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उमर कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट: नेकां का दांव, कांग्रेस को फिर ऑफर, अधिकतम बनाए जा सकते हैं इतने मंत्री
Thu, 27 Aug 2026 08:59 AM IST
Sharukh Khan
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 27 Aug 2026 08:59 AM IST
उमर कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट के बीच सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दांव चला है। पार्टी ने फिर से कांग्रेस को ऑफर दिया है। प्रदेश कांग्रेस हाईकमान से चर्चा के बाद सरकार में शामिल होने पर अंतिम फैसला लेगी।
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Umar abdullah Cabinet
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को एक बार फिर सरकार में शामिल होने का न्योता दिया है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, नेकां ने हाल ही में कांग्रेस को मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। इसे लेकर नेकां नेतृत्व ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के जम्मू-कश्मीर प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन से चर्चा की है।
हुसैन ने हाईकमान से परामर्श के बाद जवाब देने की बात कही है। उन्होंने हालिया जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के एक सदस्य ने भी नेकां के ऑफर की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामला पार्टी के विचाराधीन है और हाईकमान ही अंतिम निर्णय लेगा।
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कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, नेकां ने हाल ही में कांग्रेस को मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। इसे लेकर नेकां नेतृत्व ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के जम्मू-कश्मीर प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन से चर्चा की है।
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हुसैन ने हाईकमान से परामर्श के बाद जवाब देने की बात कही है। उन्होंने हालिया जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के एक सदस्य ने भी नेकां के ऑफर की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामला पार्टी के विचाराधीन है और हाईकमान ही अंतिम निर्णय लेगा।
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कांग्रेस में भी चल रहा मंथन
जेकेपीसीसी के उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह चन्नी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा जारी है। प्रदेश कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले सरकार से बाहर रहने का फैसला किया था। अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज होने के कारण संभवतः नेकां ने कांग्रेस से रुख स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला हाईकमान से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
जेकेपीसीसी के उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह चन्नी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा जारी है। प्रदेश कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले सरकार से बाहर रहने का फैसला किया था। अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज होने के कारण संभवतः नेकां ने कांग्रेस से रुख स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला हाईकमान से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार : नेकां
दूसरी ओर, नेकां के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार करना और उसमें किसी को शामिल करना मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विशेषाधिकार है। कांग्रेस पहले से ही नेकां के साथ गठबंधन में है। नेकां पहले भी कांग्रेस से सरकार में शामिल होने का आग्रह कर चुकी है।
दूसरी ओर, नेकां के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार करना और उसमें किसी को शामिल करना मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विशेषाधिकार है। कांग्रेस पहले से ही नेकां के साथ गठबंधन में है। नेकां पहले भी कांग्रेस से सरकार में शामिल होने का आग्रह कर चुकी है।
नेता के मुताबिक, कांग्रेस जब भी सरकार में शामिल होने का फैसला करेगी, नेकां को कोई आपत्ति नहीं होगी। हालांकि, उनके स्तर पर फिलहाल किसी नए औपचारिक न्योते की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
अधिकतम नौ मंत्री बनाए जा सकते हैं
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत केंद्र शासित प्रदेश में सीएम समेत अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। वर्तमान में उमर सरकार सीमित संख्या में मंत्रियों के साथ काम कर रही है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत केंद्र शासित प्रदेश में सीएम समेत अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। वर्तमान में उमर सरकार सीमित संख्या में मंत्रियों के साथ काम कर रही है।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले जेकेपीसीसी अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं होगी। उन्होंने इसे पार्टी का सैद्धांतिक रुख बताते हुए कहा था कि कांग्रेस की प्राथमिकता मंत्री पद नहीं, बल्कि राज्य का दर्जा वापस पाना है।
कर्रा ने यह भी कहा था कि सरकार से बाहर रहते हुए कांग्रेस उसे पूरा समर्थन देती रहेगी और भाजपा के राजनीतिक हमलों के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
मंत्रिमंडल विस्तार में देरी से प्रशासन प्रभावित : रुहुल्ला
श्रीनगर से नेकां के सांसद सैयद आगा रुहुल्ला मेहदी ने जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल के विस्तार में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के आश्वासन कई बार दिए गए, लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया जा सका है। पहले जंतर-मंतर कार्यक्रम से पहले, फिर उसके बाद और बाद में 15 अगस्त से पहले और बाद में मंत्रिमंडल विस्तार की बातें कही गईं, लेकिन हर बार इसे टाल दिया गया।
श्रीनगर से नेकां के सांसद सैयद आगा रुहुल्ला मेहदी ने जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल के विस्तार में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के आश्वासन कई बार दिए गए, लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया जा सका है। पहले जंतर-मंतर कार्यक्रम से पहले, फिर उसके बाद और बाद में 15 अगस्त से पहले और बाद में मंत्रिमंडल विस्तार की बातें कही गईं, लेकिन हर बार इसे टाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक-एक मंत्री के पास चार से पांच विभाग हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। यदि कोई मंत्री सचिवालय से बाहर जाता है तो उसके कई विभागों का काम प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ता है।
सांसद ने कहा कि जिम्मेदारियां अधिक मंत्रियों में बांटने से शासन व्यवस्था सुगम होगी और जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि प्रशासन नियमित फैसले लेने में भी संघर्ष कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि व्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।