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अयोध्या: चंपत की डायरी में दर्ज है चढ़ावा चोरी का पूरा घटनाक्रम, नृपेंद्र मिश्र ने पूछा था एफआईआर क्यों नहीं

Mon, 31 Aug 2026 04:17 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya हितेश सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
हितेश सिंह, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 31 Aug 2026 04:17 PM IST
सार
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चंपत राय की डायरी में एक अहम चिंता सामने आई कि मामला लंबा खिंचने और लगातार मीडिया की सुर्खियों में बने रहने से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता था। डायरी के अनुसार, चुनाव पर संभावित असर की बात सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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Ayodhya: The entire sequence of events regarding the theft of offerings is recorded in Champat Rai's diary.
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर के चढ़ावे की रकम चोरी होने के मामले में शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे सिर्फ जांच प्रक्रिया लंबी खिंचने की आशंका नहीं थी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव पर संभावित राजनीतिक असर की चिंता भी सामने आई थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तत्कालीन महासचिव चंपत राय की डायरी में दर्ज घटनाक्रम में इसका जिक्र है।

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डायरी के मुताबिक, चंपत राय ने आठ जून को अयोध्या पहुंचे मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अनूप मित्तल को चार जून से सामने आए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पीएफसी भवन में हुई इस बैठक में डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी मौजूद थे। इसी दौरान नृपेंद्र मिश्र ने सवाल उठाया कि मामले में अब तक पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। चंपत राय ने जवाब दिया कि एफआईआर दर्ज होते ही मामला पूरी तरह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में चला जाता। इसके बाद पुलिस अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करती और यह पता लगाना मुश्किल होता कि कार्रवाई कितने समय तक चलती। डायरी में यह भी दर्ज है कि तब तक चोरी की रकम का बड़ा हिस्सा खुर्द-बुर्द किए जाने की आशंका थी।
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इसी चर्चा में एक और अहम चिंता सामने आई कि मामला लंबा खिंचने और लगातार मीडिया की सुर्खियों में बने रहने से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता था। डायरी के अनुसार, चुनाव पर संभावित असर की बात सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

लखनऊ की बैठक में भी उठा एफआईआर का मुद्दा

एफआईआर को लेकर सवाल सिर्फ अयोध्या की बैठक तक सीमित नहीं रहा। डायरी के अनुसार, 11 जून को लखनऊ में हुई बैठक में भी चार जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। निर्धारित स्थान पर डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, भैयाजी जोशी, स्वामी गोविंद देव गिरि, नृपेंद्र मिश्र और कृष्ण मोहन पहुंचे। भोजन के बाद भैयाजी जोशी के साथ बैठक हुई, जिसमें बाद में लखनऊ क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सिंह भी शामिल हुए। बैठक में कुल सात लोग मौजूद थे। डायरी के मुताबिक, इस बैठक में भी घटनाक्रम की जानकारी साझा की गई और एफआईआर नहीं कराने को लेकर सवाल उठा।

बाद में पुलिस को दी गई जानकारी, नेपाल से पकड़ा गया आरोपी

डायरी में यह भी उल्लेख है कि बाद के चरण में पुलिस की सहायता ली गई और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी। पुलिस ने भी कार्रवाई में सहयोग किया। इसी दौरान चोरी करने वाले एक युवक के नेपाल सीमा की ओर जाने की सूचना सामने आई। डायरी के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर उस युवक को नेपाल से हिरासत में ले लिया। उसके कब्जे से चोरी की रकम भी बरामद की गई। इस घटनाक्रम से साफ है कि शुरुआती दौर में एफआईआर नहीं कराने का फैसला केवल पुलिसिया जांच की गति और चोरी की रकम बरामद करने की चिंता तक सीमित नहीं था। मामले के सार्वजनिक होने और उसके विधानसभा चुनाव पर संभावित असर को लेकर भी शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श हुआ था।

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