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नेपाल में जलप्रलय: यूपी के लिए बढ़ी चिंता; बारिश नहीं, पहाड़ का मलबा बन सकता है बाढ़ का 'टाइम बम'

Sun, 30 Aug 2026 08:25 AM IST
Bhupendra Singh विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 30 Aug 2026 08:25 AM IST
सार
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हिमालय में नदी रुकी तो यूपी तक बाढ़ का खतरा है। इसलिए गंडक के साथ गंगा और शारदा नदी तंत्र पर भी वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है। भूस्खलन, बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुका तो प्राकृतिक बांध टूट सकता है। आगे पढ़ें पूरा अपडेट...

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Nepal Floods Trigger Alarm in UP Himalayan Rivers Could Pose a Bigger Threat Scientist Warns
नेपाल में जलप्रलय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल में आई अचानक विनाशकारी बाढ़ ने उत्तर प्रदेश के हिमालयी नदियों से जुड़े इलाकों के लिए भी खतरे की चेतावनी दी है। चिंता केवल नेपाल से आने वाली गंडक नदी तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों से निकलने वाली भागीरथी, अलकनंदा और काली-शारदा जैसी नदी प्रणालियों में भूस्खलन, बर्फ या चट्टान खिसकने और मलबे से नदी का रास्ता रुकने की घटनाएं भी अचानक बड़ी बाढ़ का कारण बन सकती हैं।

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लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज के निदेशक व वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. महेश जी ठक्कर ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि हिमालयी आपदाओं को अब केवल भारी बारिश या बादल फटने के नजरिये से देखना पर्याप्त नहीं है।

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घाटियों और मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है मलबा

उन्होंने कहा कि नेपाल की ताजा घटना में बर्फ, चट्टान और मलबा खिसकने से नदी के रास्ते में अस्थायी रुकावट बनने और फिर अचानक भारी जलप्रवाह के संकेत मिले हैं। ऐसी रुकावट प्राकृतिक बांध का रूप ले सकती है। इसके टूटते ही पानी के साथ बोल्डर व मलबा तेज रफ्तार से नीचे की घाटियों और मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। 

उत्तराखंड में भी भूस्खलन से नदी रुकने और बाद में प्राकृतिक अवरोध टूटने की घटनाएं हो चुकी हैं। हालिया धराली हादसे ने भी दिखाया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ढलान, ग्लेशियर और मलबे में हलचल अचानक विनाशकारी बहाव का रूप ले सकती है।

यूपी के निचले इलाकों तक असर डाल सकता है जलप्रवाह

प्रो. ठक्कर ने बताया कि ऐसी घटनाओं का असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहता। नेपाल की त्रिशूली नदी आगे नारायणी और फिर गंडक नदी प्रणाली से जुड़ती है। इसलिए वहां अचानक बढ़ा जलप्रवाह और मलबा यूपी के निचले इलाकों तक असर डाल सकता है। 

भागीरथी और अलकनंदा गंगा प्रणाली का हिस्सा हैं, जबकि काली और उसकी सहायक नदियां शारदा नदी तंत्र से जुड़ती हैं। ऐसे में प्रदेश को स्थानीय बारिश के साथ हिमालयी गतिविधियों पर भी नजर रखनी होगी।

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हिमालयी कैचमेंट में रियल टाइम चेतावनी प्रणाली मजबूत करने पर जोर

उन्होंने सक्रिय बाढ़ मैदानों, पुराने नदी मार्गों और प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्रों के करीब अंधाधुंध निर्माण को बड़ा जोखिम बताया। उनके अनुसार केवल तटबंध पर्याप्त नहीं हैं। 

नेपाल से उत्तराखंड तक पूरे हिमालयी कैचमेंट में उपग्रह निगरानी, जलस्तर मापने वाले यंत्र, रिमोट सेंसर और रियल टाइम चेतावनी प्रणाली मजबूत करनी होगी, ताकि ऊपरी क्षेत्रों में नदी रुकने या प्राकृतिक अवरोध बनने की सूचना तत्काल निचले जिलों तक पहुंच सके।
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