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मरीज जागता रहा: डॉक्टर दिमाग से निकालते रहे ट्यूमर, एम्स देवघर में पहली बार हुई ‘अवेक क्रेनियोटॉमी’
Wed, 16 Sep 2026 06:04 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 16 Sep 2026 06:04 PM IST
एम्स देवघर में पहली बार जागृत क्रैनियोटॉमी के जरिए मरीज के होश में रहते हुए मस्तिष्क से ट्यूमर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर मरीज से लगातार संवाद करते रहे और न्यूरो मॉनिटरिंग की मदद से मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखा गया।
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एम्स देवघर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर ने अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हुए पहली बार जागृत क्रैनियोटॉमी की है। न्यूरोसर्जरी टीम ने एक मरीज के जागते रहने की स्थिति में ही मस्तिष्क से ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यह जटिल प्रक्रिया झारखंड और आसपास के इलाकों में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बनी है।
मरीज से लगातार बातचीत करते रहे डॉक्टर
जागृत क्रैनियोटॉमी न्यूरोसर्जरी की विशेष और अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। चिकित्सक इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय जागृत और प्रतिक्रियाशील रखते हैं। जब मस्तिष्क का ट्यूमर बोलने, चलने-फिरने, संवेदना या तंत्रिका तंत्र के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के करीब स्थित होता है, तब यह तरीका बहुत उपयोगी साबित होता है। शल्य चिकित्सा के दौरान चिकित्सकों की टीम मरीज से लगातार बातचीत करती रहती है। इससे ट्यूमर हटाते समय वास्तविक समय में ही मरीज की तंत्रिका संबंधी गतिविधियों का सही आकलन संभव हो पाता है। इस प्रक्रिया में न्यूरो मॉनिटरिंग प्रणाली ने बड़ी मदद की, जिसमें चिकित्सकों ने हल्के विद्युत प्रवाह का उपयोग करके मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का मानचित्रण किया। इस तकनीक के माध्यम से टीम ने महत्वपूर्ण हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया।
विशेषज्ञ टीम ने किया सफल इलाज
इस जटिल ऑपरेशन को पूरा करने में विभिन्न विभागों के डॉक्टरों ने आपस में बेहतरीन तालमेल दिखाया। न्यूरोसर्जरी विभाग की संकाय सदस्य डॉ. चंद्रिमा बिस्वास और कनिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार ने ऑपरेशन का संचालन किया।एनेस्थेसियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार, संकाय सदस्य डॉ. नेहा भारती, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गिरीश और कनिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार ने मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखा। इनके साथ ही ऑपरेशन थिएटर के नर्सिंग अधिकारियों और तकनीशियनों ने भी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इस बहुविषयक दृष्टिकोण के कारण ही टीम ने इस अत्यंत कठिन शल्य क्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
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ये भी पढ़ें- झीरम घाटी नक्सली हमला: 29 लोगों की हत्या के 10 दोषियों को फांसी की सजा, 13 साल बाद आया फैसला
स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से हो रहा विस्तार
एम्स प्रबंधन के अनुसार, मरीज बिना किसी तंत्रिका संबंधी समस्या के तेजी से ठीक हो रहा है। चिकित्सकों की टीम मरीज के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। यह नई उपलब्धि झारखंड और पड़ोसी क्षेत्रों के निवासियों को उनके घर के पास ही उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है। एम्स देवघर अब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के गंभीर रोगों के इलाज के लिए अपनी विशिष्ट न्यूरोसर्जिकल सुविधाओं का और अधिक विकास करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
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मरीज से लगातार बातचीत करते रहे डॉक्टर
जागृत क्रैनियोटॉमी न्यूरोसर्जरी की विशेष और अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। चिकित्सक इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय जागृत और प्रतिक्रियाशील रखते हैं। जब मस्तिष्क का ट्यूमर बोलने, चलने-फिरने, संवेदना या तंत्रिका तंत्र के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के करीब स्थित होता है, तब यह तरीका बहुत उपयोगी साबित होता है। शल्य चिकित्सा के दौरान चिकित्सकों की टीम मरीज से लगातार बातचीत करती रहती है। इससे ट्यूमर हटाते समय वास्तविक समय में ही मरीज की तंत्रिका संबंधी गतिविधियों का सही आकलन संभव हो पाता है। इस प्रक्रिया में न्यूरो मॉनिटरिंग प्रणाली ने बड़ी मदद की, जिसमें चिकित्सकों ने हल्के विद्युत प्रवाह का उपयोग करके मस्तिष्क के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का मानचित्रण किया। इस तकनीक के माध्यम से टीम ने महत्वपूर्ण हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया।
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विशेषज्ञ टीम ने किया सफल इलाज
इस जटिल ऑपरेशन को पूरा करने में विभिन्न विभागों के डॉक्टरों ने आपस में बेहतरीन तालमेल दिखाया। न्यूरोसर्जरी विभाग की संकाय सदस्य डॉ. चंद्रिमा बिस्वास और कनिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार ने ऑपरेशन का संचालन किया।एनेस्थेसियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार, संकाय सदस्य डॉ. नेहा भारती, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गिरीश और कनिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार ने मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखा। इनके साथ ही ऑपरेशन थिएटर के नर्सिंग अधिकारियों और तकनीशियनों ने भी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इस बहुविषयक दृष्टिकोण के कारण ही टीम ने इस अत्यंत कठिन शल्य क्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
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स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से हो रहा विस्तार
एम्स प्रबंधन के अनुसार, मरीज बिना किसी तंत्रिका संबंधी समस्या के तेजी से ठीक हो रहा है। चिकित्सकों की टीम मरीज के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। यह नई उपलब्धि झारखंड और पड़ोसी क्षेत्रों के निवासियों को उनके घर के पास ही उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है। एम्स देवघर अब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के गंभीर रोगों के इलाज के लिए अपनी विशिष्ट न्यूरोसर्जिकल सुविधाओं का और अधिक विकास करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।