांधी के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी का यह आरोप कि यह कदम अमेरिकी दबाव में उठाया गया, पूरी तरह निराधार है। अमेरिका का इस फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।'