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बिना मिट्टी के खेती: क्या है हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग, कैसे काम करती है यह तकनीक और कितनी है फायदेमंद?

Fri, 30 Oct 2026 08:31 AM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संकल्प प्रकाश सिंह Updated Fri, 30 Oct 2026 08:31 AM IST
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सार
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हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग में बिना मिट्टी के भी ताजी सब्जियां उगाना संभव है। यह फार्मिंग की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पानी और पोषक तत्वों की मदद से कम जगह में खेती की जा सकती है। 
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What Is Hydroponics Farming Kya Hai Know Types, Benefits And Disadvantages
Hydroponics Farming - फोटो : Amar Ujala AI Generated

विस्तार

क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि बिना मिट्टी के भी सब्जियां उगाई जा सकती हैं? हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग इसी सोच को हकीकत में बदलती है। हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग खेती की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें पौधों को मिट्टी के बजाय पानी में घुले जरूरी पोषक तत्वों की मदद से उगाया जाता है। इसमें पौधों की जड़ों तक पानी और पोषण पहुंचाने के लिए एक खास सिस्टम को तैयार किया जाता है।



इस तकनीक की मदद से कम जगह में भी खेती की जा सकती है। यही वजह है कि हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग का इस्तेमाल घरों की छतों से लेकर बड़े व्यावसायिक ग्रीनहाउस तक में किय जा रहा है। हालांकि, इसके लिए सही तकनीक, पोषक तत्वों के संतुलन की जरूरत होती है। आखिर यह पूरी प्रक्रिया काम कैसे करती है और क्या इसमें खेती करना क्या सच में फायदेमंद है भी या नहीं? 

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग की प्रक्रिया कैसे काम करती है?

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग में पौधों को उगाने के लिए मिट्टी की जगह पानी का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि सिर्फ पानी डाल देने से पौधे नहीं उगते। इसके लिए एक खास सिस्टम तैयार किया जाता है, जो पौधों की जड़ों तक जरूरी पोषण पहुंचाता है। इसकी शुरुआत पौधों के बीजों को छोटे-छोटे ग्रोइंग मीडियम में उगाने से होती है। कोकोपीट या रॉकवूल जैसे माध्यम पौधों की शुरुआती बढ़त में सहारा देने का काम करते हैं।

पौधे जब तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें हाइड्रोपोनिक सिस्टम में लगाया जाता है। इसके बाद पोषण की बारी आती है। पानी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। इस घोल को न्यूट्रिएंट सॉल्यूशन कहा जाता है। एक पंप के जरिए इसे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। कुछ सिस्टम में जड़े सीधे पोषक घोल में रहती हैं, जबकि दूसरे सिस्टम में पानी निश्चित अंतराल पर जड़ों तक पहुंचता है।

इस पूरी प्रक्रिया में पानी का पीएच लेवल, पोषक तत्वों की मात्रा और जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचना बेहद जरूरी होता है। अगर इनका संतुलन सही रहता है तो पौधों को अच्छा पोषण मिलता है। इससे उनकी वृद्धि अच्छी होती है। इस तरह मिट्टी के बिना भी पौधों को बढ़ने के लिए जरूरी परिस्थितियां तैयार की जा सकती हैं।

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग के प्रकार

आपको बता दें कि हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग में पौधों तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में समझा जा सकता है। इसमें एक्टिव और पैसिव सिस्टम शामिल हैं। 

एक्टिव सिस्टम 
इस सिस्टम में पौधों की जड़ों तक पोषक तत्वों वाला पानी पहुंचाने के लिए पंप को इस्तेमाल में लाया जाता है। एक टैंक में पोषक घोल जमा रहता है। पंप इस घोल को पाइपों के जरिए पौधों की जड़ों तक पहुंचाने का काम करता है। जड़ों द्वारा इस्तेमाल नहीं किया गया जो अतरिक्त घोल होता है वो वापस टैंक में लौट आता है। इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इस सिस्टम में पानी और पोषक तत्वों का जो प्रवाह होता है उसे नियंत्रित करना आसान होता है। हालांकि, इसके लिए पंप, पाइप और दूसरे उपकरणों की जरूरत पड़ती है। 

Hydroponics Farming
Hydroponics Farming - फोटो : Amar Ujala AI Generated

पैसिव सिस्टम 
पैसिव सिस्टम में पोषक घोल को घुमाने के लिए पंप की जरूरत नहीं होती। इसमें पानी और पोषक तत्व पौधों की जड़ों तक पहुंचाने के लिए गुरुत्वाकर्षण या केशिका क्रिया जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं का सहारा लिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केशिका क्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें पानी किसी पतली जगह या माध्यम से अपने आप आगे बढ़ता है। यह सिस्टम बनाना थोड़ा आसान होता है। हालांकि, इसमें पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। पानी को समय-समय पर बदलना पड़ सकता है और पर्याप्त सफाई न होने पर शैवाल पनप सकते हैं। 

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग के क्या फायदे हैं?

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग में पौधों को एक नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। इससे कीटों का खतरा कम होता है, जिसकी वजह से कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तकनीक में पौधों को पानी के जरिए जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनकी अच्छी वृद्धि में मदद मिलती है। इस खेती का एक बड़ा फायदा ये है कि शहरों में भी कम जगह पर सब्जियां उगाई जा सकती हैं। 

सबसे खास बात ये है कि हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग में पारंपरिक खेती के मुकाबले पानी की जरूरत कम पड़ती है। इसकी वजह यह है कि पौधों तक पहुंचाया गया अतिरिक्त पानी वापस टैंक में जमा हो जाता है और दोबरा इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि पानी की कमी और सूखे से प्रभावित इलाकों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। आपको बता दें कि इस तकनीक में कम जगह में अधिक पौधे उगाए जा सकते हैं। 

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग के नुकसान क्या हैं?

हाइड्रोपोनिक्स फार्मिंग का सेटअप तैयार करने में काफी खर्चा आता है। खासकर बड़े स्तर पर खेती करने के लिए। इसमें पंप और दूसरे उपकरण बिजली से चलते हैं। इस कारण बिजली कटने पर पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पानी का पीएच लेवल, पोषक तत्वों और तापमान की नियमित निगरानी जरूरी होती है। पानी के जरिए बीमारियां एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैल सकती हैं। इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए विशेष जानकारी और तकनीकी समझ का होना काफी जरूरी है। 

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