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झारखंड: जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन के बीच रांची सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भी छात्र सड़क पर, मेस फीस का विरोध
Sun, 23 Aug 2026 09:25 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 09:25 PM IST
रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में मेस शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में रविवार को सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर बिना पर्याप्त सुविधाएं दिए शुल्क बढ़ाने का आरोप लगाया। आक्रोशित छात्रों ने मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
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आंदोलन पर बैठे छात्र
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विस्तार
जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन के बीच राजधानी रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भी छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। विश्वविद्यालय के हॉस्टल में मेस शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में रविवार को सैकड़ों छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर बिना पर्याप्त सुविधा दिए मेस शुल्क बढ़ाने का आरोप लगाया। आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए मुख्य द्वार पर आवाजाही प्रभावित रही।
छात्रों का कहना था कि मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पहले से ही संतोषजनक नहीं है। कई बार खाने में कंकड़ और कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आती रही है। इसके बावजूद अचानक मेस शुल्क बढ़ा दिया गया। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो शुल्क बढ़ाने का औचित्य क्या है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे पुरानी निर्धारित दर पर ही मेस शुल्क का भुगतान करेंगे और बढ़ी हुई राशि किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीन स्टूडेंट वेलफेयर समेत विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
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ये भी पढ़ें- Bihar: गयाजी में राहुल गांधी पर बरसे विजय सिन्हा, बोले- बिना संघर्ष बड़े पद पाने वाले नहीं समझते जमीनी हकीकत
मामले की जानकारी देते हुए डॉ. अनुराग लिंडा ने बताया कि पहले मेस का संचालन करने वाली एजेंसी कम दर पर भोजन उपलब्ध करा रही थी। हाल ही में नई एजेंसी को मेस संचालन की जिम्मेदारी मिलने के बाद शुल्क में बढ़ोतरी की गई, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ।
प्रबंधन ने छात्रों की मांगों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए मेस शुल्क के मामले में सकारात्मक आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त कर दिया। छात्रों ने कहा कि मेस की गुणवत्ता और शुल्क व्यवस्था पर वे आगे भी नजर बनाए रखेंगे।
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छात्रों का कहना था कि मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पहले से ही संतोषजनक नहीं है। कई बार खाने में कंकड़ और कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आती रही है। इसके बावजूद अचानक मेस शुल्क बढ़ा दिया गया। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो शुल्क बढ़ाने का औचित्य क्या है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे पुरानी निर्धारित दर पर ही मेस शुल्क का भुगतान करेंगे और बढ़ी हुई राशि किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
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प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीन स्टूडेंट वेलफेयर समेत विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
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मामले की जानकारी देते हुए डॉ. अनुराग लिंडा ने बताया कि पहले मेस का संचालन करने वाली एजेंसी कम दर पर भोजन उपलब्ध करा रही थी। हाल ही में नई एजेंसी को मेस संचालन की जिम्मेदारी मिलने के बाद शुल्क में बढ़ोतरी की गई, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ।
प्रबंधन ने छात्रों की मांगों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए मेस शुल्क के मामले में सकारात्मक आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त कर दिया। छात्रों ने कहा कि मेस की गुणवत्ता और शुल्क व्यवस्था पर वे आगे भी नजर बनाए रखेंगे।