JSSC CGL Row: 1,932 अभ्यर्थियों की नौकरी पर छाया संकट टला, हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने पर लगाई रोक
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच JSSC CGL के 1,932 चयनित अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। इससे पहले JPSC को लेकर भी सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगाई गई थी।
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झारखंड में JSSC CGL और CDPO परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद नियुक्ति गंवाने के डर से परेशान अभ्यर्थियों के चेहरे पर फिर खुशी लौट आई है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट के आदेश से अभ्यर्थियों में खुशी
कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली। अभ्यर्थी प्रिंस राजपूत, विवेक कुमार, प्रतीक कुमार सिंह और समीर कुमार ने कहा कि पिछले दो दिन उनके जीवन के सबसे मुश्किल दिनों में रहे। उनका कहना था कि स्थिति ऐसी हो गई थी कि लग रहा था जैसे शरीर से प्राण निकल जाएंगे।
अभ्यर्थियों ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब काफी खुशी हो रही है। उन्हें उम्मीद है कि आगे भी सत्य की जीत होगी और न्यायालय से उन्हें राहत मिलती रहेगी।
दो दिन में पदाधिकारी से बेरोजगार होने का दावा
अभ्यर्थियों ने बताया कि दो दिन पहले तक वे अपने-अपने पदों पर काम कर रहे थे, लेकिन सरकार के परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के फैसले के बाद अचानक उनके सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया। इससे वे और उनके परिवार मानसिक तनाव में आ गए थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा राहत मिली है। अभ्यर्थियों ने कहा, “न्यायालय के न्याय के दम पर आज हम लोग फिर पदाधिकारी हैं।”
30 दिसंबर 2025 को 1932 अभ्यर्थियों को मिला था नियुक्ति पत्र
अभ्यर्थियों के मुताबिक, 30 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार ने 1,932 सफल अभ्यर्थियों को एक साथ नियुक्ति पत्र दिया था। इनमें एएसओ, बीएसओ, सीआई, एलईओ, प्लानिंग सहायक अधिकारी, बीडब्ल्यूओ और जेएसए समेत अलग-अलग पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद सभी अभ्यर्थी अपने-अपने पदों पर कार्यरत थे और सरकारी सेवा दे रहे थे। ऐसे में परीक्षा और नियुक्ति रद्द करने के फैसले के बाद उनके सामने अचानक नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया था।
हजारों परिवारों पर पड़ा था आर्थिक और मानसिक असर
अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकार के फैसले से सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि हजारों परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ था। नौकरी जाने की आशंका से परिवारों के सामने आर्थिक और मानसिक संकट पैदा हो गया था। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से उन्हें बड़ी राहत मिली है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि आगे होने वाली न्यायिक प्रक्रिया में भी उनके पक्ष में फैसला आएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।